Etawah News : करोड़ों के फर्जी आईटीसी रैकेट का खुलासा 5 आरोपी गिरफ्तार, 7 करोड़ की जीएसटी चोरी का मामला

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ब्यूरो संवाददाता

इटावा : फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। इस मामले में मंगलवार को 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, जबकि पहले गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी भी जेल में हैं। जांच में करीब 7 करोड़ 3 लाख रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से लैपटॉप, फर्जी जीएसटी इनवॉइस, ई बिल से जुड़े दस्तावेज और बिना नंबर प्लेट की कार भी बरामद की है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव के निर्देशन में की गई।

फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी चोरी

सहायक आयुक्त राज्य कर खंड 1 इटावा की लिखित तहरीर पर जिले में जीएसटी चोरी से जुड़े मामलों की जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने बिना किसी वास्तविक माल की खरीद बिक्री किए फर्जी टैक्स इनवॉइस जारी कर इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया। इन फर्मों द्वारा न तो कोई वास्तविक व्यापार किया गया और न ही सरकार को देय जीएसटी जमा किया गया। इससे सरकारी राजस्व को करीब 7 करोड़ 3 लाख रुपये की क्षति पहुंची।
WhatsApp Image 2026 02 03 at 10.17.29 PM 1तीन थाना क्षेत्रों में फैला एक ही गिरोह

विवेचना में यह स्पष्ट हुआ कि कोतवाली, फ्रेंड्स कॉलोनी और जसवंतनगर थाना क्षेत्रों में एक ही संगठित गिरोह सक्रिय था। फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र में एम एल बिल्डर्स और भारत बिल्डिंग मटेरियल नाम की फर्मों के जरिए बिना किसी माल आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस जारी कर आईटीसी पास ऑन की गई। वहीं जसवंतनगर क्षेत्र में भी भोले भाले लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम पर फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराया गया और करोड़ों का फर्जी टर्नओवर दिखाया गया।

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पहले तीन आरोपी गिरफ्तार कर भेजे गए जेल

जांच के दौरान अलग अलग थाना पुलिस ने नितिन गुप्ता पुत्र हरिओम गुप्ता निवासी दबग्रान थाना कोतवाली, जीशान पुत्र हारून निवासी मोहल्ला शाहकमर थाना कोतवाली और तरुण अग्रवाल पुत्र राकेश अग्रवाल निवासी कटरा सेवाकली थाना कोतवाली को गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेज दिया था। इन तीनों की भूमिका फर्जी फर्म संचालन और आईटीसी पास ऑन करने में अहम बताई गई।

दर्जनों फर्जी फर्म और डिजिटल सबूत मिले
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने एक से अधिक ई मेल आईडी के जरिए 50 से 60 जीएसटी पंजीकृत फर्में बनाईं। जांच के बाद जीएसटी विभाग ने कई फर्मों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। आरोपियों से जुड़े बैंक खातों, जीएसटी पोर्टल लॉगिन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जा रहा है। अन्य संलिप्त लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी है।

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