खाना खजाना देश

नववर्ष तुम आशा की किरणें ले आना

नववर्ष तुम आशा की किरणें ले आना
बीते हुए साल सा हमको न सताना
काटे बड़ी मुश्किलों से दुख भरे दिन
चैन न था दिल मे एक पल छिन
अच्छा लगा हमको तेरा गुजर जाना
नववर्ष।।।
थम सी गयी थी ज़िन्दगी की रफ़्तार
जो खोये थे अपनो को वो रोये जार जार
दे के खुशी उनके ज़ख्मो को भर जाना
नववर्ष।।।।
उसने हमें घरों में बंद कराया
मुँह में जानवरों की तरह मास्क बंधाया
इन बन्धनों तू हमे मुक्त कराना
नववर्ष।।।।।
दिन गिन गईं के तेरी राह तकी है
सपनो के पूरा होने की आस जगी है
सुख शान्ति की बयार सारे जग में बहाना
नववर्ष तू आशा की किरणें ले आना

नववर्ष मंगलमय हो

स्वरचित
जया मोहन
प्रयागराज