सुप्रसिद्ध दाऊ जी महाराज जल विहार मेले के शुभ अवसर बुध वार की शाम की अखिल भारतीय कवि सम्मेलन

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संवाददाता रणवीर सिंह : जरार बाह आगरा के जल बिहार मेले में बुध वार रात को कवि सम्मेलन में एक से एक बढ़ कर अपनी अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों जीता दिल। बटेश्वर क्षेत्र के कस्बाह जरार में लगने वाला सुप्रसिद्ध दाऊ जी महाराज जल विहार मेले के शुभ अवसर बुध वार की शाम की अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में दूर दूर शहरों से पधारे कवि  कवित्री यों ने जरार दाऊजी महाराज जल बिहार मेले में बुध वार की शाम को कवियों ने अपनी अपनी कविताओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को हास्य रस के कवियों ने एक दूसरे को लौट पॉट किया। कवित्री योगिता चौहान अपनी कविता के माद्ययम से बताया।

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गुड़िया या में चिड़िया कह दूं ,या वीणा के तार कहूँ मात पिता की लाठी कहूँ या या घर की प त वार कहूँ।
इस के वाद कविता के माध्यम से कवि लटूरी सिहं लट्ठ ने बोलते हुए कहा मेरे मुरझाए चहरे की हकीकत जान जाती है।कभी तकलीफ में होता हूँ माँ पहिचान जाती है।
उसके बाद शिवानी भदौरिया कवित्री ने बोलते हुए

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कहा जरू मिलता है कोई जब चीख ती है जिंदगी ।दर्द की चादर में लिपटी बीतती है जिंदगी।
उसके बाद कवि मुकेश श्रीवास्तव ने कहा कोई मोसम नहीं हूं में की आकर जम जाऊं में जमाना भूल न पाए में ऐसा काम करजाऊँ।

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कवि शरीफ शह बाज ने कहा बाल्मीक के जाप से निकला ये परिणाम।श्रद्धा होनी चाहिए मरा क हो या राम।

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कवि रमेश मुस्कान ने कहा बाबा जी के पास में आया एक आदमी रोता रोता बोला मेरी पत्नी को समझा दो वह सोती में कपड़ा धोता।बाबा बोले झूठ कहा कि अक्ल से पैदल रट्टू तोता पत्नी कोही समझा लेता तो में क्यों बाबा होता।।
एक से एक जरार जल दाऊँ जी जलविहार मेले में कवियों ने अपने अपने व्यंग शब्द से लोगों को हँसा हसाँ कर किया लॉट पॉट।मंच का संचालन मुकेश कुमार श्री वास्तव ने किया और कवियों का स्वागत मीडया प्रभारी ने किताब सिंह वर्मा ने शॉल ओढ़ाकर ओर मेला कमेटी के अध्यक्ष उमेश सिसोदिया ने आये हुए सभी कवियों को शॉल ओर माला डाल कर किया स्वागत।अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का संचालन मुकेश श्रीवास्तव नेकियान।

 

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