संवाददाता महेश बाबू
इटावा: एक तो कोरोना की मार, ओर तो और पेट्रोल-डीजल की महंगाई ने लोगों को बेहाल कर दिया है। कोरोना के साथ जिंदगी बिताते लोग साल 2021 को भी आधा पार कर गए लेकिन उन्हें क्या पता कि पेट्रोल और डीजल के भाव उन्हें इस कदर रुलाएंगे।
जिला इटावा की नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया(एनएसयूआई) व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इटावा तहसील में एकत्र होकर डीज़ल पेट्रोल की मूल्य वृद्धि व कमर तोड़ महगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, विरोध में कांग्रेसियों ने योगी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए जम कर नारेबाजी करते हुए सड़को पर जुलूस निकालकर ताली थाली बजाई।

तहसील परिसर व नगर पालिका चौराहे पर ज्यादा बड़ी संख्या में विरोधियों के एकत्र होने से आनन फानन में पुलिस ने मोर्चा संभाला और कांग्रेस जिला पदाधिकारियों को समझा कर विरोध प्रदर्शन बंद करवाया।

देश के कुछ हिस्से में तेलों के दाम 100 रुपये से ऊपर पहुंच गए और लोग किसी अन्य विकल्प की तलाश में लग गए जो उन्हें कम खर्चे में साधन और सवारी की सुविधा दे। आम धारणा तो यही है कि पेट्रोल डीजल मूल्य वृद्धि पर सरकार का खजाना भरता है और आमजन कंगाल होते हैं। बात कुछ हद तक जायज है क्योंकि आम आदमी पर खर्ज का बोझ बढ़ता है तो वह किसी मद में कटौती कर दूसरे मद की पूर्ति करता है। इससे उसकी आर्थिक हालत दयनीय होती है।