मिसाइल मैन को याद कर रहा देश: मजहब से हटकर देशप्रेम की अलग मिसाल

The country is remembering the missile man
Share News

मिसाइल मैन को याद कर रहा देश: मजहब से हटकर देशप्रेम की अलग मिसाल

मनोज कुमार राजौरिया । ‘मिसाइल मैन’ के नाम से मशहूर दिवंगत 11 वे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज यानी 27 जुलाई को पुण्यतिथि है. कलाम ने अर्श से फर्श तक का सफर तय करने के लिए काफी मेहनत की और कई मुश्किलों का डटकर सामना भी किया. उन्हें जनता का राष्ट्रपति कहा जाता था. देश के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइलमैन के नाम से मशहूर एपीजे अब्दुल कलाम की पांचवी पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है।

The country is remembering the missile man

साल 2015 में आज ही के दिन शिलॉन्ग के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमैंट में स्पीच देने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। कलाम को भारतीय मिसाइल प्रणाली और अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में बेहद साधारण से मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम अवुल पकीर जैनुलआबदीन अब्दुल कलाम था। उनके पिता नाव चलाते थे और स्थानीय मस्जिद के इमाम थे, वहीं उनकी मां घर संभालती थीं। वे चार भाईयों और एक बहनों में सबसे छोटे थे। शुरुआती दौर में कमाई के लिए उन्होंने अखबार भी बांटे।

उन्होंने फीजिक्स और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इसके बाद अगले 40 साल उन्होंने बतौर वैज्ञानिक DRDO (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) और ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) में बिताए। साल 1997 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। भारत ने साल 1998 में पोखरण में जो परमाणु परीक्षण किए थे, वो उन्हीं के मार्गदर्शन में हुए थे।

साल 2002 में उन्होंने भारत के 11वें राष्ट्रपति पद की शपथ ली। वे साल 2007 तक इस पद पर रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति पद को एक नए आयाम तक पहुंचाया और आम लोगों के दिलों में जगह बनाई। खासकर बच्चों और युवाओं के बीच वे सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहे। उनकी पुण्यतिथि पर देशवासी उन्हें बड़े सम्मान के साथ याद कर रहे हैं।

देश के महान व्यक्ति और राजनेता रहे अब्दुल कलाम को पूरा देश आज याद कर रहा है. आम लोगों से लेकर कई नामी हस्तियों ने कलाम की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है.

◆ डॉ. कलाम की जिंदगी का आखिरी लेक्चर
अब बात करते हैं डॉ. कलाम के उस लेक्चर की जो कि उनकी जिंदगी का आखिरी लेक्चर बना. 27 जुलाई, 2015 सोमवार का दिन था और शाम हो रही थी. देश के सबसे प्रिय राष्ट्रपति डॉ. कलाम आईआईएम-शिलॉन्ग में एक लेक्चर दे रहे थे. ‘Creating a Livable Earth’ विषय को लेकर कलाम छात्रों को लेक्चर दे रहे थे. यह केवल उनके लेक्चर का विषय ही नहीं था, बल्कि यह उस किताब का भी टाइटल था, जिसे डॉ. कलाम अपने जीवनकाल में पूरा नहीं कर सके. 4 हजार शब्दों के विषय का यह लेक्चर उस समय अधूरा रह गया जब डॉ. कलाम बेहोश होकर स्टेज पर ही गिर गए. उन्हें पास के बेथानी अस्पताल ले जाया गया, पर देर शाम कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया.

जो छात्र देश के मिसाइल मैन का लेक्चर अटेंड कर रहे थे, उन्होंने बताया कि उन्होंने लेक्चर शुरू किया और दो ही वाक्य बोले थे कि बीच में ही वो गिर गए. हमें उनका पूरा लेक्चर सुनने का अवसर ही नहीं मिला.

जनवाद टाइम्स परिवार भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान लेखक, वैज्ञानिक “भारतरत्न”डॉ एपीजे अब्दुल कलाम “मिसाइल मेन” जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करता है।

Trending News