आंख फूटी पीर गयी? नीरसता भरे वातावरण में आस्था के मन्दिर का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया , राम का नाम सत्य है- मोदी मंडली में सत्य को स्वीकार करने की शक्ति नहीं- डा0 धर्मेन्द्र
गाॅधी लोहिया थे असली राम भक्त नरेन्द्र मोदी व संध को उनके आदर्श व सिद्धान्तों से सबक लेना चाहिए।
राम सबके हैं, सबके राम हैं? राम सर्वव्यापी हैं वह मर्यादा पुरूषोत्तम राम हैं- मोदी जी उनसे सीखें राजधर्म का पालन, राम को राजनीति का मोहरा न बनायें -खादिम अब्बास
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया संविधान की मर्यादाओं का सम्मान, राजधर्म का किया पालन, नहीं बने मंदिर भूमि पूजन का हिस्सा
रामजानकी रथ के महारथी लालकृष्ण आडवानी को न तो नरेन्द्रमोदी ने ही याद किया और न ही योगी आदित्यनाथ ने, महंत नृत्यगोपालदास ने आडवानी को भुला दिया
कुदरत के यहाॅ देर है, अंधेर नहीं है- कुदरत की लाठी वेआवाज होती है, आडवाणी, जोशी, कल्याण सिंह, विनय कटियार व डा0 तोगड़िया कार्यक्रम में कहीं नही दिखायी दिये।
सर्वोच्च न्यायलय ने राममंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया किसी ने नहीं की इसकी चर्चा, सिर्फ झूठ परोसते रहे। सर्वोच्च के पांच जजों की पीठ का था फैसला मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनायी गयी।
नरेन्द्र मोदी ने नहीं किया जयश्री राम का उद्घोष वह सियावर रामचन्द्र की जय , जय सियाराम, जय जय सियाराम के नारे लगाकर किया सन्तोष
आधी आबादी का नहीं रखा गया ध्यान, प्रधान पुरूष मंच से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को दो शब्द बोलने का नहीं दिया मौका ।
बाबा रामदेव ने कार्यक्रम में कोविड-19 व लाॅक डाउन की खूब उड़ाई धज्जियां मास्क भी नहीं लगाया हर जगह किया विचरण ।
ऽ उमाभारती ने अपनी उपेक्षा से भूमि पूजन से पहले कहा कि अब मैं रामराज्य लाने के लिए करूॅगी संघर्ष, आयोजकों में मची खलबली दबाव से कार्यक्रम में मिल गया प्रवेश, अलग थलग दिखायी दिये
अगर किसी फिल्म की पटकथा कहानी व सम्वाद कमजोर हों तो लाख जतन करने के बाद भी निर्देशक उस फिल्म में जान नहीं डाल पाता और फिल्म टिकट खिड़की पर ही पिट जाती है।
राम जन्म भूमि पूजन होने चन्द्र शेखर और शिवपाल की दो टूक के बाद राहुल गाॅधी, मायावती, अखलेश यादव व प्रियंका गांॅधी ने सधे शब्दों से मुॅह खोला जबकि ओवैसी माकपा व भाकपा ने मोदी ने पहले ही दिखा दिया था आइना,
मोदी मीडिया को भूमिपूजन कवरेज से रखा गया दूर, सीधा प्रसारण दूरदर्शन के सौजन्य से दिखाने के लिए मीडिया तंत्र हुआ मजबूत ।
राम जन्म भूमि तीर्थ न्यास ने बाबरी मस्जिद की पैरबी कर रहे इकबाल अंसारी को तो निमंत्रण पत्र दिया लेकिन राम जन्म भूमि आन्दोलन की अगुआई कर चुके नेताओं को क्यों नहीं दिया भूमि पूजन का निमंत्रण ।
वैदिक धर्म शास्त्रों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान सपत्नीक सम्पन्न होते हैं लेकिन महंत नृत्यगोपाल दास, मोहन भागवत, नरेन्द्र मोदी, चम्पत राय व योगी आदित्यनाथ ने शास्त्रीय व वैदिक पद्धति का नहीं रखा ध्यान।
धर्माचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती ने राम मन्दिर भूमि पूजन के समय और दिन पर ही चेताया था कि इस समय भवन मन्दिी व भूमिपूजन का कोई शुभ मुहूर्त नहीं। भूमि पूजन देश को बड़ी समस्या में डाल सकता है।
खादिम अपने इस लेख का शुभारम्भ देवानन्द की फिल्म हरे कृष्णा, हरे राम के उस गीत की पंक्तियों से करना चाहता है, जिसमें कवि कह रहा है, देखो ओ दीवानो तुम ऐसा काम न करो, राम का नाम बदनाम न करो?
खादिम अब्बास को अपना वह बचपना आज भी याद है, जिसमें सारे मोहल्ले के बच्चे, वह चाहे किसी भी धर्म मजहब व जाति बिरादर के हों वह सब के सब बच्चे बड़ी हसी खुशी के साथ शहर इटावा में होने वाली रामलीला का हिस्सा बनने में गौरव महसूस करते थे। हमारे यहां की रामलीला, रामलीला मैदान में होती थी। खादिम का इस रामलीला से विशेष लगाव इस लिए भी था कि हमारे बचपने के मित्र रामगंज निवासी राजेन्द्र प्रसाद व बीरेन्द्र प्रसाद चतुर्वेदी के ताऊ बाबूराम चतुर्वेदी रावण की भूमिका निभाया करते थे। राम गंज व कबीर गंज के लड़के समान रूप से कुछ राम की सेना में शामिल हो जाते थे और कुछ रावण की सेना में। स्थिति यह थी, चाहे बच्चे सवर्ण समाज के हों या दबे पिछड़े वर्ग के साथ मुस्लिम समाज के सब बच्चों के पास रामलीला में भाग लेने के लिए बांस की खपच्चों से बने धनुष वाण घर धर में होते थे वह भाव सबका राम के प्रति था। क्योंकि सबके राम किसी एक के नहीं होते थे वल्कि सर्वव्यापी राम थे। उनका कद आज के कथित राम भक्तों और स्वार्थी राजनैतिक लोगों ने राम को मोहरा बनाकर अपनी छल कपट पूर्ण राजनीति से बहुत ही सीमित कर दिया है और बने घूम रहे हैं रामभक्त? कौन सच्चा रामभक्त और कौन रावण भक्त है, इसका फैसला भी सही समय पर समय का कालचक्र कर देगा।
राम का अर्थ तो राम ही जानते हैं
देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने राम मन्दिर भूमि पूजन क्यों किया या न्यास ने उनसे भूमि पूजन क्यों कराया , इस बारे में एक नहीं अनगिनत किन्तु, परन्तु, चूकि और इसलिए कर सकते है लेकिन जिस नीरसता पूर्ण भरे वातावरण में नरेन्द्र मोदी जी द्वारा आस्था के मन्दिर का भूमि पूजन किया है, वह कई सवाल जन मानस के सामने छोड़ गया है जिसकी चर्चा समय समय पर होती रहेगी। राम को मर्यादा पुरूषोत्तम राम यूंही नहीं कहा गया है, उन्होंने तो ऐसी ऐसी मर्यादाएं स्थापित की हैं, जिनके कारण उन्हें भगवान राम कहा गया है । राम का अर्थ तो राम ही जानते हैं और कोई नही,ं यह राम ही तो हैं जो सबरी के झूठे बेर खाते है, निषाद को गले लगाते हैं, केवट की कृतज्ञता प्रकट करते हैं। राम सबमें समाये हुए हैं और सब राम में हैं। यानी कि रोम रोम में राम हैं उनके लिए कोई अलंकार या प्रसंग कोई मायने नहीं रखता क्यूंकि राम तो कण कण में विराजमान हैं।
राजधर्म का पालन राम से सीखो
प्रधान मंत्री मोदी जी ने अपने सम्बोधन में राम की महिमा का एक बार नहीं अनेकों बार वर्णन किया है । राम की जितनी प्रशंसा और गुणगान किया जाय वह कम है। राम जैसा राजधर्म का पालन करने वाला कोई दूसरा नहीं हुआ है। लगता है प्रधान मंत्री मोदी ने जान बूझ कर श्री राम धर्म की व्याख्या अपने सम्बोधन में नहीं की है। यह वही राम तो हैं जो लंका वापसी के बाद सीता जी की अग्नि परीक्षा को एक धोबी व उसकी पत्नी के बीच में हुए आपसी तीखे संवाद और लांछन भर से आहत होकर राजधर्म का पालन करते हुए राजन राम सीता जी का परित्याग इस लिए कर देेते हैं वह प्रजा के एक किसी अदना से अदना व्यक्ति से जुड़े हुए वे मर्यादित राम हैं। मर्यादाओं की रक्षा और राजधर्म का पालन करने के लिए मर्यादा पुरूषोत्तम राम किसी भी सीमा तक जा सकते हैं क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी यह बता सकते हैं कि उन्होंने प्रधान मंत्री होते हुए भी श्री राम मंदिर भूमिपूजन करने की राम की किसी मर्यादा व राजधर्म का पालन किया है। यह सवाल तो देश की 130 करोड़ जनता में से कोई भी व्यक्ति उनसे पूछ सकता है। चूंकि मोदी जी आप भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के प्रधान मंत्री /राजा हैं मोदी जी अपने