New Delhi: Dr. Kamal Tawari (IAS) has been appointed as the Chief Advisor and Strategist in the National Apni Party.
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New Delhi: डॉ. कमल टावरी (आईएएस) नेशनल अपनी पार्टी में मुख्य सलाहकार एवं रणनीतिकार के रूप में नियुक्त किये गए

ब्यूरो संवाददाता 

दिल्ली : नेशनल अपनी पार्टी में श्रीमान डॉक्टर कमल टावरी जी (आईएएस अवकाश प्राप्त) जो कि भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सचिव एवं जिलाअधिकारी ग़ाज़ीपुर, कमिश्नर फैज़ाबाद उत्तर प्रदेश को माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान भगत सिंह बिष्ट जी ने माननीय राष्ट्रीय महासचिव, संगठन श्री संतोष कुमार सिंह जी के अनुमोदन पर नेशनल अपनी पार्टी का मुख्य सलाहकार एवं रणनीतिकार नियुक्त किया इस अवसर पर इस अवसर पर सभी कार्यकर्ताओं ने उनका पार्टी में हार्दिक स्वागत किया।

New Delhi: Dr. Kamal Tawari (IAS) has been appointed as the Chief Advisor and Strategist in the National Apni Party.

श्री संतोष कुमार सिंह राष्ट्रीय महासचिव, संगठन नेशनल अपनी पार्टी ने  श्रीमान डॉक्टर कमल टावरी (आईएएस अवकाश प्राप्त) के जीवनी के बारे में परिचय देते हुए उनकी जीवनी पर प्रकाश डाला जो निम्न हें,

Dr. Kamal Taori IAS (Regd.)

कोई डॉक्टर होता है, कोई इंजीनियर होता है, कोई पुलिस ऑफिसर होता है, तो कोई दुकानदार. इसी तरह हर इंसान की एक पहचान होती है, लेकिन बात जब कमल टावरी की आती है तो उनके लिए उपाधियां कम पड़ने लगती हैं. टावरी साहब एक फौजी भी रहे हैं, आईएएस ऑफिसर के रूप में कलेक्टर भी रहे, कमिश्नर भी रहे, भारत सरकार में सचिव भी रहे, एक लेखक भी हैं, समाज सेवी और मोटिवेटर भी हैं.

एक इंसान खुद में इतनी सारी उपलब्धियां समेटे होने के बावजूद भी इतनी सादगी से रहता है कि आप उन्हें देख कर विश्वास नहीं कर पाएंगे कि वे 2006 तक कई जिलों के कलेक्टर और कई जगहों के कमिश्नर रहने के अलावा राज्य और केन्द्र सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों के सचिव रह चुके हैं.

New Delhi: Dr. Kamal Tawari (IAS) has been appointed as the Chief Advisor and Strategist in the National Apni Party.

कमल टावरी की यही सादगी और खुल कर अपनी बात कहने की आदत उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाती है. सेवानिवृत्त होने के बाद से वह युवाओं को स्वरोज़गार के प्रति प्रेरित करते हैं तथा लोगों को तनाव मुक्त जीवन जीने का हुनर सिखाते हैं.

कमल टावरी का जन्म 1 अगस्त 1946 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ था. बचपन से ही इनमें कुछ अलग करने का जज़्बा था और इसी जज़्बे ने इन्हें हमेशा असंभव को संभव में बदलने की हिम्मत ही. कमल टावरी ने सिविल सर्विसेज में आने से पहले 6 साल तक सेना में एक अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दीं.

वह इंडियन आर्मी का हिस्सा रहने के दौरान कर्नल के पद पर रहे तथा 1968 में वह आईएएस बने. टावरी जी 22 वर्षों तक ग्रामीण विकास, ग्रामोद्योग, पंचायती राज, खादी, उच्चस्तरीय लोक प्रशिक्षण जैसे विभाग में लोगों की सेवा करते रहे. कमल टावरी के लिए कहा जाता है कि अगर सरकार इन्हें सज़ा के रूप में किसी पिछड़े हुए विभाग में भी भेजती थी तो ये अपनी कार्यशैली से उस विभाग को भी महत्वपूर्ण बना देते थे. टावरी साहब केन्द्रीय गृह मंत्रालय एवं नीति आयोग सहित विभिन्न राष्ट्रीय संस्थाओं में उच्च पदों पर स्थापित होने के साथ साथ उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर ज़िला के डीएमम तथा फ़ैज़ाबाद जो अब अयोध्या के नाम से जाना जाता है के कमिश्नर भी रहे.

