कैकई के चरित्र को भले ही दूनियां निंदनीय दृष्टि से देखती है लेकिन माता कैक्ई का चरित्र वंदनीय है-पारस मणि जी महाराज
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कैकई के चरित्र को भले ही दूनियां निंदनीय दृष्टि से देखती है लेकिन माता कैक्ई का चरित्र वंदनीय है-पारस मणि जी महाराज

राजेन्द्र कुमार हाजीपुर वैशाली।बिदुपुर के मोहनपुर गांव मे श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ के आठवे दिन अयोध्या से आए हूए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वक्ता श्री पारस मणि जी महाराज ने राम जी के वन गमन के प्रसंग पर प्रकाश डालते हूए कहा माता कैक्ई के चरित्र को भले ही दूनियां निंदनीय दृष्टि से देखती है लेकिन माता कैक्ई का चरित्र वंदनीय है। संसार के निंदा का विष पीकर दूनियां का कल्पना किया ।इसलिए श्रीराम ने माता कौशल्या से ज्यादा महत्व माता कैक्ई को दिया ।राम के जन्म भले ही कौशला निंदिया हो लेकिन श्रीराम ने जननी ऐसे श्ब्द से माता कैक्ई को संबोधित किया।श्रीराम मानो यह कहना चाहते है।

कैकई के चरित्र को भले ही दूनियां निंदनीय दृष्टि से देखती है लेकिन माता कैक्ई का चरित्र वंदनीय है-पारस मणि जी महाराज

अयोध्या के प्रिय राम को माता कौशला ने जन्म दिया लेकिन विश्व के प्रिय राम को माता कैक्ई ने जन्म दिया कैक्ई माता ने राम को वन भेजा माता के क्ईके नाते श्रीराम वन ग्ए।अगर राम वन जाते तो राम कि चरित्र अयोध्या राज्य की सीमा मे सिमट कर रह जाता।आज विश्व मे राम के चरित्र को कोई नही जानता।इसली माता कैक्ई का चरित्र निंदनीय नही बल्कि वंदनीय है।

कथा के मुख्य संयोजक प्रवीण कुमार ने कहा राम की कथा हमारे समाज के लिए हमारे परिवार के लिए बहुत जरूरी है।इसलिए हमने रामकथा कराने का निर्णय लिया।कोविड19से बचाव के लिए यज्ञ समिति के द्बारा श्रद्धालुओं के बीच मास्क व सैनिटाइजर का वितरण प्रतिदिन किया जाता है।मौके श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ मे विक्रम सिह, रामसुंदर ठाकुर अभिनय कुमार पासवान, अनिल सिह, रंजीत राय,विक्की कुमार, स़जय सिह आदि उपस्थित थे।