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Etawah News: भारत सरकार अनाफ शनाप रुपया खर्च कर रही है लेकिन उसका फायदा यहां निजी स्तर पर एक अधिकारी द्वारा उठाया गया ।

आशीष कुमार

इटावा: जसवंंतनगर नगर पालिका प्रशासन द्वारा शहर में बनाए गए चार आधुनिक सामुदायिक शौचालय जिनकी कुल लागत एक करोड़ से ज्यादा बताई गई है वो सफेद हाथी साबित हो रहे हैं और लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। स्वच्छ भारत मिशन की खुलेआम धज्जियां उड़ाए जाने पर सभ्रांत लोगों ने जिलाधिकारी से इन आधुनिक सामुदायिक शौचालयों के निर्माण रखरखाव व संचालन पर किए जाने वाले लाखों के घोटाले की जांच और दोषियों को दंडित किए जाने की मांग की है।

विवरण के अनुसार यहां नगर में कुल पांच सामुदायिक शौचालयों का निर्माण बीते तीन वर्ष पूर्व किया गया था और उद्घाटन भी वर्ष 2018 में होना शिलापट्टिकाओं में दर्शाया गया है। हालांकि निर्माण की लागत भी दर्शाई जाने थी वह जानबूझकर नहीं दर्शाई गई। इन सभी सामुदायिक शौचालयों का निर्माण एक संस्था के माध्यम से कराया गया और मिलीभगत कर घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया। यही कारण है कि कचौरा बाईपास स्थित नहर पुल के पास बने सामुदायिक शौचालय का फर्श धसक कर टूट जाना बताया गया है। इसका शटर उद्घाटन के दिन से ही अब तक बंद है और लोग इस शौचालय का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं इससे आजिज फुटपाथ दुकानदारों ने पिछले सप्ताह विरोध प्रदर्शन भी किया इसके बावजूद भी किसी अधिकारी ने उसे खुलवाने की जहमत नहीं उठाई और स्थानीय लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। इससे भी बुरी स्थिति कोठी कैस्त में बने सामुदायिक शौचालय की है जिसका शटर तो खुला हुआ है किंतु चारों ओर गंदगी फैली हुई है। शटर के बाहरी और अंदर की ओर फर्श बुरी तरह धसक कर टूट गया है। चारों ओर फैली गंदगी स्पष्ट कर रही है कि शौचालय के प्रयोग लायक न होने के कारण लोग बाहर ही मल मूत्र करते हैं जो सड़क से गुजरने वाले लोगों को भी बदबू से परेशानी पैदा कर रहा है। यहां गरीब कंजड़ बस्ती होने के कारण उनके तमाम घरों में शौचालय नहीं हैं वे लोग इस सामुदायिक शौचालय का प्रयोग तो करना चाहते हैं लेकिन मजबूरन इधर-उधर खुले में जाते हैं। इन घरों की महिलाएं और बच्चे भी शौच के लिए पास ही पड़े खुले मैदान में निकलते देखे सकते हैं। इसी तरह बंद पड़ा तीसरा सामुदायिक शौचालय मिडिल स्कूल परिसर में बना हुआ है जिसमें भी वर्ष 2018 में हुए उद्घाटन के दिन से ही शटर गिरा हुआ है और उसमें ताला लगा है। यहां भी किसी ने इस सामुदायिक शौचालय का प्रयोग होते नहीं देखा है। यहां मल मूत्र करने वाले लोग भी बाहर ही खुले मैदान का प्रयोग कर रहे हैं और गंदगी फैला रहे हैं। उनका कहना था कि यदि शौचालय खुला होता तो वह बाहर मल मूत्र त्याग करने को मजबूर न होते। इसी तरह चौथा बंद पड़ा सामुदायिक शौचालय सैफई रोड पर बना है इसकी भी हालत अन्य तीन बंद पड़े सामुदायिक शौचालयों की तरह है। यहां नजदीक में बस अड्डा बना होने और सैफई पीजीआई में मरीजों व तीमारदारों के आनेजाने के कारण काफी संख्या में सवारियों का आना जाना रहता है। किंतु शौचालय हमेशा बंद रहने के कारण आसपास के दुकानदार और सवारियां इसका प्रयोग नहीं कर पा रही हैं। इसके एक कोने का हिस्सा भी धसता हुआ खतरे को दावत देता दिखाई दे रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बंद पड़े शौचालय अक्सर उनका मुंह चिढ़ाते हैं और पुरुष ही नहीं महिलाओं को भी बाजार आने पर मल मूत्र त्याग करने के लिए खुले में जाना मजबूरी हो जाती है। स्वच्छ भारत मिशन का नारा देने वाली भारत सरकार अनाफ शनाप रुपया खर्च कर रही है लेकिन उसका फायदा यहां निजी स्तर पर एक अधिकारी द्वारा उठाया गया है। अब हैरानी की बात तो यह है कि इतने बड़े घोटाले के बावजूद भी उच्चाधिकारियों की आंखें बंद हैं। इस बाबत उपजिलाधिकारी ज्योत्सना बंधु से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि उक्त सभी सामुदायिक शौचालयों के निर्माण रखरखाव व संचालन की जिम्मेदार संस्था को ब्लैक लिस्टेड किया जा रहा है। लेकिन सवाल अब इस बात का है कि इस बड़े घोटाले में संलिप्त लोगों के खिलाफ क्या कोई कानूनी कार्रवाई होगी या इस घोटाले की रकम की रिकवरी होगी और कब तक इन बंद पड़े आधुनिक सामुदायिक शौचालयों का संचालन विधिवत शुरू हो पाएगा! यह सब समय की गर्त में छुपा हुआ है।