कमल टावरी ने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए इतना अनुभव एकत्रित कर लिया कि उन्होंने इसके आधार पर 40 पुस्तकें भी प्रकाशित करवा लीं. बात इनकी शैक्षणिक योग्यता की करें तो इन्होंने एलएलबी होने के साथ साथ इक्नॉमीक्स में डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की है.

सादा जीवन उच्च विचार:-

एक आईएएस होने के दौरान विभिन्न उच्च पदों की शोभा बढ़ाने वाले टावरी साहब आपको हमेशा सामान्य लिबास में दिखेंगे. किसी गांव देहात के व्यक्ति की तरह लूंगी कुर्ता और गम्छा लिए कमल टावरी किसी से भी बोलते बतियाते मिल जाएंगे. हंसमुख स्वभाव, सबको प्रोत्साहित करते रहने की आदत और अपने अनुभवों से सजे हज़ारों किस्से हैं इनके पास. ऐसा नहीं है कि ये स्वभाव इन्होंने सेवानिवृत्त होने के बाद अपनाया है, बल्कि अपनी पोस्टिंग के समय से ही ये ऐसे ही हैं.

इनके खादी पहनने का किस्सा भी बहुत रोचक है. एक दिन अचानक ही संकल्प ले लिया कि आज से केवल खादी ही पहनेंगे और तब से खादी इनके तन से ना उतरी. भाग्योदय फाउंडेशन के राम महेश मिश्रा बताते हैं कि ये उनके सामने की घटना है. तब टावरी साहब उत्तर प्रदेश के ग्राम्य विकास सचिव थे.

लखनऊ के जवाहर भवन में ग्राम्य विकास आयुक्त के सभागार में कमल टावरी ने यह संकल्प ले लिया कि वह अब खादी के कपड़े ही पहनेंगे. तब से ये खादी उनके तन की शोभा बढ़ा रही है. टावरी साहब की दूसरी सबसे बड़ी ताकत रही उनके अंदर की साफगोई और ईमानदारी. वह सच के साथ हमेशा खड़े रहे, फिर चाहे जो भी अंजाम हो. उनके तबादले ऐसी ऐसी जगह हुए जहां जाने के नाम से अच्छे-अच्छे अधिकारियों की रूह कांप जाती है.

किन्तु, कमल टावरी को इससे कोई फर्क ही नहीं पड़ता था कि उन्हें कहां भेजा जा रहा है. वह बस अपनी ड्यूटी निभाना जानते थे. इनका हिसाब एकदम क्लियर था. अपनी नौकरी में कुछ साल बिताने के बाद इन्हें समझ आ गया था कि भले ही वह एक अधिकारी की कुर्सी पर बैठे हों, लेकिन कुछ भी तय करने का हक़ उनके पास नहीं है. अगर वह इसके खिलाफ जाते हैं तो अंजाम भुगतना होगा. टावरी इससे डरने वाले नहीं थे.

इन्होंने भी तय कर लिया कि कुछ भी हो जाए ये किसी के बताए रास्ते पर नहीं चलेंगे बल्कि अपना रास्ता और अपनी मंज़िल दोनों खुद ही तय करेंगे. आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने अपने एक लेख में टावरी साहब से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा लिखते हुए इनकी निर्भीकता का उदाहरण दिया है. यह 1985 की बात है, तब टावरी साहब फैज़ाबाद के कमिश्नर थे. उन्हें राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद से जुड़े एक मामले में कुछ आदेश मिला था, जो उन्हें उचित नही लगा.

परिणाम स्वरूप उन्होंने बात नहीं मानी. इसकी सज़ा के तौर पर उन्हें रातों रात पद से हटा दिया गया. टावरी साहब के तत्कालीन मुख्य सचिव ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से कहा कि टावरी अच्छे अधिकारी हैं. इस पर आगे से जवाब आया ‘तभी तो उन्हें एक बहुत अच्छे पद पर भेज रहे हैं.’ वो अच्छा पद था उत्तर प्रदेश खादी बोर्ड में सचिव का पद. इसे अधिकारी डंपिंग ग्राउंड कहते थे जहां आम तौर पर सज़ा के रूप में अधिकारियों के तबादले होते थे. टावरी ने उसी दिन यह निर्णय लिया कि वे अब किसी के पास पोस्टिंग की बात लेकर नहीं जाएंगे. इसके बाद उन्होंने खुद को ऐसी पोस्टों के लिए तैयार करना शुरू किया जो जिन्हें लोग डंपिंग ग्राउंड कहते हैं।