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Bihar News: किसी आपात स्थिति मे तथा बाढ,भूकंप, आंधी तूफान आने के पूर्व लोगो को सचेत तथा जागरूक करने हेतू थाना पलासी थाना,कुँआरी कुल 06स्थानो पर सायरन अधिष्ठापन किया गया।

मंटू राय संवाददाता

अररिया : किसी आपात स्थिति में यथा बाढ़, भूकंप, आंधी-तूफान इत्यादि आने के पूर्व लोगों को सचेत तथा जागरूक करने हेतु अररिया जिला अंतर्गत जोगबनी थाना, फारबिसगंज थाना, सिकटी थाना, पलासी थाना, कुंआरी थाना एवं अररिया थाना कुल 06 स्थानों पर सायरन अधिष्ठापन किया गया है। जो खासकर बाढ़ आने की स्थिति में जनसमूह तक सूचना पहुंचाने में तथा लोगों को सचेत करने में सायरन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सभी सायरन के सुचारू रूप से कार्य करने हेतु मॉकड्रिल का संचालन किया जाना आवश्यक है। इसको लेकर जिला पदाधिकारी श्री प्रशांत कुमार सीएच द्वारा मॉकड्रिल हेतु दिनांक 26 अप्रैल 2021 को 11:00 बजे पूर्वाह्न में समय निर्धारित किया‌ गया है। सफल मॉकड्रिल के उपरांत जिलाधिकारी द्वारा सायरन संचालन हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) निर्धारित किया जना है। इसके तहत सायरन का संचालन जिला पदाधिकारी को प्राप्त किसी आपात स्थिति की सूचना के उपरांत जिला पदाधिकारी के आदेशानुसार जन समूह को सावधान करने हेतु किया जाएगा। सायरन की उपयोगिता के महत्व के संबंध में लोगों को अभी से जानकारी दिया जाना उचित होगा कि सायरन बजाने का उद्देश्य क्या है। सायरन के बजने से लोगों के बीच अराजक की स्थिति पैदा ना हो, इस लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि/ गणमान्य व्यक्ति/ सामाजिक संस्थाओं तथा स्थानीय थानेदारों को पूर्व से ही प्रशिक्षित किया गया है। जिसे आपदा प्रबंधन पर प्रशाखा एवं स्थानीय प्रशासन के सहयोग से संपादित किया जाएगा। सायरन बजाने का मॉकड्रिल प्रत्येक 6 माह में महीने की 1वीं तारीख को एक बार 2 मिनट तक के लिए सुबह 6:00 बजे किया जा सकता है। जिससे लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल ना बने, इसके लिए अररिया जिले के सर्वसाधारण को जागरूक होना आवश्यक है।आपात स्थिति की सायरन बजाने हेतु एक 1-1 मिनट के समय अंतराल पर 5-5 मिनट के लिए तीन बार ही उपयोग किया जाएगा। सायरन के मॉकड्रिल के पूर्व इसके बारे में आम लोगों को जागरूक होना आवश्यक है। सायरन की देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय थाना एवं अंचलाधिकारी को दी गई है। सायरन का उपयोग बिना अनुमति किया जाना अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। उक्त कार्य हेतु आपदा प्रशाखा एवं स्थानीय प्रशासन को समय-समय पर स्थानीय लोगों को विभिन्न माध्यमों से जागरूक करने का दायित्व दिया गया है।