संवाददाता प्रताप सिंह आजाद
आगरा।दुनिया को विविध कलाओं ने सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया है। कला-संस्कृति लोगों को जोड़ती है, तोड़ती नहीं। यह कहना था प्रो. (डॉ.) चित्रलेखा सिंह का, जो मित्र सोसायटी द्वारा संयुक्त राष्ट्र दिवस पर होटल भावना क्लार्क इन में आयोजित “मित्र महोत्सव-2025” में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रही थीं। उन्होंने ग्लोब पर माल्यार्पण कर शांति का संदेश दिया।
कार्यक्रम में फेमिना मिस इंडिया वेस्ट बंगाल शिवांकिता दीक्षित विशेष अतिथि रहीं, जबकि अध्यक्षता डॉ. महेश धाकड़ (अध्यक्ष, मित्र सोसायटी) ने की।
फिल्म-टीवी अभिनेता सत्यव्रत मुदगल और संस्कार भारती ब्रज प्रांत के महामंत्री नंद नंदन गर्ग का अभिनंदन विनीत बवानिया और अविनाश वर्मा ने किया।

संस्कार भारती के महामंत्री नंद नंदन गर्ग ने कहा कि “संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के बाद ही छोटे देशों को वैश्विक सहयोग मिलने लगा। पहले ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।” उन्होंने बताया कि कैलीग्राफी की जड़ें प्राकृत भाषा में हैं, और आज भारत में सबसे उत्कृष्ट कैलीग्राफी कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा, “भारत का सांस्कृतिक आदान-प्रदान सूर्य उपासक देशों से भी बढ़ रहा है।”
आईआईएफटी के सेंटर डायरेक्टर विनीत बवानिया ने कहा कि “विश्व के अधिकांश धर्मों की उत्पत्ति भारत में हुई है। हमारा देश शांतिप्रिय रहा है, और हमने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया। युद्ध में कोई नहीं जीतता — मानवता की हार होती है।”
चाइल्ड एक्टिविस्ट नरेश पारस ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र संघ ने हर क्षेत्र में मानवता को सहारा दिया है। इंटरपोल जैसी संस्थाएँ अंतरराष्ट्रीय अपराध रोकने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।”
रंगकर्मी पार्थो सेन ने बताया कि “भारतीय रंगमंच भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से प्रेरित है, परंतु आधुनिक रंगमंच ने पश्चिमी तकनीक से भी बहुत कुछ सीखा है।”
फिल्म निर्देशक अविनाश वर्मा ने कहा, “सिनेमा का वैश्वीकरण स्वागतयोग्य है, पर हिंसा और अश्लीलता की अंधी दौड़ पर रोक लगनी चाहिए।”
टोनी फास्टर ने जोड़ा, “नृत्य भी वैश्वीकरण का प्रतीक है — भारत के शास्त्रीय नृत्यों के प्रति अब विदेशों में गहरा आकर्षण बढ़ रहा है।”