संवाददाता। मोहन सिंह बेतिया
पश्चिम चम्पारण के चनपटिया प्रखंड अंतर्गत तुनिया विशुनपुर पंचायत के हीरा पाकड़, परसा गिरि टोला, पतरखा और नौरंगिया (बड़ा व छोटा टोला) के किसान बिजली की असुविधा के कारण खेतों की सिंचाई के लिए आज भी सरकार व प्रशासन से टकटकी लगाए हुए हैं। आज जब देश प्रदेश कृषि के लिए लगातार सकारात्मक पहल करने में लगा हुआ है, वहीं सिर्फ बिजली की सुविधा खेतों तक नहीं होने के कारण किसान सिंचाई कराने में असमर्थ हो गए हैं। बढ़ते ईंधन के मूल्यों ने उन्हें जेनसेट पम्पिंग सेट से पटवन कराने में असमर्थ कर रखा है। जबकि किसान बिजली बिल देकर अपने खेतों में सिंचाई करना चाहते हैं पर उनकी गुहार बिहार की राजनीतिक और प्रशासनिक प्रदुषित कार्यालयों में घुलकर खत्म हो जाती है।
कृषि आधारित इस पंचायत के लगभग 3000 किसान परिवार खेती के इस मूलभूत सुविधा के लिए बेचैन हैं। जिसको लेकर स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि पंचायत दो दो नदियों चंद्रावत और चमइनिया नदी से घिरा हुआ है। पर उन नदियों में कभी पानी रहता ही नहीं है। दोनों नदियाँ स्वयं अपनी दुर्दशा का दंश झेल कर सिसक और विलख कर अविरलता की चाह रखी हुई है। पर जब किसानों की कोई सुनने वाला नहीं तो इन नदियों को कौन खबर लेता है? इसी कारण से यहाँ सिंचाई का अभाव है और इस अभावों के कारण गन्ना, हल्दी, लहर, मक्का, मसूरी, धान और गेहूँ की फसलों की अच्छी उपज लागत के अनुरूप नहीं होती है। जिससे किसानों की हालत ब्द से बदतर बनी हुई है। यहां की खेती जमीन बलुहट होने से सिंचाई अधिक खोजती है पर यहाँ सिंचाई ही नहीं कर पाते तो अधिक का प्रश्न ही नहीं बनता है।
ग्रामीण बताते हैं कि गांव में बिजली है और यदि यह बिजली लगभग दो किमी खेतों की तरफ और बढ़ा दिया जाए तो सभी किसान मीटर लगवा कर अपने बोरिंग से खेतों की सिंचाई कर सकते हैं, जिसके लिए बिजली बिल भी देने को तैयार भी हैं। जो ईंधन के तुलना में सस्ता है और किसानों के बजट में भी है। परन्तु आज 21 वीं सदी में भी खेतों के पटवन के लिए मोहताज है और ईंधन से आधा अधूरा, वर्षा के भरोसे और शीत के ठंडक के भरोसे खेती करने को विवश है। तीनों भरोसे से खेती राम भरोसे होती है और नुकसान उठाना पड़ता है।
अपनी समस्याओं को लेकर 2019 में चनपटिया प्रखंड में लगे कृषि शिविर में ग्रामीण किसानों ने अपना आवेदन देकर समस्या को दूर करने का मांग भी किया था, पर वो अब तक ठंडे बस्ते में ही है। उसके बाद से लेकर अब तक अनुमंडल पदाधिकारी सदर व जिला प्रशासन को कई बार आवेदन देकर अपनी समस्याओं के लिए निवेदन किया पर किसानों की मांग और अधिकारियो की बेरूखी की भेंट चढ़ गई।
अपनी समस्याओं को बताने और दिखाने वालों में श्रीनिवास प्रसाद, सुरेन्द्र प्रसाद, बच्चा लाल प्रसाद, सुकेश प्रसाद, अनिरुद्ध महतो, सत्यदेव प्रसाद, विश्वनाथ महतो, काशी महतो, शैलेश प्रसाद और राधा किशुन प्रसाद के साथ सैकड़ों किसान उपस्थित रहें।