उद्बोधन में कहते हैं कि हमें ध्यान रखना है, जब-जब मानवता ने राम को माना है विकास हुआ, जब जब हम भटके हैं, विनाश के रास्ते खुले हैं। हमें सबकी भावना का ध्यान रखना है। क्या मोदी जी आप यह बता सकते हैं आप तो संविधान की शपथ लेकर प्रधानमंत्री बने हैं क्या भूमि पूजन करके आपने प्रधानमंत्री पद की गरिमा को नहीं गिराया है। क्या इस कृत्य से आपके द्वारा ली गयी संविधान की शपथ का उल्लंघन नहीं हुआ है क्या ऐसा करके प्रधान मंत्री मोदी जी ने अपने कहे इस सूत्र का कि हमें सबकी भावना का ध्यान रखना है मोदी जी राम का मन्दिर भव्य से भव्य बने यह तो सब देशवासियों की हार्दिक इच्छा थी लेकिन राम जैसी अन्तर्यामी विभूति को राजनीति का मोहरा बनाया जाय वह किसी भी राष्ट्रभक्त भारत वासी को पसन्द नहीं है। अगर यह भूमि पूजन किसी पददलित समाज के व्यक्ति के हाथों कराया जाता तो सबके राम हैं का वचन सार्थक हो जाता और मोदी जी आप आलोचना से भी बच जाते । चूॅकि राम योगी भी हैं, कर्मयोगी भी है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की अनदेखी क्यों
प्रधानमंत्री मोदी जी यह बात आपसे अच्छी तरह कौन जान सकता है कि किस स्तर पर आपने भूमि पूजन किया है, उस स्थान पर श्री राम जन्मभूमि क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास तथा संघ प्रमुख मोहन भागवत के अलावा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ के साथ विराज मान थे। क्या ऐसे अति महत्वपूर्ण अवसर पर देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द जैसी महान हस्ती को आमंत्रित नहीं किया जाना था तभी तो आपके द्वारा कहे गये इन शब्दों का महत्व बड़ता कि किस तरह से गिलहरी से लेकर बानर, केवट से लेकर वनवासी बन्धुओं को भगवान राम के विजय का माध्यम बनने का सौभाग्य मिला। मोदी जी आपने यह भी कहा कि श्री राम ने सामाजिक समरता को अपने शासन की आधारशिला बनाया। मोदी क्या आपके इस लच्छे दार भाषण की झलक कहीं भी भूमि पूजन स्थल पर दिखायी पड़ी । राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द तो अनुसूचित जाति /दलित वर्ग से आते हैं यदि उन्हें न सही किसी भी अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति को उस श्री राम मंदिर की भूमि पूजन कार्यक्रम का हिस्सा बना दिया होता तब निश्चित रूप से श्रीराम के आदर्श सिद्धान्तों मर्यादाओं की रक्षा हो जाती। यहां तो यही साबित हुआ कि प्रधान मंत्री मोदी जी बातों के बतासों से ही दलित समाज का मुॅह मीठा करना चाहते हैं मोदी जी के असली दांत हाथी की तरह खाने के कुछ और हैं और दिखाने के कुछ और हैं? मोदी जी वक्त निकल जाता है लेकिन बात हमेशा बनी रहती है इस सूक्ष्म मानसिकता के दर्शन प्रत्येक भारत वासी को जो भी 5 अगस्त को दूरदर्शन का सीधा प्रसारण देख रहे थे उन्हें साक्षात रूप से हुए। रामभक्त होने की दुहाई देने वालों को इस बात का ज्ञान होना ही चाहिए था कि हमारे भारत के राष्ट्रपति का नाम भी राम के नाम से शुरू होता है वह रामनाथ कोविन्द हैं।
यहां पर यह सवाल उठना भी लाजिमी है कि श्री राम मन्दिर भूमि पूचन के लिए सर्वोच्च राष्ट्रªपति की कुर्सी पर विराजमान रामनाथ कोविन्द जी को न्यास ने आमंत्रित किया भी था या नहीं। यदि राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं किया गया तो, इससे यह प्रदर्शित होता है और संदेश जाता है कि उस भूमि पूजन स्थल पर किसी दलित व्यक्ति का क्या काम और यदि राष्ट्रपति को भूमिपूजन कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है और वह नहीं गये तो इस घटनाक्रम को इस रूप में लिया जा सकता है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने डा0 भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित संविधान का सम्मान करते हुए उस संविधान की गरिमा में चार चाॅद लगा दिये, जिसकी शपथ लेकर रामनाथ कोविन्द जी भारत के राष्ट्रपति बने । राष्टपति रामनाथ कोविन्द जी ने एक साथ संविधान का सम्मान व राजधर्म का पालन किया है।
अटल की तरह राजनाथ हैं उदारवादी
यहां पर एक नाम का उल्लेख किया जाना आवश्यक है, जिनका नाम है राजनाथ सिंह , राजनाथ सिंह वह नाम है जिनकी गिनती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जैसी उदारवादी नेता के रूप में की जाती है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की तरह राजनाथ सिंह ने 5 अगस्त को अयोध्या में हुए श्रीराम मंदिर भूमि पूजन से अलग रखकर एक तरह से भारतीय संविधान के प्रति आदर्श व सम्मान प्रदर्शित करते हुए राजधर्म का पालन किया है। यह वही राजनाथ सिंह हैं जो 2014 से लेकर 2019 तक मोदी शासन के कार्यकाल में पाॅच वर्ष तक देश के दूसरे नम्बर के नेता की हैसियत से देश के गृहमंत्री रहते हैं। लेकिन जब मोदी जी को दुबारा कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त होता है प्रधानमंत्री मोदी जी राजनाथ सिंह को किनारे करते हुए उन्हें दूसरे स्थान गृह मंत्री से हटाकर तीसरे नम्बर की रक्षामंत्री की कुर्सी पर पहुॅचा देते हैं और अपने अति विश्वसनीय अमितशाह को देश का गृह मंत्री बना देते है।
कारण कुछ भी हो भूमि पूजन कार्यक्रम में राष्टपति रामनाथ कोविन्द और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कार्यक्रम में हिस्सा न लेकर साहस का परिचय दिया है और यह दोनों विभूतियां संविधान की शपथ के उल्लंधन करने से भी बच गयीं। इससे इनके पद की गरिमा बनी है तथा राष्टपति रामनाथ कोविन्द व गृहमंत्री राजनाथ सिंह का मान सम्मान बढ़ा है।
बाबा राम देव ने उड़ायी लाक डाउन की धज्जियां-
अयोध्या में जो भी श्री राम मन्दिर भूमि पूजन का कार्यक्र आयोजित किया गया वह प्रधान मंत्री मोदी को महामंडित करने के चक्कर में अपनी गरिमा खो बैठा प्रारम्भ से लेकर अंत तक इस समारोह में किसी भी प्रकार की चमक दमक नहीं दिखायी दी। ढिंढोरा खूब पीटा गया गाइडलाइन/लाॅकडाउन का अक्षरशः पालन किया जायेगा जिसकी जमकर खुलेआम धज्जियां उड़ायी गयीं जिसका सबसे बड़ा उदाहरण बाबा रामदेव हैं, जिन्होंने न तो दो गज दूरी का पालन किया नही मास्क ही लगाया- बल्कि वह मुॅह से मुॅह जोड़कर बतियाते हुए नजर आये। बाबा राम देव का अनुसरण करते हुए कुछ अन्य लोग भी नजर आये। बाबा रामदेव के लिए तो यही कहावत चारितार्थ होती हुई नजर आ रही थी । सैयां भये कोतवाल डर काहे का।
मोदी ने किसी भी राम भक्त का नाम नहीं लिया
मोदी द्वारा किये गये इस भूमि पूजन कार्यक्रम की एक विशेषता यह भी रही प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने जितने भी रामजन्म भूमि आन्दोलन के अगुआकार महारथी व हीरो थे जिनकी उस समय जगह उनकी आरती उतारी जाती थी। उसमें से किसी भी महारथी को कोई घास नहीं डाली। रामजन्म भूमि के मुख्य महारथी लालकृष्ण आडवाणी, जो किसी समय मोदी के शासनकाल में गुजरात में नरसंहार के समय उनके रक्षा कवच थे उन लालकृष्ण आडवाणी का नाम तक लेने में मोदी जी ने गुरेज व परहेज किया। इसे कहते हैं वक्त की बलिहारी। एक अकेले लालकृष्ण आडवाणी की ही बात क्यों की जाय, जिन मुरली मनोहर जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, उनके पैर छूने में प्रधान मंत्री मोदी प्रधानमंत्री गर्व का अनुभव करते थे उनको नाम को भी मोदी जी ने अपने उद्बोधन में कोई चर्चा नहीं की । इन नामों में साध्वी उमा भारती, बजरंग दल के राष्टीय अध्यक्ष रहे बजरंगी विनय कटियार के साथ विश्व हिन्दू परिषद के राष्टीय अध्यक्ष रहे डा0 प्रवीण तिगोड़िया जैसे नामों का जिन्होने राम भूमि आन्दोलन में बड़चड़कर हिस्सा लिया था उनको भी नरेन्द्र मोदी ने अपने उद्बोधन में कोई स्थान नहीं दिया।
