रिपोर्ट विजय कुमार
प्रयाग बुद्धिजीवी मंच के तत्वावधान में शाश्वत आनंद व्याख्यान माला के अंतर्गत प्रोफेसर रामहित त्रिपाठी, पूर्व प्राचार्य ,पंडित महादेव शुक्ल कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय गौर, बस्ती का भारतीय संस्कृति के मूल तत्त्व विषय पर प्रोफेसर हरीश्वर दीक्षित, पूर्व अध्यक्ष, वेद विभाग, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी की अध्यक्षता में ऑनलाइन व्याख्यान संपन्न हुआ।

मुख्य वक्ता प्रोफेसर रामहित त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति मूलत वैदिक संस्कृति है जो भारतीय प्राचीन ऋषियों द्वारा स्थापित है। इसमें मानवीय जीवन मूल्यों को बहुत ही सुसंगत रूप से स्थापित किया गया है। प्राचीन ऋषियों ने प्राकृतिक शक्तियों को देवत्व के रूप में स्थापित किया और उनका मानवीकरण करके उन्हें देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया।
भारतीय संस्कृति यज्ञानुष्ठान की विविधता से ओतप्रोत है ।ऋषियों ने धार्मिक अनुष्ठान को सार्वभौमिक कल्याण के लिए स्वीकारा तथा एकं सद् विप्रा बहुधा बदन्ति के द्वारा नाना रूप वाले देवों में एकात्मकता का संदेश दिया। इसमें संस्कार विधान भी पूर्ण वैज्ञानिक है जो व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त संपादित होते हैं । उन्होंने परम तत्त्व की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का परम पुरुषार्थ मोक्ष है। वहां कहा गया है कि ब्रह्मविद ब्रह्मैव भवति अर्थात जो ब्रह्म को जानता है, वह ब्रह्म ही हो जाता है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रोफेसर हरीश्वर दीक्षित ने कहा कि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से ओत-प्रोत है तथा उसकी कर्म मीमांसा काफी प्रशंसनीय है। भारतीय संस्कृति में नागाओं को भी भगवान के रूप में स्वीकार किया गया है। सबका साथ सबका विकास की भावना भी भारतीय संस्कृति में प्रमुखता से प्ररिक्षित होती है । 
ऑनलाइन जुड़े हुए सभी सदस्यों एवं वक्ताओं का स्वागत प्रयाग बुद्धिजीवी मंच के संयोजक प्रो० उमाकान्त यादव, धन्यवाद ज्ञापन डॉ० के० डी० सिंह, निदेशक, के डी सिंह आई ए एस एकेडमी एवं महासचिव प्रयाग बुद्धिजीवी मंच तथा कार्यक्रम का संचालन प्रयाग बुद्धिजीवी मंच की सचिव डॉ० शारदा पाठक ने किया। वैदिक मंगलाचरण डॉ प्रतिभा आर्या, असिस्टेंट प्रोफेसर, संस्कृत विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज ने किया।

इस ऑनलाइन व्याख्यान में प्रो० डी० एन० यादव, प्रो० मृदुला त्रिपाठी, इंजी०एम० सी० एस० यादव,प्रो० जे० एन० पाल, प्रो० दीपा पुनेठा, प्रो० बेचन शर्मा, प्रो० आर० सी० यादव , प्रो० कुंज बिहारी, डॉ० नीरू कुंज, डॉ लक्ष्मी गुप्ता, डॉ लेखराम,दन्नाना, डॉ मीरा सिंह, डॉ संत प्रकाश तिवारी, डॉ कनकलता दुबे, डॉ धर्मेंद्र गुप्ता, डॉ ओम प्रकाश लाल श्रीवास्तव, प्रो० सत्यदेव, प्रोफेसर आर० एस० यादव , डॉ एस० के० यादव, डॉ मीरा सिंह, डॉ० अर्चना सिंह, डॉ नंदिनी रघुवंशी, डॉ० लालजी यादव, डॉ० संदीप यादव, डॉ० देव कुमार यादव, डॉ अजय कुमार यादव, इंजी० जावेद अख्तर खान, इंजी० जयराम लाल वर्मा, प्रो० विमलेश सिंह यादव, डॉ० बीनू सिंह, डॉ संदीप यादव, डॉ प्रभात कुमार सिंह डॉ रश्मि यादव,डॉ० उपासना पाण्डे, डॉ० उमा मिश्रा, डॉ० आशा कृष्ण, डॉ उष्मा यादव ,डॉ प्रदीप कुमार, डॉ सौम्या कृष्ण, डॉ अरविंद सिंह, डॉ सुनील विश्वकर्मा , डॉ अंशु सिंह , गगन यादव, महेंद्र पाल ,जे० एन० यादव, श्री अजय यादव एवं दिनेश सरोज आदि शामिल रहे।