संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पश्चिम चम्पारण के बेतिया बलथर थाना में हिरासत में लिए गये अनिरुद्ध यादव की मौत के.मामले में घटना के 7 माह के बाद संज्ञान लिया है। साथ ही संज्ञान लेते हुए बेतिया पुलिस अधीक्षक को नोटिस भी जारी कर अनिरुद्ध यादव के मौत के पश्चात हुए पुलिसिया कार्यवाही पर अब तक किए गए कार्यवाही की रिपोर्ट 4 सप्ताह के अंदर आयोग को देने को निर्देशित किया है।
बेतिया बलथर थाना के आर्या नगर, वार्ड नंबर 7 के स्वर्गीय अनिरुद्ध यादव (बलथर थाना में हिरासत में मौत हुए) की पत्नी
सुशीला देवी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को 19 अप्रैल 2022 को एक शिकायत डायरी नंबर 6096/IN/2022 दर्ज करवाया था जिसमें आयोग ने 6 माह की सुनवाई के बाद मामले की पूरी जांच रिपोर्ट तलब की है।
आवेदिका सुशीला देवी ने अपने शिकायत आवेदन में आरोप लगाया है कि बलथर थाना व्दारा उनके पति अनिरुद्ध यादव को हिरासत में लेकर मारपीट कर हत्या कर दिया गया। जिसके पश्चात जब परिजनों ने अचानक मौत होने का कारण बलथर पुलिस से पूछा तो पुलिस ने भेदभाव पूर्ण व्यवहार करते हुए मारपीट और गोलीबारी शुरू कर दिया तथा मृतक के बूढ़ी मां एवं परिजनों को बेरहमी से मारा पीटा गया।
अनिरुद्ध यादव के मौत के रहस्य को दबाने और शिकायत नहीं दर्ज करने के आवाज को दबाने को लेकर थाना पर हुए एक पुलिसकर्मी के मौत की प्राथमिकी दर्ज कर हत्या के धारा 302 भादवि में फंसा दिया गया और मेरे पति अनिरुद्ध यादव की मौत की वजह मधुमक्खी के काटने को बताकर हत्या के कांड को कमजोर बना दिया गया। जिसकी कहीं भी सुनवाई नहीं होने और न्याय नहीं मिलने पर शिकायतकर्ता महिला सुशीला देवी ने आयोग में शिकायत कर हस्तक्षेप करने का गुहार लगायी थी ।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की जांच रिपोर्ट व किए गए कार्यवाही की रिपोर्ट 4 सप्ताह के अंदर बेतिया पुलिस अधीक्षक को समर्पित करने का निर्देश दिया है। वहीं इस जारी नोटिस से बलथर कांड में फंसे निर्दोष लोगों को एक बार फिर निष्पक्ष जांच होने व न्याय की उम्मीद जग गई है। हालांकि घटना को बीते लगभग 7 माह गुजर गए हैं परन्तु अबतक गांव गिरफ्तारी के डर वीरान पड़ा हुआ है। आज भी ग्रामीण अपना घर बार छोड़ कर भाग कर अन्यत्र शरण लिए हुए हैं।
विदित हो कि इसी साल होली के दिन पुलिस व प्रशासन के द्वारा होली में प्रतिबंधित डीजे बजाने को लेकर अनिरुद्ध यादव को हिरासत में लेकर बलथर थाना लाया गया था। जहां उसकी अचानक मौत हो गई थी। जिसके बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया और धीरे धीरे जमा हुआ उग्र भीड़ ने थाना पर हमला कर तोड़ फोड़ और आगजनी की। जिसमें एक पुलिस हवलदार की मौत भी हो गई थी। घंटों मशक्कत के पश्चात भारी पुलिस बल के साथ पुलिस अधीक्षक उपेन्द्रनाथ वर्मा ने स्थिति पर काबू पाया था और कई माह तक पूरा क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील रहा।