मोदी आत्म केन्द्रित दिखायी दिये
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी जी इतने आत्मकेन्द्रित दिखायी पड़े जिन्होने राम जन्म भूमि आंदोलन के जनक व विश्व हिन्दू परिषद के महानायक स्वर्गीय अशोक सिंघल तक का नाम भी नहीं लिया। बल्कि इन लोगों के जैश्रीराम के नारे तक को बलाये ताख रखकर इस उद्घोष के साथ सियावर राम चन्द्र की जय , जयसियाराम का जाप जप कर राम जन्म भूमि आन्दोलन की पूरी पटकथा को ही बदल दिया यह सब कुछ नरेन्द्र मोदी ने अन्जाने में नहीं बल्कि जान बूझकर किया यदि वह इनमें से किसी महारथी का नाम अपने भाषण में ले लेते तो निश्चित रूप से मोदी जी का क्रेज खत्म हो जाता और सारा श्रेय उन महारथियों केा चला जाता। यह भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन तो सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महामंडित करने के लिए किया गया था जिसमें वह सफल भी रहे।
महारथियों की खूब हुई दुर्गति
कुदरत के यहां देर है अंधेर नहीं है यह बात नरेन्द्र मोदी जी को अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए मोदी जी के सिर पर आज जो प्रधानमंत्री का ताज सजा हुआ है उसमें लाल कृष्ण आडवानी मुरली मनोहर जोशी,उमा भारती, कल्याण सिंह वर्मा, विनय कटियार व प्रवीण तोगड़िया जैसे लोगों की रामजन्म भूमि आंदोलन में निभायी गयी भूमिका का बहुत बड़ा हाथ है। संघ परिवार के प्रमुख के रहते हुए इन महारथियों जान बूझकर जो उपेक्षा अपमान और दुर्गति की गयी है, वह सिर्फ देश की जनता ने ही नहीं बल्कि दुनियां भर के लोगों ने अपनी आॅखों से देखी है।
राम मन्दिर आंदोलन में बढ़ चढ़ हिस्सा लेने वाले महारथियों केा इस लायक भी नहीं समझा गया जो कि उन्हें श्री राम मन्दिर भूमि पूजन का निमंत्रण पत्र भी दिया जाता।
अपमान और जिल्लत झेलनी पड़ी
कैसा संयोग है कि जो इकबाल अंसारी बाबरी मस्जिद के पक्षकार और पैरोकार थे, उन्हें तो न्यास की ओर से आमंत्रित पत्र भेजा जाता है और वह इस भूमि पूजन कार्य क्रम का हिस्सा बनते है। लेकिन इन ज्ञानवीर महारथियों की जिनके पराक्रम से अखबार भरे पड़े थे न्यास के जिम्मेदारों ने भी उनकी किसी भी प्रकार की कोई सुधि बुधि नहीं ली और राम मन्दिर आन्दोलन पर जान छिड़कने वाली इन महारथियों की मंडली सिर्फ मन मसोस कर रह गयी । इन राम भक्तों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनके लिए ऐसा भी दिन आयेगा जिन्हें सार्वजनिक रूप से इतने बड़े पैमाने पर अपमान और जिल्लत झेलनी पड़ेगी।
उमा भारती केा स्थान इस लिए मिल गया कि उन्हांेने राम भूूमि पूजन अवसर से पहले यह बयान दिया कि अब वह रामराज्य लाने के लिए आंदोलन छेड़ेगी यह कहकर उन्होंने एक तरह से बिना कुछ कहे जिम्मेदारों को यह संकेत दे दिया था कि अब उन्हें राबण राज्य नहीं राम राज्य चाहिए। उमा भारती राम मन्दिर भूमि पूजन कार्यक्रम देखने का हिस्सा तो बन गयीं लेकिन उन्हें वहां वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वह वास्तविक हकदार थी जब कि पूर्व मुख्य मंत्री कल्याण सिंह अंत तक यह अखबारों में यह बयान प्रकाशित करते रहे यदि मुझे राम भूमि पूजन कार्यक्रम का न्योता मिला तो वह अबश्य इस कार्यक्रम में भाग लेगें। वैसे में 4 अगस्त को अयोध्या पहुॅच जाऊॅगा। इस प्रकार के बयान कल्याण सिंह के आये दिन प्रकाशित हो रहे थे उन तमाम रामभक्तों की गाथाएं भी प्रकाशित हो रहीं थी।
डा0 धर्मेन्द्र ने दिखाया मोदी को आइना
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 5 अगस्त को अयोध्या में श्रीराम मन्दिर भूमि पूजन करने के बाद सबसे पहले तीखी और तार्किक व सारगर्भित प्रक्रिया बौद्धिक क्षमता के धनी साहित्यकार तथा शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाज वादी पार्टी लोहिया के राष्ट्रीय महासचिव डा0 धर्मेन्द्र कुमार की रही ,जो अनुसूचित जाति/ जनजाति प्रकोष्ठ के राष्टीय पदाधिकारी के साथ शोध और उच्च शिक्षा से जुडे एम0 फिल0, पीएच-डी, हैं की प्रतिक्रिया आई ं। उन्होंने कहा कि रामजन्म भूमि व बाबरी मस्जिद प्रकरण पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद, जिसमें उसने 277 एकड़ जमीन को राम लला के पक्ष को तथा बाबरी मस्जिद पक्ष को अयोध्या में ही पांच एकड़ भूमि को सरकार को मस्जिद बनाने के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय दिया। दूसरे पक्ष ने भारी मन से अपने वायदे के मुताबिक सर्वाेच्च न्यायालय के फैसले को सहर्ष स्वीकार करके भारत में अमन शांति बनाये रखने की स्वीकृति प्रदान कर दी फिर मोदी जी या मोदी मंडली की इस प्रकार की नौटंकी करने का क्या औचित्य रह जाता है। यह ड्रामेबाजी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिन्होंने अपने दामन पर खून लगाकर शहीदों में गिनती लिखाने के लिए किया। डा0 धर्मेन्द्र ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस नाजुक मसले पर खूबसूरती व वुद्धिमानी से कानून की मर्यादाओं के अनुसार पटाक्षेप किया।
सर्वोच्च न्यायालय की जयजय कार होनी चाहिए थी-
जय जयकार तो सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिये गये निर्णय की होनी चाहिए थी लेकिन इसमें जयजयकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की षड्यंत्र के तहत की जा रही है और बाद का बतंगण बनाकर अशांति की ओर देश को ले जाने का ठटक्रम किया जा रहा है। यह सब कुछ नरेन्द्र मोदी के प्रयासों का प्रतिफल है। इसे संघियों और मोदी मंडली की हिमाकत और षड्यंत्र के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता है। डा0 धर्मेन्द्र ने कहा कि नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री है, उन्हें इतना तो सऊर होना चाहिए था कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने एक मत से अपने निर्णय में यह भी कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनायी गयी। इस स्पष्ट निर्णय के बाद भी हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी सार्वजनिक मंच से यह बकवास करें और कहें कि स्वतंत्रता संग्राम के आन्दोलन से राम मन्दिर आन्दोलन की तुलना करें क्या देश को आजाद कराने वाले उन असंख्य शहीदों, क्रान्तिकारियों बलिदानियों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान नहीं है, जिन्होने अपने व अपने परिजनों के प्राणों की आहुति देकर भारत को अंग्रेजों की दासता से आजाद कराया था । सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद झूठी और मनगढंत शौर्य गाथाओं के गीत गाना क्या कोर्ट के निर्णय की अवमानना की परिधि में नहीं आता? जब सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपना स्पष्ट निर्णय दे दिया है तो सभी को उसका सम्मान करना चाहिए तथा मिथ्या और भ्रामक तथ्य हीन बातों और समाचार फैलाने से बचना चाहिए। और अपने दामन पर खून लगाकर शहीदों में अपनी गिनती लिखाने से बाज आना चाहिए और खुले मन से सार्वजनिक रूप सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसले को स्वीकार करना चाहिए, जिसमें सर्वाेच्च न्यायलय ने कहा है कि अयोध्या में मन्दिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनायी गयी है।
