संवाददाता-राजेन्द्र कुमार
सारण/सोनपुर ।
या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः से गुंज उठा हरिहर क्षेत्र
सोनपुर । या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः के श्लोक से हरिहर क्षेत्र के नगरी में गुंजायमान रहा। ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक बसंत पंचमी के दिन बुधवार को विद्या की देवी सरस्वती की उपासना बहुत ही धूमधाम से लोगों ने की। मौसम विपरीत रहने के बावजूद भी विद्यार्थी अपनी पूजा के लिए जम रहे।
बताते चले की चूकि सरस्वती को विद्या की देवी माना गया है। इसलिए ज्यादातर इनकी पूजा , अर्चना में कम उम्र से लेकर के अधिक उम्र तक के छात्र लगे रहते हैं। नाबालिक छात्रों के साथ उनके अभिभावक भी उनका सहयोग करते हैं । बुधवार को प्रखंड के विभिन्न कस्बे तथा क्षेत्र में जगह-जगह पर सुंदर पंडाल को सुसज्जित करके पूजा पाठ किया गया। जिसके तहत छात्र जहां सरस्वती मां से अपनी विद्या में बढ़ोतरी के लिए याचना किए तो बड़े भी अपनी बुद्धि विवेक कायम रहे इसके लिए माता के चरणों में प्रसाद, फूल, पान, लौंग ,इलाइची इत्यादि अर्पित किए।आज ही के दिन से लोग अबीर गुलाल का भी प्रयोग करना शुरू कर देते हैं तथा यह प्रयोग होली के अवसर पर गुलाल अबीर खेलने के बाद समाप्त कर दिया जाता है। वही मैट्रिक के वार्षिक परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी भी सभी विषयो के परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न होने की मन्नतें माँगी । पूजा के उपरांत सभी लोगों के बीच मां सरस्वती के प्रसाद वितरण किया गया। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भक्तिमय वातावरण से पूरा हरिहर क्षेत्र गूँजवान उठा । सुबह से लेकर शाम तक भक्ति गीतों व पंडितों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण बना रहा । पूजा अर्चना को लेकर भारी संख्या में महिलाओं एवं छात्र-छात्राओं की भी पूजा पंडाल में भीड़ उभर पड़ी विशेष कर छात्र-छात्राओं एवं बच्चों में उत्साह अधिक रहा । लोक सेवा आश्रम के व्यवस्थापक संत विष्णु दास उदासीन उर्फ मनी बाबा ने कहा कि आज ही के दिन से बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है, जो सभी ऋतुओं का राजा है। इस ऋतु में वृक्षों में नए नए पल्लव आने लगते हैं। शिशिर ऋतु के गमन के बाद प्रकृति का स्वरूप बदलकर अनुकूल होने लगता है । जिससे मनुष्य उत्साही और प्रसन्नचित्त हो जाता है। गुलाबी ठंड के साथ मौसम सुहाना हो जाता है।
खेतों में पीली सरसों चारों ओर निराली व हरियाली सुनहरी छटा बिखेरती है। चारों ओर सुंदर दृश्य, सुगंधित पुष्प, मंद मंद बहती पवन और ऊपर से कोकिला की कूक सबको आनंद से भाव विभोर कर देती है।