संवाददाता मोहन सिंह
बेतिया/ पश्चिमी चंपारण।
अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय पार्षद सह पश्चिम चंपारण के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने जिला कलेक्टर के समक्ष संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आयोजित प्रदर्शन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पांच वर्ष पूर्व कोविड महामारी और देशव्यापी तालाबंदी के बीच केन्द्र सरकार ने तीन काले कृषि कानूनों की मदद से खेती को बड़े पूँजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों को सौंपने की साजिश रची थी।

मंडी अधिनियम और आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन कर केन्द्र सरकार ने फसल खरीद और खाद्य वितरण पर कॉरपोरेट जगत का कानूनी नियंत्रण स्थापित करने और मूल्य समर्थन और खाद्य सुरक्षा समाप्त करने की साजिश की। किसानों को उनकी जमीन से बेदखल कर उन्हें बंधुआ मजदूर बनाने की साजिश रची गई। अब उसे लागू करना शुरू कर दिया है जो किसान विरोधी है। उन्होंने कहा गन्ना मूल्य 600 रूपए किए बगैर पेराई सत्र शुरू हो गया।धान का मूल्य भी 3100 रुपए नहीं किया गया न उसकी खरीदारी शुरू हुई। ऑल इंडिया सेंट्रल कॉउंसिल ऑफ़ ट्रेड यूनियन (एक्टु) के जिला संयोजक जवाहर प्रसाद ने कहा कोरोना काल के समय वेतन, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा और औद्योगिक सम्बन्धों के क्षेत्र में पुराने 44 श्रम कानूनों को खत्म कर चार श्रम संहिताएं लाकर मजदूर वर्ग के अधिकारों को कमज़ोर करने की साजिश रची गई। इन श्रम संहिताओं में हड़ताल के अधिकार को सीमित करने, कार्यस्थल सुरक्षा को कमजोर करने, “हायर एंड फायर” नीति की अनुमति देने और 8 घंटे के कार्य-दिवस को बढ़ाकर 12 घंटे करने जैसे प्रावधान शामिल है। जिसकी वापसी के लिए संघर्ष जारी है।
अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य पार्षद बिनोद यादव ने कहा मोदी सरकार ने स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों को लागू करने और एमएसपी को कानूनी हक का दर्जा देने की जगह किसानों के साथ विश्वासघात किया है। तमाम मेहनतकश वर्गों के विरोध के बावजूद हाल में चार श्रम संहिताओं को लागू कर दिया। वहीं, कृषि विपणन नीति और श्रम शक्ति नीति जैसी किसान-विरोधी और मज़दूर-विरोधी नीतियों को पुनः लाया जा रहा है। अखिल भारतीय खेत ग्रामीण सभा के जिला अध्यक्ष संजय राम ने कहा केन्द्र सरकार की जनविरोधी विनाशकारी नीतियों के कारण एक तरफ किसान बढ़ती लागत और घटती आय के कारण कर्ज और आत्महत्या के शिकार हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मजदूर बेरोजगारी, महंगाई और शोषण के शिकार हैं। किसान नेता संजय यादव ने कहा भूमिहीन और बंटाईदार किसानों को सरकारी योजनाओं से वंचित किया जा रहा है। वहीं, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का बजट बार-बार घटाया गया है, जिससे मजदूरी का भुगतान लम्बित है और काम की उपलब्धता घट गई है। 100 दिनों की गारंटी के बदले औसतन केवल 44 दिन का ही रोजगार मिल रहा है।

कार्यक्रम में सुजायत अंसारी, फरहान राजा, भरत शर्मा, मंतोष कुमार, रौशन कुमार, कन्हैया कुमार, प्रभु राम, योगेंद्र यादव आदि ने संबोधित किया।