Bihar News-एक पेड़ सौ पुत्र समान

Bihar News-One tree is equal to hundred sons
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संवाददाता -राजेन्द्र कुमार

वैशाली /हाजीपुर ।

प्रकृति से जुड़कर मानव सुख शांति समृद्धि को प्राप्त कर सकता है। वही प्रकृति से छेड़छाड़,विकृति से जुड़ने पर विनाश की ओर हमें ले जाता है। आधुनिकता और भोगवादी विकास के कारण आज समूची दुनिया जलवायु परिवर्तन के परिणाम को भुगत रही है। हमने जैसे ही_सर्वे भवंतु सुखिन, सर्वे संतु निरामया को भूलाया वैसे ही हमने अपने सुख चैन को खोया ।

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हमारे संस्कार और हमारी संस्कृति रही है_वसुधैव कुटुंबकम। हम प्राचीन काल से ही अपनी इस संस्कृति का निर्वहन करते आ है। धरती पर रहने वाले सभी जीव हमारे कुटुंब है। ऐसी हमारी धारणा सदा रही है। जैसे ही हम उक्त दोनों सूत्रों को भूलकर सांसारिक सुख के लिए,भोगवादी विकास की और दौड़ना शुरू किया सारे सुखचैन को प्रकृति ने छीन लिया। जैसा बोया बीज वैसा मिल रहा आज फल। प्रकृति से छेड़छाड़,जंगलों का विनाश धराधर पेड़ों की कटाई,वनों का नाश ने हमें बना दिया निर्दय।पेड़ की महत्ता हमारे पुरखे समझते थे। इसीलिए पेड़ की पूजा किया करते थे। पेड़ों को देवता का दर्जा प्राप्त आज भी हमारे धर्म ग्रंथों में है।दुनियां का कोई ग्रंथ चिकित्सा,पर्यावरण,वन और प्रकृति के महत्वों से भरा पड़ा नही मिलेगा। एक पेड़ अपने पूरे जीवन काल में हमें जितना कुछ दे जाता है उसकी कृतज्ञता हम चाह कर भी पूरा नहीं कर सकते। नीम, पीपल,बरगद,पाखड़,जामुन,गुलहर, महुआ आदि पेड़ जीवन दायिनी है। एक पेड़ से हमें क्या-क्या मिलता है? यह जानकर हमें सोचने पर विवश होना पड़ेगा,हमने क्यों अंधाधुन पेड़ की कटाई की। सामान्य मानव पूरे जीवन काल में 8 करोड रुपए से अधिक का सिर्फ ऑक्सीजन लेता है। एक स्वस्थ व्यक्ति प्रत्येक दिन तीन सिलेंडर ऑक्सीजन लेता है। एक पेड़ साल में 20 किलोग्राम धुल सोखता है। गर्मी में पेड़ के नीचे कम से कम चार डिग्री सेंटीग्रेड तापमान कम रहता है। एक पेड़ एक वर्ष में 20 टन कार्बन डाइऑक्साइड को सो है। एक पेड़ एक वर्ष में 700 किलोग्राम ऑक्सीजन देता है। 80 किलोग्राम बोरोन,लिथियम,लेड और जहरीले धातुओं के मिश्रण को सोखता है। एक लाख वर्ग मीटर दूषित हवा को पेड़ शुद्ध करता है। घर के करीब एक पेड़ ऑक्सीटीक बॉल की तरह काम करता है यानी ध्वनि प्रदूषण को कम करता है। घर के पास अगर 10 पेड़ हो तो पेड़ के पास रहने वालों की आयु 7 वर्ष बढ़ जाती है। पेड़ से छाया,जानवरों का चारा,मनुष्य का भोजन,फल_फूल,औषधि,गोंद,छाल,लाखो टन झड़े पत्तों के सड़ने से जैविक खाद बनता है।मिट्टी क्षरण को रोकने का काम भी पेड़ करता। वर्षा करने का कारक बनता है। फल_फूल पत्तियों सहित अंत में सूखने पर जलावन एवं लकड़ी भी पेड़ से मिलते हैं। पेड़ नहीं रहेंगे तो मृदाक्षरण नही रुकेगा। प्रदूषण बढ़ेंगे। तापमान में वृद्धि होगी सुखार होगा। वर्षा का अभाव होगा। जल संकट होगा।अनियंत्रित वर्षा होगी। भूजल स्तर नीचे गिरेगा। गर्मी बढ़ने से ध्रुवीय बर्फ के पिघलने पर समुद्र का जलस्तर में वृद्धि होने से मानव जीवन संकट में होगा। बीमारियों का प्रकोप होगा। इसीलिए किसी ने कहा है_एक पेड़ सौ पुत्र समान। उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण का संरक्षण के लिए और जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए हमने निर्णय लिया है सीड वॉल के माध्यम से नंगे पहाड़ को पेड़ों से आच्छादित करेंगे।

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सीड वॉल को ड्रोन के द्वारा और जरूरत पड़ी तो हेलीकॉप्टर से पहाड़ों पर छिड़काव करेंगे। साथ-साथ पहाड़ों पर होने वाले वर्षा के जल का संग्रह के लिए व्यवस्था की जाएगी, ताकि पहाड़ों का तापमान सूरज की रोशनी में कम हो। पशु_पक्षियों को पीने के लिए जल उपलब्ध हो। पहाड़ ठंडा रहे। वातावरण का तापक्रम संतुलित रहे।
मेरा मानना है_
मंदिरों में बंटे अब यही प्रसाद,एक पौधा और जैविक खाद।
मस्जिदों से अब यही अजान दरख़्त लगाए हर इंसान।
हर गुरुद्वारे से एक ही वाणी, दे हर बंदा पौधों में पानी।
हर चर्च की यही शिक्षा,वृक्ष लगाए यीशु की इच्छा।
सांस हो रही नित_नित कम,आओ पेड़ लगाएं हम।

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