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Ambedkernager News: भारतीय बहुत ही हर्षोल्लास और खुशी के साथ अबीर रंगों और खुशियों का त्यौहार मनाते हैं: आचार्य राकेश पाण्डेय।

संवाददाता पंकज कुमार

होली हिन्दुओं का न सिर्फ बल्कि पूरे भारत का एक जाना-माना त्यौहार हैं। जिसे ज्यादातर भारतीय बहुत ही हर्षोल्लास और खुशी के साथ मनाते हैं। ये रंगों और खुशियों का त्यौहार हैं। इसे हर साल मार्च यानी फाल्गुन महीनें में मनाया जाता हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीनें की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता हैं उसके अगले दिन रंग खेलकर होली मनाई जाती हैं।

होलिका दहन की तिथि और शुभ मुहूर्तl
इस साल होलिका दहन 28 मार्च दिन रविवार को किया जायेगा और उसके अगले दिन यानी सोमवार 29 मार्च को होली खेली जाएगी। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 37 मिनट से 8 बजकर 56 मिनट तक हैं. इस मुहूर्त में होलिका दहन करना सबसे शुभ होगा।

होली खेलने का शुभ मुहूर्त और समापनl
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: इस साल होली 28 मार्च को प्रातः 03 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी।पूर्णिमा तिथि समापन:* ये 29 मार्च दिन सोमवार को रात 12 बजकर 17 मिनट पर खत्म होगी।

इस साल की होली होगी कुछ खास जानिए क्या हैं कारण
इस साल की होली बहुत ही शुभ हैं lपंचांग विद्वान आचार्य राकेश पाण्डेय के मुताबिक इस साल बहुत अच्छा संयोग बन रहा हैं। आचार्य के मुताबिक इस बार चन्द्रमा कन्या राशि में परिवेश करेगा जबकि बृहस्पति और शनि अपने ही स्थान पर विराजमान रहेंगे. इससे पहले ये संयोग आज से 449 साल पहले सन 1531 को 3 मार्च को बना था। इस साल होली खेलने से सर्वथा सिद्धि योग के साथ अमृतयोग भी रहेगा।

आचार्य राकेश पाण्डेय के अनुसार होलिका दहन के दिन सुबह स्नान व नित्यकर्मों से निवृत्त होकर शुभ मुहुर्त में पूजा करें।भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति रखें।यदि दोनों की चांदी की मूर्तियाँ हो तो सबसे अच्छा रहेगा।पहले दूध से अभिषेक करें।सम्भव हो तो दूध में केसर डाल लें।इसके बाद स्वच्छ जल से स्नान करायें साफ कपड़े से पोंछे और पीले वस्त्र पहनायें या चढाये।इस दौरान पीली मिठाई का भोग लगाये धूप-दीप के बाद आरती करें।और मन ही मन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते रहे।

होलिका दहन की पौराणिक कथाlपुराणों के अनुसार दानवराज हिरण्यकश्यप ने जब देखा कि उसका पुत्र प्रह्लाद सिवाय विष्णु भगवान के किसी अन्य को नहीं भजता,तो वह क्रुद्ध हो उठा और अंततः उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए, क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि नुक़सान नहीं पहुंचा सकती। किन्तु हुआ इसके ठीक विपरीत, होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ। इसी घटना की याद में इस दिन होलिका दहन करने का विधान है। होली का पर्व संदेश देता है कि इसी प्रकार ईश्वर अपने अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए सदा उपस्थित रहते हैं।जिससे भारतीय वर्ष में जब वसंत ऋतु का आगमन होता है तब होली का त्योहार मनाया जाता है हमारे समाज में इस त्यौहार को आपसी मनमुटाव खत्म करके, एक नए रिश्ते की शुरुआत करने का दिन कहा जाता है जिस दिन चारों ओर खुशियां ही खुशियां बटती नजर आती है और पुराने गिले-शिकवे को खत्म किये जाते है।