संवाददाता: विजय कुमार
प्रयागराज उत्तर प्रदेश
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज का 21वाँ दीक्षांत समारोह गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि प्रयागराज केवल एक शहर नहीं, बल्कि अध्यात्म, ज्ञान, न्याय, आस्था और बलिदान की पवित्र भूमि है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में कहा गया है— “प्रयागे प्रविष्टमात्रे पापं नश्यति”, अर्थात प्रयाग में प्रवेश करते ही पापों का नाश हो जाता है। उन्होंने बताया कि ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना के बाद यज्ञ एवं अनुष्ठान के लिए इसी पावन भूमि का चयन किया था। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम के कारण ही यह नगर प्रयागराज कहलाता है।

मंत्री उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के नाम पर होना प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि तीन प्रकार के नेता होते हैं—राजनेता, जो अगले चुनाव के बारे में सोचते हैं; भविष्यदृष्टा नेता, जो आने वाले दशकों की योजना बनाते हैं; और राष्ट्रनेता, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का निर्माण करते हैं। राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन ऐसे ही राष्ट्रनेता थे।
उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि प्रत्येक सफलता के पीछे माता-पिता का त्याग, संघर्ष और गुरुजनों का मार्गदर्शन होता है। भारतीय संस्कृति के अनुसार “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव” का संदेश जीवनभर स्मरण रखना चाहिए।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि संस्कारित, संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करना है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में शिक्षित युवा सबसे बड़ी शक्ति बनेंगे।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रदेश का एकमात्र मुक्त विश्वविद्यालय है, जो नौकरीपेशा लोगों, महिलाओं, दिव्यांगजनों तथा विभिन्न कारणों से नियमित शिक्षा प्राप्त न कर पाने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का अवसर प्रदान कर रहा है। उन्होंने उपाधि एवं स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।
राज्यमंत्री ने कहा कि आज का भारत अवसरों का भारत है, जहाँ तकनीक, ज्ञान-विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में अधिकांश बेटियां हैं, जो महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है।
उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत एक शिक्षिका के रूप में की और सेवा, समर्पण एवं निरंतर परिश्रम के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों तक पहुंचीं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में प्रदेश के विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र लगातार नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहे हैं।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।