बिहार न्यूज़ : केला उत्पादन, प्रसंस्करण एवं उद्यमिता पर पांच दिवसीय कार्यशाला का सफल समापन
संवाददाता: राजेन्द्र कुमार
राजापाकर, वैशाली (बिहार)
राजापाकर। कृषि विज्ञान केंद्र, हरिहरपुर, वैशाली में “केला उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं उद्यमिता के अवसर” विषय पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य किसानों एवं अन्य प्रतिभागियों को केले की आधुनिक उत्पादन तकनीकों, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, अपशिष्ट के उपयोग तथा इससे जुड़े उद्यमिता के अवसरों की जानकारी देना था।

समापन समारोह में डॉ. मनोबुला, मुख्य वैज्ञानिक प्रज्ञा भदौरिया, वरीय वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)-अटारी, पटना तथा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर श्री राज पांडे सहित विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

देशभर के कृषि विशेषज्ञों ने ऑनलाइन दिया प्रशिक्षण
पांच दिवसीय कार्यशाला के दौरान देश के विभिन्न प्रतिष्ठित कृषि एवं अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने ऑनलाइन माध्यम से किसानों एवं प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। इनमें राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र, तमिलनाडु, बिरसा कृषि
विश्वविद्यालय, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग (CIAE), भोपाल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM), कुंडली, इकोग्रीन, समस्तीपुर, नवसारी कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात तथा भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ शामिल रहे।
केला उत्पादन और मूल्य संवर्धन की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केला उत्पादन की उन्नत तकनीक, केला प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्माण, केले के अपशिष्ट का उपयोग, केले के छद्म तने
(Pseudostem) से विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार करने तथा नवीन पैकेजिंग तकनीकों की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की तकनीक और प्रसंस्करण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। किसानों और वैज्ञानिकों के बीच केला उत्पादन एवं प्रसंस्करण से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों को केला आधारित विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
प्रसंस्करण के माध्यम से अतिरिक्त आय पर जोर
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि केले को केवल कच्चे फल के रूप में बेचने के बजाय प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।
कार्यशाला को किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए उपयोगी एवं रोजगारपरक बताते हुए प्रतिभागियों ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से कृषि उत्पादों का बेहतर उपयोग करने तथा कृषि आधारित उद्यम शुरू करने में मदद मिलेगी।
कृषि विज्ञान केंद्र की टीम का रहा महत्वपूर्ण योगदान
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल कुमार सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र, वैशाली के दिशा-निर्देशन में इंजीनियर कुमारी नम्रता, विषय विशेषज्ञ (कृषि अभियांत्रिकी) द्वारा किया गया।
कार्यशाला को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र की डॉ. कविता वर्मा, वैज्ञानिक (गृह विज्ञान), डॉ. जूना डाकू, वैज्ञानिक (उद्यान) तथा कर्मचारियों इशिता सिंह, अंशुमन द्विवेदी, रिचा श्रीवास्तव, रमाकांत, सोनू, मोहित, आरती एवं दीपक का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
प्रतिभागियों को वितरित किए गए प्रमाण-पत्र
कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को केला उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं उद्यमिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण और उपयोगी पहल बताया।