मस्जिद में मूर्तियां रखना गैर कानूनी था
प्रगतिशील समाज वादी पार्टी लोहिया के अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महासचिव डा0 धर्मेन्द्र कुमार ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के उन महत्वपूर्ण अंशो को उद्त करते हुए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी मंडली को इंगित करते हुए कहा कि अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी साफ तौर पर कहा है कि 1949 में अयोध्या में मस्जिद में मूर्ति रखना गैर कानूनी था यही नहीं सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय के बाद दूध का दूध और पानी का पानी साफ किया और उन उग्रवादी व विध्वंसकारियों यह भी संदेश दिया कि 6 दिसम्बर को बाबरी मस्जिद का विध्वंस गैर कानूनी था। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी आप सर्वोच्च न्यायालय के इस महत्वपूर्ण फैसले को मानते है या नहीं यदि आप सर्वोच्च न्यायालय पर विश्वास व आस्था है यह सब कम से कम एक प्रधान मंत्री होने के नाते व संविधान की मर्यादाओं से बंधे होने के कारण इस प्रकार के धर्मकाण्ड व कर्मकाण्डों से बचना चाहिए था। जो अनर्गल बातें जानबूझकर की जा रही हैं उनसे अपने आप को दूर रखना चाहिए था। तब तो आपको महावीर स्वामी, तथागत गौतम बुद्ध, महाराज सुहेल देव तथा कबीर, गाॅधी जी व डा0 भीमराव अम्बेडकर सहित अन्य महापुरूषों का नाम लेने का अधिकार है।
कुदरत की लाठी वे आवाज होती है-
डा0 धर्मेन्द्र ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को सचेत करते हुए कहा कि लाठी की आवाज होती है।वह किसी को बख्सती नहीं है। इसकी मार से हिचकी तक नहीं निकलती उन्होंने कहा जिन जिन लोगों ने राम जन्म भूमि मन्दिर का श्रेय लेने का जतन व दुस्साहस किया है उनका पतन हुआ है। इसका जीता जागता उदाहरण स्वगीर्य राजीव गाॅधी हैं, जिन्होंने 9 नवम्बर 1989 में प्रधान मंत्री होते हुए भी अयोध्या जाकर मन्दिर का शिलान्यास किया था, उनका आगे चलकर क्या हुआ यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। अकेले राजीव गाॅधी की बात क्यों की जाय हमारे सामने जिन्दा मिसाल पूर्व उपप्रधान मंत्री लाल कृष्ण आडवानी की है, जिनकी राम जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन में हर रोज आरती उतारी जाती थी वह राम रथ में सवार होकर न जाने किन-किन अलंकारों व प्रसंगों का उल्लेख करते थे, ऐसे रामभक्त लालकृष्ण आडवानी आज कचरे के ढेर पर पढ़े हैं उन्हें संघ परिवार के साथ मोदी जी आपने व आपकी मंडली ने ऐसे हसीन मौके पर भुला दिया कैसी बिडम्बना है कि मोदी जी आपने अपने सुरक्षा कवच रहे आडवानी जी की प्रधान मंत्री होते हुए भी इस राममन्दिर भूमि पूजन के शुभ अवसर पर भी कोई सुधि बुधि नहीं ली।
रामलला की कल्याण से होती थी टेलीफोन पर बात-
डा0 धर्मेन्द्र कुमार ने कहा एक थे उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री कल्याण सिंह, जिनके मुख्यमंत्रित्व काल में बाबरी मस्जिद गैर कानूनी तरह से ध्वस्त कर दी गयी । वह सत्ता के मद में इतने दुस्साहसी हो गये थे कि वह सार्वजनिक मंचों से टेलीफोन के रामलला से बाते करने तक का नाटक करने लगे थे आज इस नाटक कार रामभक्त कल्याण सिंह की जो दुर्दशा हो रही है वह किसी से छिपी हुई नहीं है। मोदी जी न तो आपने व न्यास के जिम्मेदारों ने उस रामभक्त कल्याण सिंह को इस लायक भी नहीं समझा जिन्हें राममन्दिर भूमि पूजन समारोह के निमंत्रण की चिट्ठी ही भेज दी जाती । इसी प्रकार की दुर्दशा अपने आपकों रामभक्त का दम्भ भरने वाले मुरली मनोहर जोशी व विनय कटियार व डा प्रवीण तोगड़िया की हुई है जिनका आज के रामभक्तों में जिसमें मोदी मंडली भी शामिल है उनके जीते जी उनका मिलकर राम नाम सत्य पढ़ दिया। मोदी जी राम की महिमा अपरंपार है किसी भी छल प्रपंच झूठ नफरत व घृृणा फैलाने वाले को कभी क्षमा नहीं करते। ऐसा चमत्कार देश व दुनियां के रामभक्त आप देख रहे हैं।
मस्जिद गैर कानूनी तरीके से ध्वस्त की गई
डा0 धर्मेन्द्र ने कहा कि राम नाम, सत्य है उनकी लीला अपरंपार है प्रधानमंत्री मोदीजी चाहे जितनी चैपाइयां पढ़ लें या जो चाहें प्रसंग गढ़ लें, उन्हें इतना तो मालुम है कि राम सबमें है और सबके राम हैं? जब राम सबके हैं तो वह न्याय भी सबके साथ एक जैसा ही करेंगे। वह सबके साथ न्याय करते जा रहे हैं और आगे भी करते रहेगे। मोदी जी आपको भी राम के अग्रिम न्याय की प्रतीक्षा करनी होगी। पता नहीं हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी सुप्रीम कोर्ट के सत्य को स्वीकार करने में क्यों हिचकिचा रहे हैं और सार्वजनिक तौर से यह कहने में क्यों डर रहे हैं कि अयोध्या में मन्दिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनायी गयी तथा 1949 की रात को अयोध्या में मस्जिद में मूर्तियां गैर कानूनी तरीके से रखी गयीं। यही नहीं 6 दिसम्बर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गैर कानूनी तरीके से ध्वस्त किया गया । प्रधान मंत्री जी आपका संविधान व न्याय पालिका का सम्मान करना व उसकी रक्षा और सुरक्षा करना आपका धर्म है इस धर्म को अपनाने का आप अमली जामा कब बनाएंगे मोदी जी इन सुखद क्षणों की प्रतीक्षा देश की 130 करोड़ जनता बड़ी वेसब्री के साथ कर रही है।
राम नाम, सत्य है
डा0 धर्मेन्द्र ने कहा कि राम सत्य है सत्य को स्वीकार करने की शक्ति मोदी मंडली में नहीं है यदि होती तो वह मोदी और योगी का गुणगान न करके सारा श्रेय सर्वोच्च न्यायालय को देकर उसकी जय जय कार कर रही होती । क्योंकि उसी के न्यायप्रिय निर्णय से मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ है और उसी के निर्णय का परिणाम है कि आज देश में अमन शान्ति है । उन्होंने कहा कि इस अमन शांति को भंग करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती सर्वोच्च न्यायालय ने जो भी निर्णय राम जन्म भूमि व बाबरी मस्जिद प्रकरण को लेकर सुनाया है देश हित में सभी लोगों को उसका अक्षरशः पालन करना चाहिए। इससे ही भारत का दुनियां भर में सम्मान बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य से भव्य श्री राम मन्दिर, बने इसके पक्ष में सारा देश है विरोध तो इस बात को लेकर है कि जिन मोदी का राममन्दिर निर्माण आंदोलन में कोई विशेष योगदान नहीं था उन्हें बेमतलब महामंडित करके राजनैतिक बाजीगरी की जा रही है। यह वही मोदी हैं जिनके मुख्य मंत्रित्व काल में गुजरात में भीषण नरसंहार हुआ था जिनके बारे में उस समय के प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि मुख्य मंत्री मोदी ने राजधर्म का पालन नहीं किया। जिन लाल कृष्ण आडवानी ने मुख्य मंत्री मोदी जी को उस समय बचाया था, उन्हीं मोदी ने उनकी दुर्गति कर दी और स्वयं हीरो बनने के चक्कर में एक आडवानी ही नहीं उस राम मंदिर आंदोलन के कथित रामभक्तों को उन्होंने उनकी औकाद का अहसास करा दिया।
भय ,भूख और भ्रष्टाचार
