संवाददाता: राजेन्द्र कुमार
राजापाकर, वैशाली।
भाकपा (माले) के संस्थापक नेता कॉमरेड चारु मजूमदार का शहादत दिवस मंगलवार को राजापाकर स्थित दीक्षा पब्लिक स्कूल परिसर में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत एक मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करने तथा उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित करने के साथ हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भाकपा (माले) के प्रखंड अध्यक्ष सुमन कुमार ने की, जबकि संचालन जिला सचिव योगेंद्र राय ने किया।
जिला सचिव योगेंद्र राय ने अपने संबोधन में कहा कि चारु मजूमदार का जन्म पश्चिम बंगाल के एक संपन्न परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने आरामदायक जीवन का त्याग कर क्रांतिकारी मार्ग चुना। उन्होंने कहा कि चारु मजूमदार को नक्सलवादी आंदोलन का प्रमुख संस्थापक माना जाता है। 28 जुलाई 1972 को कोलकाता के लालबाजार थाना लॉकअप में उनकी मृत्यु हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय उनके पार्थिव शरीर को भी परिजनों को नहीं सौंपा गया।
प्रखंड सचिव सुमन कुमार ने कहा कि चारु मजूमदार द्वारा शुरू किया गया आंदोलन वर्ष 1966 के अकाल और किसानों की समस्याओं से जुड़ा आंदोलन था। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी किसानों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। खाद, बीज और कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों से किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है तथा कृषि उपज का उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी किसानों को नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सैटेलाइट टाउनशिप एवं अन्य परियोजनाओं के नाम पर किसानों की कृषि योग्य भूमि अधिग्रहित कर कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अधिक संख्या में अखिल भारतीय किसान महासभा की सदस्यता लेकर संगठित होने और किसान आंदोलन को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को भिखारी प्रसाद सिंह, राम बहादुर प्रसाद सिंह, रामबाबू प्रसाद सिंह, दिनेश प्रसाद सिंह, सुरेश चौधरी, बृज किशोर शाह, देवेंद्र शर्मा, रामचंद्र सहनी, परमानंद सिंह, विनोद राम, महताब राय और महेश प्रसाद सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।