Etawah News: निचली गंगा नहर में सिल्ट सफाई के नाम पर नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर खुलेआम अवैध खुदाई जारी

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संवाददाता: मनोज कुमार

इटावा: जिले के भोगनीपुर प्रखंड से निकलने वाली निचली गंगा नहर में इन दिनों भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आ रहा है। सिल्ट सफाई के नाम पर नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर खुलेआम अवैध खुदाई कराई जा रही है। नहर में पानी भरा होने के बावजूद भारी कॉम्प्लेन मशीनों को सीधे पानी के अंदर उतारकर खुदाई का कार्य कराया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार पानी भरी नहर में इस प्रकार की खुदाई की अनुमति नहीं होती। खुदाई के दौरान निकली सिल्ट को ट्रैक्टरों के माध्यम से बाहर ले जाकर बेचा जा रहा है। इससे न केवल सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि अवैध कमाई का खेल भी धड़ल्ले से चल रहा है। सामने आए वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि मशीन नहर के अंदर पानी में चल रही है, जो सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कार्य काफी समय से जारी है, लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं। जब इस पूरे मामले को लेकर अन्नदाता किसान यूनियन ने सिंचाई विभाग के एक्शन राकेश कुमार से फोन पर संपर्क किया, तो उनकी ओर से कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिससे विभाग की भूमिका और अधिक संदिग्ध हो गई। भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए अन्नदाता किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष प्रदीप यादव स्वयं मौके पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही वहां मौजूद ठेकेदार और जेई महिपाल में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में मशीन को पानी से बाहर निकलवाया गया और जिस रास्ते से मशीन नहर के अंदर लाई गई थी, उसे भी बंद करा दिया गया, ताकि यह स्पष्ट न हो सके कि मशीन कहां से लाई गई और कैसे बाहर निकाली गई। यह पूरा घटनाक्रम सच्चाई छिपाने के प्रयास की ओर इशारा करता है।

नहर की खुदाई इस कदर कर दी गई है कि उसका मूल स्वरूप ही बदल गया है। नहर पहले की तुलना में कहीं अधिक चौड़ी और गहरी दिखाई देने लगी है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो सिल्ट सफाई की आड़ में नहर के साथ गंभीर छेड़छाड़ की गई हो। इससे भविष्य में सिंचाई व्यवस्था और किसानों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है कि एक ओर वे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं और दूसरी ओर विभागीय मिलीभगत से नहर को लूट का जरिया बना दिया गया है। आरोप है कि सिंचाई विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी ठेकेदारों के साथ मिलकर सिल्ट बेचने का अवैध कारोबार चला रहे हैं। किसानों ने इस कार्य को बेहद खतरनाक भी बताया है। उनका कहना है कि यदि अचानक नहर में पानी का बहाव बढ़ गया, तो मशीन चला रहे ऑपरेटर की जान भी जा सकती है। ऑपरेटर भी एक किसान का बेटा है और उसकी जान को इस तरह जोखिम में डालना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। भ्रष्टाचार के चलते मजदूरों और किसानों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

अन्नदाता किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष प्रदीप यादव ने इटावा के जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उन्होंने दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो किसान यूनियन आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगी

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