Agra News: स्वतंत्रता दिवस विशेष
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Agra News: स्वतंत्रता दिवस विशेष

आगरा संवाददाता :  सुशील चन्द्रा

उत्तर प्रदेश में एक गावँ ऐसा भी है जहाँ के लोग सिर्फ सिर्फ देश के मान के लिए ही जीना और मरना जानते हैं।यहां हर घर में फौजी हैं।यहाँ की मिट्टी मे शहीदों की खुशबू बसती है। हर युवा सिर्फ सैनिक बनना चाहता है।आगरा जनपद का बाह तहसील क्षेत्र वीर जवानों के लिए जाना जाता है। चाहे खेल का मैदान हो या फिर जंग का दोनों ही जगह यहां के युवाओं की भागीदारी रहती है। बाह तहसील का गांव रुदमुली शहीदों के गांव के नाम से जाना जाता है। आजादी के पहले से अब तक जब भी कोई युद्ध हुआ है तो उस युद्ध में इस गांव का लाल दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ है। देश सेवा के लिए सबसे आगे है रुदमुली सदैव देश सेवा के लिए अग्रणी रहने वाले यमुना के बीहड़ किनारे बसा गांव रुदमुली के हर घर में से एक जवान भारतीय सेना में है। यहां के बुजुर्ग अपनी अगली पीढ़ी को सेना में ही जाने के लिए प्रेरित करते हैं। गांव के युवा सड़कों पर सेना में जाने के लिए रोजाना तैयारी करते देखे जा सकते हैं।हर युवा का एक ही मकसद होता है की वो सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करे और अपने देश और परिजनों का नाम ऊंचा कर सकें। प्रथम विश्व युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक बहादुरी का डंका बजाने वाले इस गांव में बलिदान की परंपरा सभी के खून में बसती है। इसका गवाह गांव में बना शहीद स्मारक है। अब तक 14 वीर हो चुके शहीद रुदमुली गांव की आबादी 1200 लोगों की है।वर्तमान में 100 युवक भारतीय सेना में हैं और 150 रिटायर्ड फौजी हैं,गांव में अब तक 14 वीर शहीद हो चुके हैं।यहां के जाबांजो ने प्रथम विश्व युद्ध से लेकर कारगिल में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में अपनी बहादुरी का डंका बजाया है। प्रथम विश्वयुद्ध में गांव के 82 रणबांकुरों ने दुश्मनों को धूल चटाई थी।

 

Agra News: स्वतंत्रता दिवस विशेषजिनमें चंद्रिका सिंह, मोहन सिंह, मुलायम सिंह, जनक सिंह, मदन लाल राजौरिया, कलियान सिंह शहीद हुए थे। दूसरे विश्वयुद्ध की जंग पर गांव के 90 जवान गए। जिनमें से महावीर सिंह समेत 4 शहीद हुए थे। 1947-48 के कश्मीर युद्ध में 52 सैनिक शामिल हुए थे, तब कैप्टन जगवीर सिंह ने अपनी कुर्बानी दी थी।1962 के चीन युद्ध में रघुवीर सिंह, 1965 के पाक युद्ध में कैप्टन बृजराज सिंह, 1971 के युद्ध में जसकरन सिंह शहीद हुए। रुदमुली गांव के पूर्व युवा प्रधान मोनू भदोरिया के मुताबिक उनके दादा फौज में थे और वह युद्ध के दौरान शहीद हुए थे। गांव में प्रत्येक घर में से भारतीय सेना में जवान मौजूद है। गांव के कुछ लोग रिटायर हो गए हैं और अब वो गांव में रहकर अपनी आने वाली पीढ़ी को देशभक्ति का पाठ पढ़ाते हुए सेना में जाने के लिए ट्रेनिंग देते हैं। गांव में युवा सुबह से ही सड़कों पर दौड़ लगाने के लिए निकल जाते हैं। गांव के हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बेटा सिर्फ देश भक्ति के लिए सेना में भर्ती हो और देश की सेवा करें। गांव में हर युवा का कैरियर सिर्फ सेना में भर्ती होने की तैयारी होती है।

 

Agra News: स्वतंत्रता दिवस विशेषशहीद के नाम से कश्मीर में आर एस पुरा सेक्टर रुदमुली गांव के निवासी ब्रिगेडियर रणवीर सिंह भदौरिया ने सन 1971 में युद्ध के दौरान पाकिस्तान के सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए उन्होंने अपने हथियार छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया। कश्मीर का आर एस पुरा सेक्टर देश के इस वीर जवान के नाम से जाना जाता है। ब्रिगेडियर रणबीर सिंह भी इसी रुदमुली गांव के ही रहने वाले हैं और उनकी हवेली आज भी है। पाकिस्तान को धूल चटाने में अहम थी भूमिका गांव में जिनके सपूतों ने इस देश के लिए शहादत दी उनको अपने परिवार के लाल पर फक्र है। 16 दिसंबर सन् 1971 को भारतीय रणबांकुरों ने पाकिस्तानी सेना को धूल चटाकर उन्हें हथियार डालने को मजबूर किया था। अपने युद्धकौशल से ढाका, हिल्ली, अकोरा, पोस्ट को कब्जाते हुए पाक सेना को बामेर तक खदेड़कर तिरंगा फहराया था। 50 वर्ष पूर्व हुए युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे करने में बाह तहसील के 350 जवानों ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इनमें से 88 सैनिक अकेले रुदमुली गांव के थे जिन्होंने पूर्वी और पश्चिमी सेक्टर में पाकिस्तानी सेना को खदेड़ा था। हर वर्ष सेना में भर्ती होते हैं गांव के युवा रुदमुली गांव की मिट्टी में आज भी शहादत की खुशबू आती है। बाह कस्बा से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव से प्रथम विश्व युध्द से लेकर अब तक कई वीर सपूत अपनी शहादत दे चुके हैं। आज भी इस गांव में नौजवान पीढ़ी देश की सेवा के लिए फ़ौज में जाने के लिए कड़ी मेहनत करते दिखाई देते हैं। इस गांव से हजारों बेटे अब तक देश की सेवा में जा चुके हैं जिसमें देश की हर एक लड़ाई में शहादत भी दी है। गांव रुदमुली के वर्तमान प्रधान पति जोगेंद्र सिंह चौहान एवं उनके भाई हिम्मत सिंह चौहान ने बताया कि यह शहीदों का गांव है इस गांव से प्रत्येक घर से भारतीय सेना में युवा है। आगे आने वाली पीढ़ी भी सेना में जाने के लिए तैयारियां कर रहे हैं। गांव में जन्म से ही देश सेवा की भावना लाने के लिए बच्चों को देश और भक्ति की बातें सुनाई जाती है। हर वर्ष गांव के कम से कम 10 युवा फौज में भर्ती होते हैं। वीरता का मान बढ़ाने वाले तमाम सैनिक गाँव मे अगली पीढ़ी के योद्धाओं को तैयार करने में लगे हुए हैं।युद्ध में जसकरन सिंह की शहादत ने भदावर घराने का मान बढ़ाया है।

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