Bihar News :बेतिया जमाबंदी फर्जीवाड़ा: प्रमंडलीय आयुक्त सख्त, दोषी कर्मियों पर FIR का निर्देश

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रिपोर्टर राजेंद्र कुमार

बेतिया/पश्चिमी चंपारण। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में जमीन की जमाबंदी में कथित फर्जीवाड़े के मामले को तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने जिलाधिकारी, पश्चिमी चंपारण को मामले में दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने, दंडात्मक कार्रवाई करने और जमाबंदी में परिवर्तन का आदेश देने वाले पदाधिकारी का नाम स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले में उनकी भूमिका स्पष्ट करते हुए विस्तृत प्रतिवेदन भी मांगा है।

मामला बेतिया अंचल के पूर्वी कर्गहिया मौजा एवं हल्का स्थित जमाबंदी संख्या-105 से जुड़ा है। आरोप है कि करीब 50 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही जमाबंदी को बिना सक्षम न्यायालय के आदेश के शून्य कर दिया गया और भूमि के अभिलेख में किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर ऑनलाइन जमाबंदी दर्ज कर दी गई। इस मामले में प्राप्त परिवाद के आधार पर प्रमंडलीय आयुक्त ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

5 एकड़ 62.5 डिसमिल जमीन की जमाबंदी में बदलाव का आरोप
प्रमंडलीय आयुक्त को दिए गए परिवाद पत्र में उल्लेख किया गया है कि जमाबंदी संख्या-105 के अंतर्गत कुल 5 एकड़ 62.5 डिसमिल भूमि की जमाबंदी लंबे समय से परिवादी के पिता के नाम पर चली आ रही थी। परिवाद के अनुसार, इस भूमि का नियमित रूप से लगान भी जमा किया जाता रहा है।

परिवादी का आरोप है कि उक्त जमाबंदी को विधि-विरुद्ध तरीके से समाप्त कर उनके परिवार से संबंध नहीं रखने वाले किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर नई जमाबंदी कायम कर दी गई। इसके लिए संबंधित खाता-खेसरा को बेतिया राज की भूमि से संबंधित बताया गया, जबकि परिवादी का कहना है कि वर्तमान में उक्त भूमि का बेतिया राज से कोई संबंध नहीं है।

बिना न्यायालय के आदेश के जमाबंदी निरस्त करने पर सवाल
आयुक्त ने मामले में उपलब्ध तथ्यों का संज्ञान लेते हुए कहा कि किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के बिना लंबे समय से चली आ रही जमाबंदी को निरस्त करना या उसमें छेड़छाड़ करना उचित नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि ऑनलाइन दर्ज जमाबंदी में किस परिस्थिति में बदलाव किया गया और यह कार्रवाई किस पदाधिकारी के आदेश पर हुई।

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आयुक्त के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला केवल जमाबंदी रद्द करने का नहीं, बल्कि अभिलेखों में कथित अनियमितता और संभावित फर्जीवाड़े का प्रतीत होता है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

नई जमाबंदी में केवल 53 डिसमिल जमीन दर्ज होने पर सवाल
मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि नई कायम की गई जमाबंदी में कथित तौर पर केवल 53 डिसमिल भूमि ही दर्ज है, जबकि मूल जमाबंदी में कुल 5 एकड़ 62.5 डिसमिल जमीन शामिल होने की बात कही गई है। आयुक्त ने शेष भूमि के अभिलेख और उसकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
उन्होंने निर्देश दिया कि गलत तरीके से बदली गई जमाबंदी की जांच कर अभिलेखों में आवश्यक सुधार किया जाए और नियमानुसार सही व्यक्ति के नाम जमाबंदी कायम करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी को दिए गए पांच प्रमुख निर्देश
प्रमंडलीय आयुक्त ने जिलाधिकारी, पश्चिमी चंपारण को मामले में निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

जमाबंदी में सुधार: बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश के किए गए कथित गलत बदलाव की जांच कर अभिलेखों को नियमानुसार सही कराया जाए तथा संबंधित भूमि की जमाबंदी सही व्यक्ति के नाम कायम करने की कार्रवाई की जाए।
दोषियों पर कार्रवाई: मामले में जिम्मेदार पाए जाने वाले कर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

आदेश देने वाले पदाधिकारी की पहचान: यह स्पष्ट किया जाए कि जमाबंदी को शून्य कर दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज करने का आदेश किस पदाधिकारी ने दिया था। संबंधित आदेश और पदाधिकारी का नाम भी प्रस्तुत किया जाए।

बदलाव के कारणों का खुलासा: जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता (राजस्व) और अंचलाधिकारी, बेतिया के स्तर से यदि कोई आदेश जारी किया गया था, तो उसके आधार और परिस्थितियों की जानकारी दी जाए।
ऑनलाइन अभिलेखों में छेड़छाड़ की जांच: अंचलाधिकारी, बेतिया यह स्पष्ट करें कि ऑनलाइन दर्ज जमाबंदी में किस प्रकार बदलाव किया गया। इसमें संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।

21 अक्टूबर को आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश
आयुक्त ने जिलाधिकारी, पश्चिमी चंपारण, अपर समाहर्ता (राजस्व) और अंचलाधिकारी, बेतिया को मामले से संबंधित प्रतिवेदन के साथ 21 अक्टूबर 2026 को प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। प्रतिवेदन पूर्वाह्न 12 बजे तक उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि जमाबंदी में परिवर्तन के आदेश, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और पूरी प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट हो सके।

राजस्व मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने तिरहुत प्रमंडल के सभी जिलों के राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राजस्व संबंधी मामलों का निष्पादन नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारी निर्धारित कर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जनहित से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।

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