Bihar News इमरजेंसी भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय

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संवाददाता मोहन सिंह बेतिया

भारत के इतिहास में आज ही के दिन 25 जून 1975 में देशभर में आपातकाल लगाने की घोषणा आधी रात को की गई थी. यह आदेश देश में तात्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर किए गए थे. जिसने कई ऐतिहासिक घटनाओं को जन्म दिया.

Bihar News इमरजेंसी भारतीय लोकतंत्र का काला अध्यायभारतीय राजनीति के इतिहास में यह सबसे विवादस्पद काल रहा क्योंकि आपातकाल में भारत में चुनाव स्थगित कर दिए गए थे एवं प्रेस की स्वतन्त्रता समाप्त कर दिए गए। नागरिक अधिकार स्थगित कर दिए गए थे। भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक की 21 महीने की अवधि का आपातकाल थी। 1975 में यह घोषणा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत की गई थी. सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले हर शख्स को जेल में बंद करवा दिया था. यातनाएं दी गई. बहुत सारे लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया !

Bihar News इमरजेंसी भारतीय लोकतंत्र का काला अध्यायइस अवसर पर भारतीय ऑल मीडिया पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर अमानुल हक , पश्चिम चंपारण प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन सिंह, पत्रकार मृत्युंजय दुबे, ब्रज भूषण कुमार, आशुतोष कुमार बर्नवाल, शकील अहमद, संजय पांडे आदि ने भारतीय लोकतंत्र की तलाश में इसे काला अध्याय बताते हुए कहा है कि समाज को विशेष रुप से नई पीढ़ी को अपने लोकतंत्र की प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति आपातकाल के बारे में न सोच सके।

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