डा0 धर्मेन्द्र कुमार ने कहा कि मोदी ने भूमि पूजन के अवसर पर अपने उद्बोधन में यह भी कहा कि भारत इतिहास को दोहरा रहा है। हम भी मानते हैं कि इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है। प्रधानमंत्री बनने से पहले 2014 के लोकसभा के चुनाव प्रचार में मोदी जी ने कहा था कि हमारी सरकार बनने दो, हम देश में राम राज्य लायेंगे। सौभाग्य देखिये देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्रमोदी बने । उनके प्रधान मंत्री बनते ही देश का उल्टा पल्टा हो गया। रावण ने सत्ता के मद में मदान्त होकर सीताजी का अपहरण किया, राम के हनुमान ने रावण की सोने की लंका ने जलाकर राख कर दिया। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी के रामराज्य में प्रतिदिन सीता, गीता, दुगार्, पार्वती, सावित्री, रिजवाना, रजिया, सबाना व सलमा का अपहरण हो जाता है। प्रतिदिन बहन बेटियों एवं महिलाओं का शीलभंग, चीरहरण और बलात्कार होते हैं सरे बाजार उनकी अस्मत लूट ले जाती है। चारों ओर लूट डकैती राहजनी और चोरी व हत्याओं का खुले आम होना आम बात हो गयी है। मोदी जी के राम राज्य में भय, भूख और भृष्टाचार के दानव ने देश को अपने जबड़ों में जकड़ लिया है। बेईमानी महगाई बेरोजगारी ने गरीवों का चूल्हा बुझा दिया है। किसान और मजदूर फटेहाली और भुखमरी का शिकार होकर आत्म हत्या करते थे लेकिन आज पड़ा लिखा बेरोजगार नौजवान खुदकशी करने को मजबूर है लगता है प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के राम राज्य को लकवा मार गया है। चारों ओर रावण राज की पीड़ा से आम जन कराह रहा है।
संविधान पर सीधा हमला
डा0 धर्मेन्द्र कुमार ने नरेन्द्र मोदी पर हमला जारी रखते हुए कहा कि प्रधान मंत्री की गलत नीतियों का सारा देश दंश झेल रहा है । आर्थिक मंदी ने देश की आर्थिक व्यवस्था का जनाजा निकाल दिया है। मोदी सरकार में सरकारी विभागों में छटनी का अभियान चला रखा है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने डा0 भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित संविधान पर सीधा हमला बोलकर आरक्षण व्यवस्था समाप्त करने की साजिश को अंतिम रूप दे दिया है। मोदी सरकार एक -एक करके सभी सरकारी विभागों का निजीकरण करके दलित व पिछड़े समाज के पड़े लिखे नौजवानों का सरे आम गला घोंट रही हैं और इन तमाम असफलताओं को छिपाने के लिए तथा मूल समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए मोदी जी नफरत और घृणा की खेती करने में व्यस्त हैं । उन्होंने जानबूझकर देश से इंसानी भाईचारा तथा भारत की गंगाजमुनी साझा संस्कृति के ताने बाने को तोड़ने का दुस्साहस करके भारतीय संविधान की शपथ का उल्लंघन करके राम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन करके सारे देश को हैरान करने वाला कार्य किया है। यह शुभकाम करने को मोदी को साधुसन्तों को आजाद छोड़ देना चाहिए था।
छः वर्ष में कुछ भी नहीं किया
डा0 धर्मेन्द्र ने कहा कि वैदिक रीति रिवाज से धार्मिक अनुष्ठान होते हैं वह सपत्नीक किये जाते हैं। इस प्रक्रिया में उन्होंने किसी भी वैदिक रीति का पालन नहीं किया बल्कि भूमि पूजन जैसे महत्वपूर्ण कार्य को अकेले ही कर लिया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह रही कि शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज ने भूमि पूजन के समय और दिन पर ही सवाल खड़े कर दिये थे उनको भी अनसुना कर दिया ।
डा0 धर्मेन्द्र कुमार का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय की गरिमा के विपरीत यशगान और शौर्य गाथाओं के वे बजह के गीत गाकर गढ़े मुर्दे उखाड़ कर भारत के भाई चारा में विश घोलने का दुस्साहस किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि प्रधान मंत्री द्वारा भूमि पूजन करने के बाद रामराज्य स्थापित होगा, अच्छे दिन आयेंगे और सबका साथ सबका विकास होगा।
मोदी जी आप लक्षेदार भाषण से जनता को कब तक गुमराह करते रहेगें। जब मोदी जी अपने छः वर्ष के कार्यकाल में कुछ खाश नहीं कर सके तब आगे वह मन्दिर भूमि पूजन करने के बाद क्या खाक विकास करेंगे? उन्होंने कहा मोदी जी की गलत नीतियों के कारण हमारे सभी हमदर्द पड़ोसी देशों से सम्बन्ध खराब हो गये हैं नेपाल जैसा मित्र देश मोदी और भारत को आखें दिखा रहा है। और मोदी जी खीशें निपोर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले मोदी जी चीन की गोदी में बैठे और जब उसने भारत के साथ विश्वासघात करके हमारे बीस सैनिकों केा शहीद करके भारत के भूभाग पर अबैध रूप से कब्जा कर लिया- तब मोदी जी अब उस अमेरिका की गोदी में बैठने जा रहे हैं जो हमारे सबसे बड़े शत्रु पाकिस्तान की हर तरीके की मदद करता है। उन्होंने कहा कि जिन तमाम परेशानियों के बाद भी नरेन्द्र मोदी जी स्वयं मियां मिट्ठू बनकर सिर्फ अपने हाथों से अपनी पीठ ठौंककर जनता को गुमराह करते नजर आ रहे हैं। मोदी जी ने 2014 के चुनाव में बादा किया था कि वह प्रतिवर्ष 2 करोड़ नौजवानों केा नौकरी देगें उनका यह बादा भी और बादों की तरह हवा हवाई बनकर रह गया। मोदी जी न तो अब तक विदेशों में जमा काला धन ही वापस ला सके और न ही भारत के किसी व्यक्ति के खाते में 15 लाख जमा करना तो दूर किसी भारतीय के खाते में फूटी कौड़ी भी नही डाल पाये । इतने सच्चे और अच्छे हैं, हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी ।
डा0 धर्मेन्द्र ने कहा कि राम दयालु भी हैं और कृपालू भी हैं वह सब कुछ जानते हैं कि किसके मन में क्या है? कौन रामभक्त है कोैन रावण भक्त है उनसे कुछ भी छुपा हुआ नहीं है। राम तो अन्तर्यामी हैं, उन्हें कौन धोखा दे सकता है? और अशांति के नहीं शांति के पक्षधर हैं। व अन्याय के नहीं न्याय करने वालो के साथ हैं । यह बात मोदी जी व योगी जी की मंडली की समझ में आ जाय वह उतनी ही बेहतर और शुभ है। चूंकि राम अन्यायी और आततातियों को क्षमा नहीं करते।
आंख फूटी पीर गयी
जब खादिम ने डा0 धर्मेन्द्र से यह कहा कि वह रामजन्म भूमि प्रकरण सूक्ष्म रूप में कुछ बताये ंतब डा0 धर्मेंद्र ने कहा कि आंख फूटी पीर गयी । सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा न्याय प्रिय फैसला कर दिया है जिसका कोई शानी नहीं है। जब उनसे कहा गया कि बिहार के चुनाव आ रहे हैं उसके लिए भूमि पूजन का टेलर दिखाया गया है अभी तो इस फिल्म के बंगाल चुनाव , असम, केरल, व तमिलनाडु सहित अन्य सूबों के चुनाव आगे होना है। उसमें कई प्रकार के एपीसोड भाजपा जनता को दिखायेगी । इसके प्रतिउत्तर में डा0 धर्मेन्द्र ने कहा कि अब घिसी पिटी स्टोरी की फिल्में चलती नहीं हैं बल्कि वह जल्दी पहले शो के बाद ही खिड़की पर दम तोड़ देती हैं । जिसमें डायरेक्टर तमाम जतन करने के बाद भी कुछ कर नहीं पाता। डा0 धर्मेन्द्र ने अपनी बात को प्रमाणिक करने के लिए दो चुनाव की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधान मंत्री मोदी, गृहमंत्री अमितशाह व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी ने अभी कुछ माह पहले झारखण्ड के चुनाव में अपनी भाजपा सरकार को बचाने के लिए खूब उछल कूद और धमा चैकड़ी मचायी वहां की जनता को राममन्दिर, जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने, तीन तलाक के साथ खूब नफरत और धृणा फैलाने वाली फिल्में दिखायीं, लेकिन वहां की समझदार जनता ने मोदी, शाह व योगी जैसे लोगों को धता बताते हुए इन नेताओं को ऐसी पटकनी दी कि यह सारे के सारे लोग औंधे मुंह जमीन पर गिरे और वहां की जनता ने हेमेन्त शोरेन को झारखणड का मुख्यमंत्री बना दिया।
