बिहार: पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं: अभिषेक रंजन

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संवाददाता मोहन सिंह
बेतिया, पश्चिमी चंपारण।

चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन ने पत्रकारों के साथ सामने आ रही मारपीट, अभद्रता और धमकी की घटनाओं को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताते हुए पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पत्रकार सवाल पूछता है, इसलिए वह किसी का दुश्मन नहीं हो जाता। सवाल पसंद नहीं है तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए, पत्रकार के साथ मारपीट नहीं।

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विधायक ने सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार अभिषेक के साथ डॉक्टरों द्वारा कथित मारपीट और गाली-गलौज की घटना पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार चिंता का विषय

अभिषेक रंजन ने कहा कि बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार और दबाव की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने दिल्ली में एक महिला पत्रकार के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित दुर्व्यवहार एवं मारपीट के मामले का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि सत्ता, प्रशासन या व्यवस्था में बैठे किसी भी व्यक्ति को सवाल पूछने वाले पत्रकार को डराने या उसके साथ हिंसा करने का अधिकार नहीं है। लोकतंत्र में सवालों का जवाब संवाद और तथ्य के माध्यम से दिया जाना चाहिए।

GMCH बेतिया में भी बदसलूकी की शिकायतों का किया उल्लेख

विधायक ने कहा कि बेतिया के GMCH में भी पत्रकारों के साथ बदसलूकी, मोबाइल छीनने और मारपीट की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में दबाव के बाद प्राथमिकी दर्ज होती है, लेकिन कार्रवाई की गति और परिणाम को लेकर पत्रकारों में असंतोष बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि केवल प्राथमिकी दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

विधानसभा में मुद्दा उठाने की बात

अभिषेक रंजन ने कहा कि पत्रकार बड़े नेताओं और सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछते हैं। जब जवाब देना कठिन होता है तो कई बार सवालों से बचने और पत्रकारों पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवालों से भागने का रास्ता नहीं होता।

उन्होंने कहा, “चनपटिया हो, पश्चिम चंपारण हो या बिहार का कोई भी कोना—पत्रकारों पर हमला हुआ तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठाएगी।”

विधायक ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकार का मुद्दा मजबूती से उठाया जाएगा। सरकार से मांग की जाएगी कि पत्रकारों पर हमले की घटनाओं में त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई हो और पत्रकारों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

अभिषेक रंजन ने कहा, “पत्रकार लोकतंत्र की आंख और कान हैं। उनकी आवाज दबाने की कोशिश लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है। आज पत्रकार सवाल पूछ रहे हैं, कल जनता जवाब पूछेगी। सवालों से भागकर लोकतंत्र नहीं चलता।”

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