उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का एक नया तुगलकी फ़रमान

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अब न समय है, जूझना ही तय है : लालचंद
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का एक नया तुगलकी फ़रमान आया है। अब उत्तर प्रदेश में होने वाली ख और ग श्रेणी की भर्तियों में शुरुवाती 5 साल संविदा पर होंगी। इतना ही नहीं हर छः महीने पर कर्मचारियों का मूल्यांकन किया जाएगा और मूल्यांकन में 60 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले कर्मचारी को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। बेशर्मी से एक-एक पब्लिक सेक्टर को निजी हाथों में सौंपने पर तुली फ़ासिस्ट सरकार किसी भी सम्भावित प्रतिरोध के उठ खड़ा होने से पहले ही गला घोंट देने पर उतारू हैं। इस प्रस्ताव में व्यवहार और मेडिकल के लिए 20-20 अंक निर्धारित किया गया है। साफ है कि आपका व्यवहार अगर राजनीतिक दृष्टिकोण से सत्ता के खिलाफ़ जाएगा तो आपकी नौकरी भी जाएगी।

दूसरी ओर भष्टाचार से मुक्ति का सपना दिखाकर सत्ता में पहुँची योगी सरकार अब भष्टाचार के लिए नए दरवाज़े खोल रही है। अब नेता, मंत्री, नौकरशाह अपने चहेतों को नौकरी दिलाने के लिए किसी की भी छटनी करवा सकते हैं और इस पर सवाल भी नहीं खड़ा किया जा सकता है।
निजीकरण की वजह से सरकारी विभागों में नौकरियाँ लगातार सिकुड़ती जा रही हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में भी सरकारी नौकरी की आस लगाए छात्रों को निराशा ही हाथ लगने वाली है ऊपर से तुर्रा यह कि जिनको भी नौकरी मिलेगी उस पर भी छटनी की तलवार हरदम लटकती रहेगी।

दूसरी तरफ प्राइवेट सेक्टर भयंकर मंदी की चपेट में हैं, जिन लोगों के पास नौकरी है भी उनके लिए भी इसे बचाकर रख पाना मुश्किल होता जा रहा है। भविष्य का यह संकट छात्रों में हताशा पैदा कर रहा है, छात्र अवसादग्रस्त हो रहे हैं और आत्महत्या तक के कदम उठाने पर मज़बूर हैं। राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ो के अनुसार भारत में आत्महत्या करने वालों में सबसे ज्यादा (40 फीसदी) किशोर और युवा शामिल हैं। निजीकरण-उदारीकरण की नीतियों को लागू करते समय जहाँ आत्महत्या की दर 7.9 प्रति 10 लाख लोगों पर थी वह आज बढ़कर 10.5 हो गयी है। हत्यारी फ़ासिस्ट सरकार अपनी नीतियों से छात्रों-नौजवानों में अवसाद को और बढ़ा रही है।
योगी सरकार के इस छात्र-युवा विरोधी प्रस्ताव के ख़िलाफ़ आज भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी और नौजवान भारत सभा-अम्बेडकरनगर इकाई की ओर से बहोरिक पुर बाजार एवं गोपालपुर गाँव में विरोध प्रदर्शन किया गया।

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