मेरठ न्यूज: संकाय विकास कार्यक्रम के समापन सत्र का आयोजन किया गया।

Meerut News: The concluding session of the Faculty Development Program was organized.
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संवाददाता: मनीष गुप्ता

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ, के मान्यवर कांशीराम शोध पीठ एवम इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के सौजन्य से सामाजिक एवम मानविकी विज्ञान में शोध प्रविधि एवम समंक विश्लेषण तकनीक विषय पर आयोजित 14 दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम के समापन सत्र का आयोजन ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनो प्रकार से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलित कर किया गया। छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। प्रो पीके नाथ द्वारा बताया गया कि इस 14 दिवसीय कार्यक्रम के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए की एक शोधकर्ता के रूप में आपका क्या उद्देश्य है। कार्य कैसे करना है, उन्होंने फंडामेंटल रिसर्च की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया की विभिन्न विषयों के अलग अलग शोध के साथ यदि मिलकर शोध किया जाए। तो मानव कल्याण हेतु और अधिक सार्थक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने भगवतगीता तथा उपनिषदों का उदहारण देते हुए भारतीय शोध की मौलिकता तथा वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा की।

Meerut News: The concluding session of the Faculty Development Program was organized.

उन्होंने सभी प्रतिभागियों को एफडीपी के महत्व को समझाते हुए आगामी पीढ़ियों के विकास में शिक्षक की शोध संबंधी भूमिका से परिचित कराया। प्रो दिनेश कुमार द्वारा संकाय विकास कार्यक्रम की प्रथम दिवस से 14 दिवस तक की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो वाई विमला उपकुलपति, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ, द्वारा की गई। उन्होंने कार्यक्रम की अत्यंत सराहना की। प्रो एनएमपी वर्मा, फारमर वीसी, लखनऊ द्वारा जीडीपी ग्रोथ व सामाजिक विज्ञान पर तथ्य प्रस्तुत किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया की राष्ट्रीय विकास के विभिन्न आयाम जिसमे कुछ नकारात्मक आयाम भी होते हैं। उनके महत्व को भी शोध के माध्यम से अध्यन किया जाना अति आवश्यक है। उन्होंने एफडीपी के आयोजन, प्रयोजन तथा गुणात्मक की प्रशंसा की। उन्होंने बताया की हमे शिक्षक तथा छात्र दोनो को शोध के नैतिक नियमो को पालन करना होगा। प्रो घोष द्वारा ऑनलाइन द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया की तकनीकी किस प्रकार जलवायु परिवर्तन व ऑर्गेनिक फार्मिंग से संबंधित है। इसके बाद एफडीपी कार्यक्रम के कुछ प्रतिभागियों द्वारा इस 14 दिवसीय कार्यक्रम के बारे में फीडबैक प्रस्तुत किया गया। जिसमे डॉक्टर रुचि त्यागी, हापुड़, डॉक्टर कुलज्योत्सना, डॉक्टर स्वर्णा, डॉक्टर मनीला, डॉक्टर रूपेश त्यागी आदि मौजूद थे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो ए के मित्तल, फारमार वीसी आगरा ने कार्यक्रम की प्रशंशा करते हुए कहा की पीएचडी के बाद हमे लगता है की यह सीखने का अंत है। जबकि सीखना एक जीवन प्रयत्न चलने वाली प्रकिया है। उन्होंने प्रतिभागियों को लिट्रेचर रिव्यू के संबंध से संबंधित कुछ बाते बताई। उन्होंने बताया की मानवीय मूल्यों के बिना शोध अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर सकती है। अतः अध्यापक को मानवीय मूल्यों का पालन करते हुए नैतिक संस्कारों के माध्यम से अकादमिक शोध की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में लगभग 200 से अधिक लोगो ने प्रतिभागिता की। कार्यक्रम में डॉक्टर जमाल अहमद सिद्दकी, प्रो अजय विजय कोर, डॉक्टर रूपेश त्यागी, डॉक्टर सपना जैन, डॉक्टर ममता सिंह, डॉक्टर कविता गर्ग आदि का विशेष योगदान रहा। आज माननीय काशीराम ज़ी का जन्मदिवस होने के कारण विद्वानों ने उनके जीवन पर भी प्रकाश डाला। मान्यवर कांशी राम जी के जन्मदिवस के अवसर पर आज सभी अतिथि गनो एवं एफ डी पी के प्रतिभागियों ने कांशी राम जी की प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित कर उनको श्रधांजलि अर्पित की तथा उनके द्वारा समाज हित में किए गये कार्यों पर चर्चा करते हुए यह आहवान किया कि हमें कांशीराम जी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प करना चाहिए।

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