डा0 धर्मेन्द्र ने दूसरी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली में अभी विधान सभा चुनाव हुए हैं, यहां पर भी प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी गृहमंत्री अमित शाह व योगी जी ने चुनाव आचार संहिता के सारे रिकार्ड तोड़ डाले और दिल्ली के चुनाव को भारत व पाकिस्तान के बीच जैसे युद्ध में बदलने की घिनौनी हरकते तक कीं तमाम तरीके के जहरीले हथकण्डे अपनाये । गृहमंत्री अमित शाह ने इस चुनाव में गली गली में जाकर खुद अपनी मंडली के साथ घर घर जाकर वोट मांगे यहां भी दिल्ली चुनाव में भी राममन्दिर धारा 370 तीन तलाक का मुद्दा भाजपा के इन शीर्ष नेताओं बड़ी शिद्दत के साथ उठाया। भाजपा ने दिल्ली के चुनाव को विशैला करने में अपनी पूरी ताकत झौंक दी दिल्ली के हर मोहल्ले भाजपा का सांसद विधायक विभिन्न प्रदेशों के भाजपा के मुख्यमंत्री व समस्त केन्द्रीय मंत्री लगा दिये गृह मंत्री अमितशाह हर मंच से यह कहते हुए नजर आये कि दिल्ली वालो कमल का बटन इतने जोर से दबाना कि जिसकी आवाज शाहीन बाग तक सुनायी दे। यानी कि घिनौने से घिनौने हथकण्डे भाजपा के हर बड़े नेता ने आजमाये उसके बाद भी दिल्ली की समझदार जनता ने मोदी अमित शाह व योगी की तिकड़ी को ऐसा सबक दिया जिसकी मार से यह नेता दुहाई बोल गये। और यहां पर भाजपा की फिल्म पिट गयी और दिल्ली के अरविन्द केजरीवाल ने अकेली दम पर शानदार जीत हासिल की और दिल्ली की जनता ने केजरी वाल को दोबारा मुख्य मंत्री बना दिया।
डा0 धर्मेन्द्र ने कहा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी चाहे कितनी कलाजंग लगा लें भूमि पूजन धर्मकाण्ड या जतन कर लें मोदी की आने वाले समय में ऐसे ही फिल्म पिटती रहेगी। इन्हें कोई सफलता मिलने वाली नहीं है। शासन सत्ता में मोदी तो राम राज्य का सपना दिखाकर आये लेकिन देश में इस समय चहुॅ ओर रावण राज के दर्शन हो रहे हैं । जिस उत्तर प्रदेश में मोदी जी ने अयोध्या में जाकर राममन्दिर भूमिपूजन किया है वहां के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ ने उत्तर प्रदेश को गुण्डा राज व जंगल राज रूप में परिवर्तित कर दिया है। अराजकता चरम पर है जिसके कारण हाहाकार मचा हआ है । डा0 धर्मेन्द्र ने कहा कि यह है रामराज्य की नंगी हकीकत। आज प्रधान मंत्री मोदी के रामराज्य डा0 भीमराव अम्बेडकर निर्मित संविधान का खुले आम निरादर हो रहा है । संध प्रमुख मोहन भागवत संविधान समीक्षा करने की बात करते हैं कभी संविधान को बदलने की बात करते है और दलित पिछड़ों को कैसे भूखा नंगा रखा जाय वह अपने धिनौने मंसूबे को कामयाब बनाने के लिए मोहन भागवत आरक्षण समाप्त करके सर्वहार वर्ग के अधिकारों पर खुली डकैती का मंसूबा बना कर यही संकेत देते आ रहे है कि न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी । और हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी संध प्रमुख भागवत के सामने मौन धारण की मुद्रा में चुप्पी साध कर नतमस्तक दिखायी देते हैं। डा0 धर्मेन्द्र ने कहा कि 2019 में लोकसभा चुनाव में यदि सैफई परिवार में मतभेद न होते और अखिलेश यादव व बसपा सुप्रीमो मायावती ने थोडी भी समझदारी दिखाकर महागठवंधन बना लिया होता तो निश्चित रूप से नरेन्द्र प्रधान मंत्री नही बन सकते थे । उन्होंने कहा प्रधान मंत्री बनने का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। आज प्रधान मंत्री नरेन्द्रमोदी बनने की सबसे बड़ी सजा मायावती ही भोग रहीं हैं। आज प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के दोबारा प्रधान मंत्री बन जाने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी मायावती व उनका परिवार झेल रहा है। अंत में डा0 धर्मेन्द्र ने कहा साम्प्रदायकिता वादी शक्तियों को सिर्फ डा0 लोहिया के उस हथियार से ही सत्ता से हटाया जा सकता है जिसमें डा0 लोहिया कहते थे कि जिंदा कौंमें किसी का 5 साल तक इंतजार नहीं करती विपक्ष में बैठे हुए जितने नेता हैं उन्हंे लोहिया जी के इस जनतांत्रिक अस्त्र का प्रयोग देश को संकट से बचाने के लिए सड़कों पर उतर कर करना चाहिए। डा0 धर्मेन्द्र ने कहा कि मनुष्य की सबसे पहली आवश्यकता रोटी कपड़ा मकान है मोदी सरकार ने गरीबों के मुंह का निवाला तक छीन लिया है। और वह कह रहे हैं कि रामराज्य आयेगा डा0 धर्मेन्द्र ने अपनी बात का यह कह कर अन्त किया कि भूखे भजन न होय गोपाला, जै धरी कण्ठी जै धरी माला।
गाॅधी सबसे बड़े रामभक्त
यह तो रहे डा0 धर्मेन्द्र के अपनी निजी विचार जिसमें काफी दम है। खादिम भी मानता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आये दिन जो सब्जबाग के सपने देश वासियों केा दिखाते घूम रहे हैं जनता अब इनके खोखले बादों से ऊब गयी है समझ में नहीं आता कि प्रधान मंत्री मोदी जी अपने आपको रामभक्त होने का ढोंग क्यों रच रहे हैं और उसका ढिंढोरा क्यों पिटवा रहे हैं खादिम की नजर में असली रामभक्त गांधी और लोहिया हैं यह दोंनों लोग धर्म और कर्म से राम भक्त हैं । खादिम का अपना मानना है कि दुनियां में महात्मा गांधी से बड़ा रामभक्त कोई दूसरा नहीं हुआ । सबकों मालूम है कि 30 जनवरी 1948 में जब गांधी जी बिड़ला भबन की प्रार्थना सभा में भाग लेकर लौट रहे थे, तब एक हिन्दू महासभाई जिसका सम्बन्ध संघ से भी जोड़ा गया जिसने महात्मा गांॅधी के गोली मार दी गोली खाने के बाद जमीन पर गिरते ही गांॅधी के मुख से निकला हे!राम । और गाॅधी को गोली मारने वाले का नाम है नाथूराम । सही मायने में मुख संघर्ष गांॅधी के हे!राम और नाथूराम गौडसे के राम के बीच में हैं।
जिस गाॅधी को अंग्रेज की लाठी और गोली नहीं मार सकी, उस महात्मा गांॅधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर गाॅधी जी की अंतिम रामलीला समाप्त कर देता है। आज मोदी मंडली के लोग महात्मागांॅधी के हत्यारे राष्ट्रभक्त बताकर सारे देश का अपमान कर रहे हैं। कम से कम मोदी जी को महात्मा गांधी के त्याग और बलिदान से कुछ तो सबक लेना चाहिए ।
मोदी सरकार नहीं दे रही है सजा
खादिम ने कह कि सघ मंडली की सदस्य साध्वी प्रज्ञा ठाकुुर को मोदी व उनकी मंडली मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से भाजपा से लोक सभा का टिकट दिलाती है और वह चुनाव जीत कर सांसद भी बन जाती है। इसके बाद वह महात्मा गाॅधी पर जिन्होंने भारत वर्ष को आजाद कराने में अपना पूरा जीवन खपा दिया उस राष्ट्रपिता महात्मा गाॅधी के लिए सड़क से लेकर संसद के अन्दर तक प्रज्ञा ठाकुर गाॅधी के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करके उनके हत्यारे नाथूराम गौडसे को महामंडित करती है । यह सब कुछ इस लिए सम्भव हो रहा है कि भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी हैं और उनके राम राज में एक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर क्या असंख्य लोगों को गाॅधी जी का अपमान करने की खुली छूट मिली है और गाॅधी का अपमान करने वालों को कोई भी माकूल सजा नहीं देती है। एसे तत्वों के हौसले बुलंद हैं वह कभी राम भक्त राष्ट्रपिता महात्मा गंाधी का पुतला बनाकर उसमें गोली मारते है और कभी गाॅधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को महामंडित करते हुए उसका मंदिर बनाने की बात करते हैं ऐसा सब कुछ प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के राज पाठ में हो रहा है।
