Lucknow News: योगी सरकार बेटियों को शिक्षा के साथ स्वावलंबन और रोजगार से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध: कपिल देव अग्रवाल
रिपोर्ट: विजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार बेटियों को स्कूली शिक्षा के साथ व्यावसायिक कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगार के योग्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) ने शैक्षिक सत्र 2026-27 में ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत प्रदेश के 71 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) की 2,672 छात्राओं को रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए संबंधित जनपदों में आवश्यक तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
हेल्थकेयर से लेकर आईटी और ग्रीन जॉब्स तक मिलेगा प्रशिक्षण
प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत छात्राओं को हेल्थकेयर, आईटी-आईटीईएस (IT-ITeS), अपैरल, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट तथा ग्रीन जॉब्स जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्राओं को विद्यालय स्तर से ही व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना तथा उन्हें भविष्य में रोजगार प्राप्त करने अथवा स्वरोजगार शुरू करने के लिए तैयार करना है।

व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ‘मिशन शक्ति’ और कौशल विकास मिशन के समन्वय से बेटियों को सशक्त, स्वावलंबी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि बेटियों के हाथों में किताबों के साथ-साथ हुनर की ताकत भी हो, ताकि वे अपने कौशल के बल पर आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सम्मानपूर्वक अपना स्थान बना सकें।
आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष जोर
प्रोजेक्ट प्रवीण के माध्यम से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप आधुनिक ट्रेड, कंप्यूटर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संबंधित प्रशिक्षण देने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य छात्राओं को बदलती तकनीकी आवश्यकताओं से परिचित कराना और उनके रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है।
2 नवंबर 2026 तक प्रशिक्षण कक्षाएं शुरू करने का लक्ष्य
कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने संबंधित प्रशिक्षण प्रदाताओं और जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (DPMU) को तैयारियां निर्धारित समयसीमा में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रशिक्षण केंद्रों की स्वीकृति, छात्राओं का पंजीकरण और प्रशिक्षण बैचों के गठन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर प्रत्येक स्थिति में 2 नवंबर 2026 तक कक्षाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
निर्देशों के अनुसार, मिशन पोर्टल पर प्रशिक्षण केंद्र और बैच की मंजूरी के लिए आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारियों को दो कार्यदिवस के भीतर निर्णय लेना होगा।
अधिकतम 300 घंटे का होगा कौशल प्रशिक्षण
प्रशिक्षण की अधिकतम अवधि 300 घंटे निर्धारित की गई है। प्रशिक्षण शुरू होने के सात कार्यदिवस के भीतर छात्राओं को पाठ्य-पुस्तकें और आवश्यक शिक्षण सामग्री उपलब्ध करानी होगी। सामग्री वितरण से संबंधित तस्वीरें मिशन पोर्टल पर अपलोड करना भी अनिवार्य होगा।
छात्राओं को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सॉफ्ट स्किल्स की शिक्षा भी दी जाएगी। संबंधित पाठ्यक्रम के साथ पोर्टल पर उपलब्ध एआई कोर्स अथवा ‘युवा एआई फॉर ऑल’ पाठ्यक्रम पढ़ाने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त व्यक्तित्व विकास, संवाद कौशल और कार्यस्थल पर प्रभावी व्यवहार से संबंधित सॉफ्ट स्किल्स पर भी जोर दिया जाएगा।
30 जनपदों सहित विभिन्न जिलों के विद्यालय होंगे लाभान्वित
प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत आगरा, अलीगढ़, बरेली, बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, एटा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोंडा, हरदोई, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, संभल, शाहजहांपुर, सीतापुर, सोनभद्र, उन्नाव और वाराणसी समेत विभिन्न जनपदों के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को शामिल किया गया है।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर रहेगी निगरानी
प्रशिक्षण संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल के पाठ्यक्रम के आधार पर एनसीवीटी (NCVT) एवं एनएसक्यूएफ (NSQF) मानकों के अनुरूप कराया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संबंधित काउंसिल द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा।
जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों को प्रत्येक 15 दिन में प्रशिक्षण केंद्रों और वहां उपलब्ध उपकरणों का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। मिशन निदेशक ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय पर कक्षाएं शुरू नहीं करने अथवा प्रशिक्षण की गुणवत्ता में लापरवाही बरतने वाली संस्थाओं के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस पहल के माध्यम से प्रदेश सरकार का उद्देश्य छात्राओं को शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल प्रदान करना, उनके रोजगार के अवसर बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।