संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
बेतिया के बड़ा रमना स्थित बापू सभागार (ऑडोटोरियम) में ट्रेंड युनियनों, किसान मजदूरों व अपने जीवन, जीविका, रोजी रोजगार के लिए संघर्षरत किसान, मजदूर, छात्र युवा, महिला,आदिवासी व दलित संगठनों व बिहार बदलाव के आकांक्षी ताकतों के आह्वान पर बदलो बिहार समागम की तैयारी पूरी कर ली गई है। उक्त कार्यक्रम को भाकपा-माले महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य के अलावा भाकपा माले केन्द्रीय कमिटी सदस्या बिहार राज्य ससोइया संघ की अध्यक्ष कॉमरेड सरोज चौबे, अखिल भारतीय खेत ग्रामीण मजदूर सभा के सम्मानित राज्य अध्यक्ष सह सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता, आंगनबाड़ी वर्क्स और आशा कार्यकर्ताओं की नेत्री व विधान पार्षद शशि यादव भी संबोधित करेंगी। कार्यक्रम की तैयारी पूरी कर ली गई है। कार्यक्रम 11 बजे सुरू होगी जो शाम 4 बजे तक चलेगा, कार्यक्रम के बाद महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य शाम पटना लौट जाऐंगे।

उक्त बातें अखिल भारतीय किसान महासभा जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि दिल्ली और पटना की भाजपा- जदयू की नीतीश मोदी सरकार ने अपने – अपने रोज़ी रोजगार जीवन जीवीका के लिए संघर्षरत तोकतों का जीना हराम कर दिया है। उनकी मांगों और जरूरतों से मुख मोड़ लिया है। महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार इन सरकारों की पहचान बन गई है। खेती किसानी अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। छात्र युवाओं के लिए सरकार के पास लाठी गोली के अलावा कुछ भी नही है। महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों पर सबसे अधिक जुल्म बढ़ा हैं। भूमीहीन, पर्चाधारियों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार को समय नहीं है।
शिक्षक, कर्मचारी, आशा, आंगनबाड़ी, जीवीका, रसोइया, बिहार गृह रक्षा वाहिनी ( होमगार्ड), आल इंडिया फूड्स एलाइड वर्कर यूनियन, बिहार दस्तावेज नवीस संघ, ततवा संघ, वीएसएस प्रेरक सह प्रशिक्षण शिक्षा विभाग शिक्षा, फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन, मौसमी सिचाई कर्मचारी, ई रिक्शा चालक संघ, बिजली मजदूर, घरेलू कामगार, सफाई कर्मी, स्वास्थ कर्मी, बहुजनो -दलितों- आदिवासी संघर्ष मोर्चा,जैसी संगठीत ताकतों के मांगों को सरकार लगातार नजर अंदाज कर रहीं है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड कानून, उत्तराखंड में यू सी सी कानून बना कर धार्मिक अल्पसंख्यकों को डराने धमकाने और भाइचारा समाप्त कर उन्हें दोयम दर्जा की नागरिक बनाने में लगी है।