डा0 लोहिया ने लगवाया रामायण मेला
खादिम संध परिवार और मोदी जी को आज के माहौल में यह सुझाव देना चाहता है कि वह गाॅधी के अनुयायी समाजवाद के पुरोध महा विचारक, चिंतक व सच्चे मन से राम को मानने वाले रामभक्त जिनका नाम एक राम से शुरू होता है ऐसे डा0 राम मनोहर लोहिया के विचार और दर्शन से शिक्षा ग्रहण करें जिन्होंने आज से लगभग 60 वर्ष पहले चित्रकूट की महा पावन धरती पर जहाॅं पर श्री राम ने लगभग 12 वर्ष वनवास के बिताये जिसका अच्छा खासा वर्णन तुलसी दास की राम चरित मानस रामयण में मिलता है , चित्र कूट की पावन धरती पर डा.0 लोहिया सन् 60-61 में रामायण मेंले का आयोजन कराया था ताकि देश वासी श्री राम की महिमा को समझें और जानें । यह वही चित्र कूट जहाॅ तुलसी दास ने लिखा था कि चित्र कूट के घाट पर भयी सन्तन की भीर, तुलसी दास चन्दन घिसें खौर देत रधुवीर । लोहिया जी ने रामायण मेंले को जो भव्यता प्रदान की थी, जिसमें प्रत्येक धर्म वर्ग व समाज के लोग सीधे श्री राम से जुड़ें। लोहिया जी ने इस रामायण मेले को एक नया आयाम दिया, जो आगे चलकर भारत की गंगा जमुनी साझा संस्कृति का अद्भुत पहचान बना इस रामायण मेंले में सुविख्यात चित्रकार मकूल फिदा हुसैन जैसे लोग भाग लेकर श्री राम पर अपनी कला,फन और हुनर की ऐसी लाजबाव चित्रकारी प्रस्तुत करते थे जिसे देखकर लोग राममय हो जाते थे यही नहीं सारे चित्रकार फनकार इस रामायण मेले में भाग लेकर अपनी श्रद्धा और सहभागिता करते थे । ग्रामीण अंचलों से आने वाली महिलाएं राम के प्रति श्रद्धा में विभोर होकर रंगोली के माध्यम से ऐसी कला का प्रदर्शन करके राम की जीवनी ऐसी उकेरती थी कि साक्षात् रूपसे लोगों को राम के दर्शन दिखायी देते थे। मकूल फिदा हुसैन ने अपनी चित्रकारी से लगभग श्रीराम के आदर्श और सिद्धान्तों पर आधारित लगभग 29 कृतियों की चित्रकारी की। फिदा हुसैन की अद्भुत चित्रकारी की एक एक पेन्टिग को विदेशों में एक एक करोड़ की नीलामी हुई और उन्होंने उस धनराशि को मकूल फिदा हुसैन ने इसी रामायण मेले को अर्पित कर दीं ऐसा भाव राम के प्रति प्रकट करने की व्यवस्था डा0 लोहिया ने रामायण मेले के माध्यम से की आज भी समाजवादी डा0 लोहिया की धरोहर को अपने मन में संजोये हुए उस परिपाठी को जीवन्त किये हुए हैं। इस प्रकार का गाॅधी व लोहिया का राम के प्रति समर्पण था। यह महान विभूतियां श्री राम केा गरीब की रोटी और रोजी से जोड़ना चाहते थे जिसका अभाव आज के कथित रामभक्तों की कार्य शैली में स्पष्ट दिखायी पड़ता हैं।
राज्यपाल को नहीं मिला बोलने का मौका
एक पत्रकार की हैसियत से खादिम ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अयोध्या में किये गये राममन्दिर भूमि पूजन कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर मोदी का अयोध्या में हैलीकोप्टर उतरने के तथा उनके दिल्ली प्रस्थान करने तक का देखा है। संघ परिवार और प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी आये दिन नारी सशक्तीकरण का दंभ भरते हैं, जिनके मन में नारी के प्रति कितनी श्रद्धा, सम्मान और स्नेह है इसे देश व दुनियां ने 5 अगस्त को राममन्दिर भूमि पूजन के समय अपनी आॅखों से साफ-साफ देखा है भूमि पूजन स्थल पर पहले तो केाई नारी नहीं थी परन्तु उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के नाते वहां आनंदीबेन पटेल अवश्य उपस्थित थी । जिन्हें भूमि पूजन की क्रिया के अवसर पर टीवी के माध्यम से सभी ने देखा। यह अच्छा रहा कि आगे दृश्य को कुछ छड़ के लिए केैमरे ने कबरेज में नहीं दिखाया। और रंग में भंग पड़ने से बच गया मूल प्रश्न यह है कि भूमि पूजन के उपरान्त बगल में सजाये गये मंच पर उपस्थित सभी महानुभावों में जिनमें न्यास के अध्यक्ष स्वामी नृत्यगोपाल दास जी के अलावा संघ प्रमुख मोहन भागवत, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ उपस्थित थे जबकि कार्यक्रम मंच की देख रेख चंपत राय जी कर रहे थे। राम के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की परन्तु आधी आबादी नारी का प्रतिनिधित्व कर रहीं राज्यपाल महोदया आनंदी बेन पटेल का दो शब्द बोलने तक का अवसर प्रदान नहीं किया गया क्या संघ प्रमुख मोहन भागवत व प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का नारी सशक्तीकरण का अभियान ऐसे ही सफल हो जायेगा? राज्यपाल के साथ आनंदीबेन पटेल एक नारी थी क्या उनके मुख मंडल से श्री राम मंदिर भूमि पूजन मंच के अवसर पर आशीष वचन नहीं आना चाहिए थे। ये ऐसा यक्ष प्रश्न है, जो इन रामभक्तों से हमेशा पूछा जाता रहेंगा।
भारत माॅ की जय बोलने बाले प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में एक जगह हिन्दुस्तान शब्द का प्रयोग किया प्रधान मंत्री ने लगभग 48 मिनट तक अपने प्रवचन किये इसमें उन्होंने हर पहलू को छूने का प्रयास किया उन्होंने अपने भाषण में कोरोना जैसी महामारी का भी बड़े सलीखे से उल्लेख किया । कैसी बिडम्बना है कि मोदी और योगी के रामराज्य में धार्मिक स्थल जिसमें मंदिर मस्जिद गुरूद्वारा गिरजाघर सब लाॅकडाउन के अन्तर्गत बन्द हैं यहीं नहीं दरगाहों खानगाहों व आस्तानों में प्रवेश करने के लिए प्रतिबन्ध है लेकिन मदिरालय यानी कि शराब खाने खुले हैं चहक रहे हैं महक रहे हैं वहां शराबी रोजाना सोशल डिस्टेन्सिंग की धज्जियां उड़ा रहे इस पर योगी मोदी जी की कोई नजर नहीं है मन्दिर भूमि पूजन कार्यक्रम में भारत सरकार की गाइड लाइन है उसकी भी फजीहत होते जनमानस ने अपनी आॅखों से देखी है।
चन्द्र शेखर की दो टूक-
प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने राम मंदिर भूमि पूजन में जो संविधान का उल्लंधन कर मनमानी की है उस पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भीम आर्मी के संस्थापक व आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आजाद ने दो टूक लहजे में कहा कि जिसने भी राम का इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने में किया है उनकी दुर्गति हुई है। नये सिरे से देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी अपनी राजनीति चमकाने भूमि पूजन करने अयोध्या गये हैं , आगे चलकर इनका वही हस्र होगा जिन्हंांेने राम को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाया है चन्द्रशेखर आजाद ने कहा कि प्रधानमंत्री 5 अगस्त को अयोध्या में जो कृत्य करने जा रहे हैं, वहा भाजपा की राजनैतिक ताबूत में आखिरी कील का काम करेगा और नरेन्द्र मोदी की उल्टी गिनती शुरू हो जायेगी। आजाद ने कहा कि भारत डा0 भीम राम अम्बेडकर द्वारा निर्मित संविधान से चलेगा किसी की मनमानी से नहीं चलेगा। जो लोग भारत को अपनी मनमानी से चलाकर भेदभाव पैदा करके भगवा ऐजेण्डा लागू करना चाहते हैं, उसे देश का बहुजन समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा उन्होने कहा कि मान्यवर कांशीराम ने इसी लिए तो कहा था कि जिसकी जितनी संख्या भारी उतनी उसकी हिस्से दारी होनी चाहिए यह बात कथित रामभक्तों को समझ लेनी चाहिए। चन्द्र शेखर ने कहा कि जो लोग राम की नाम की तिजारत कर रहे हैं राम उनका काम तमाम कर देंगे। उन्होंने कहा कि मोदी और योगी सरकार देश और प्रदेश के लिए बोझ बन गयी है।
शिवपाल सिंह यादव ने किये तीखे प्रहार
मन्दिर भूमि पूजन के सम्बन्ध में प्रगति शील समाज वादी पार्टी लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की टिप्पणी विशेष महत्व रखती है उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा वसुधैव कुटुम्बकम में बसती है। सर्वोच्च न्यायालय ने राम जन्म भूमि प्रकरण पर जो निर्णय दिया है वो देश के सभी राष्ट्रभक्तों को शिरोधार्य है जो लोग सच्चाई से मुॅह चुराकर अनर्गल प्रलाप करके भाईचारे में अपनी राजनैतिक गोटें विछा रहे हैं। न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने अपने निर्णय में अयोध्या में राममन्दिर और मस्जिद दोनों को बनाने का निर्णय सुना दिया है इससे राममन्दिर बनने का रास्ता प्रशस्त हुआ है। अब किसी को भी अपनीे राजनीतिक नौटंकी और ड्रामे बाजी नहीं करनी चाहिए। शिवपाल ने कहा कि राम किसी एक के नहीं, सबके राम है। सबमें राम हैं। रोम रोम कण कण में राम हैं नकली राम भक्तों को अब ऐसी स्थिति में चाहे देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी हों या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हों उन्हें ऐसी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि फासिस्टवादी शक्तियां राम का उपदेश देके अपने नाम का पेटेन्ट कराने का षड्यन्त्र रच रहीं हैं देश की जनता केा इनके षड्यन्त्र से सजग रहना चाहिए उन्होंने कहा कि सत्ता पर काबिज बने रहने के लिए चलते फिरते उठते बैठेत राम के नाम का दुरूपयोग करते हैं। शिवपाल ने कहा कि राम तो प्रेम समरसता व शान्ति में बसते हैं, अशान्ति में नहीं यह बात कथित रामभक्तों को समझ लेनी चाहिए। शिव पाल सिंह यादव ने कहा कि असली रामभक्त तो गाॅधी और लोहिया हैं , जिन्होंने राम को रोटी और प्रेम सद्भाव से जोड़ना का काम किया। आज कुछ सिरफिरे लोग देश के शांति पूर्ण माहौल को विषाक्त करना चाहते हैं जो देश व समाज के हित में नहीं हैं उन्होंने मोदी व योगी को सुझाव देते हुए कहा वह महात्मा गाॅधी व राममनोहर लोहिया के आदर्श दर्शन विचारों से शिक्षा ग्रहण करें और मर्यादा पुरूषोत्तम राम सबके राम हैं यह पाठ उनसे सीखें। चूॅकि श्री राम ने मर्यादाएं स्थापित करके भारत को एक पहचान दी है। और वसुधैव कुटुम्बकम को मान्यता दी है। मोदी और योगी को देश में व्याप्त भ्रष्टाचार बिगड़ी कानून व्यवस्था तथा फैली हुई अशांति को समाप्त करने के लिए ध्यान देना चाहिए राम सर्वव्यापी हैं । उन्हें संकुचित व सीमित करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
राहुल का मास्टर स्ट्रोक
काग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाॅधी की टिप्पणी नरेन्द्र मोदी के राम मन्दिर भूमि पूजन पर किये गये 48 मिनट के भाषण पर भारी पड़ गयी राहुल गाॅधी ने बड़े तार्किक अंदाज में कहा राम श्रेष्ठ हैं । वे कभी घृणा में प्रकट नहीं हो सकते । राम करूणा हैं, वे कभी रूढ़ता में प्रकट नहीं हो सकते । राम न्याय हैं वो कभी अन्याय में पकट नहीं हो सकते । अगर राहुल गाधी की इन पंक्तियों और मोदी के लगभग 48 मिनट के भाषण का मूल्यांकन किया जाए तो प्रधान मंत्री मोदी का उद्बोधन राहुल गाॅधी की सारगर्भित पंक्तियों के सामने कहीं नहीं ठहरता है।
मायावती ने साहस दिखाया
बसपा सुप्रीमों मायावती ने भी प्रधान मंत्री के ऊपर साहस भरा कटाक्ष किया। उन्होंने नरेन्द्र मोदी को दर्पण दिखाते हुए कहा कि अयोध्या विभिन्न धर्मों की पवित्र नगरी है। लेकिन वर्षों तक यह स्थल राममन्दिर व बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के कारण विवाद में रहा लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसका अन्त किया इसकी आड़ में राजनीति कर रही पार्टियों पर भी विराम लगाया । आज राम मन्दिर निर्माण की नीव रखी जा रही है इसका श्रेय सुप्रीम कोर्ट को जाता है यह कहकर माया वती ने प्रधान मंत्री मोदी व उनकी मंडली को सुप्रीम कोर्ट को श्रेय देकर धोकर रख दिया और यह सत्य भी है ।
अखिलेश ने भी किया हमला
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मोदी व उनकी मंडली को मर्यादा का पाठ पड़ाते हुए ट्वीट किया कि जय महादेव, जय सियाराम, जय राधेकृष्ण, जय हनुमान से शुरू करते हुए लिखा, भगवान शिव से कल्याण श्री राम अभयुत्व व श्रीकृष्ण के उन्मुक्त भाव से सब परिपूर्ण रहे आशा है वर्तमान व भविष्य की पीड़ियां भी मर्यादा पुरूषोत्तम के दिखाये मार्ग के अनुरूप सच्चे मन से सबकी भलाई व शांति के लिए मर्यादा का पालन करेंगे। यह ऐसा अवसर था कि सभी के सभी पार्टी के लोग प्रधान मंत्री मोदी को नैतिकता व मर्यादा का पाठ पढ़ा रहे थे। जबकि इससे पहले प्रियंका बाड्रा ने कहा था, अयोध्या में होन वाला भूमि पूजन राष्ट्रीय एकता भाईचारे और सांस्कृतिक सौहार्द की मिसाल बनेगा भगवान राम सभी के हैं। भगवान राम सभी का कल्याण चाहते हैं इसलिए उन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम कहा जाता है।
ओवैसी ने मोदी को फिर दिखाया आईना
ए आई एम आई एम के प्रमुख असदउद्दी ओबेसी ने अपने चिरपरिचत अन्दाज में कहा भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है । प्रधान मंत्री ने भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होकर अपनी पद की गरिमा का उल्लंधन किया । यह हिन्दुत्व की जीत और लोकतंत्र के साथ धर्मनिरपेक्ष वाद की हार का दिन हैं पीएम ने आज कहा कि वह भावुक हैं। मैं कहना चाहता हूॅ कि मैं भी उतना ही भावुक हूॅ चूकि में नागरिकों की समानता और सहभागिता में विश्वास करता हूॅ । मिस्टर पीएम में भावुक हूॅ चूॅकि वहांॅ 450 साल से मस्जिद खड़ी थी। कर्नाटक के पूर्व सी एम एस डी कुमार स्वामी ने नरेन्द मोदी के इस कृत्य के लिए सत्ता के लिए मन्दिर का इस्तेमाल बताते हुए कहा कि भारत वासी के रूप में हमें अयोध्या में निर्माण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना पड़ी लेकिन कुछ लोगों ने इसका इस्तेमाल राजनीतिक मोहरे और सत्ता की सीड़ी के लिए किया। जोकि हमारे लिए खराब क्षणों में से एक था मन्दिर को राम के आदर्शो को दिखाने वाले सौहार्द का प्रतीक रहने दें।
वामपंथियों ने भी दिखाये तेवर
मोदी के भूमि पूजन पर कटाक्ष करते हुए वाम पंथी दलों ने आज भूमि पूजन का विरोध किया भाकपा और माकपा ने कहा कि प्रधान मंत्री द्वारा भूमि पूजन उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरूद्ध है क्योंकि न्यायालय ने अपने फैसले में बाबरी मस्जिद विध्वंस केा गलत ठहराया था। फिर जो कुछ भी अयोध्या में प्रधान मंत्री ने किया वह सारे संसार के सामने स्पष्ट रूप से आ चुका है। खादिम ने लेख का शुभारम्भ राम से किया था और असली रामभक्त महात्मा गाॅधी के भजन के साथ समाप्त -रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम । ईश्वर अल्लाह तेरे नाम , सबको सन्मति दे भगवान ।
खादिम अब्बास
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इटावा उत्तर प्रदेश
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