Meerut News: 14 day faculty development program started.
संवाददाता: मनीष गुप्ता
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के मान्यवर कांशीराम शोध एवम इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के सौजन्य से आज सामाजिक एवम मानविकी विज्ञान में शोध प्रविधि एवम समन्क विश्लेषण तकनीक विषय पर 14 दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र का आयोजन ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनो प्रकार से किया गया। जिसमें विभिन्न प्रदेशों के कुलपति सम्मिलित हुए। जिनमे प्रोफेसर एमएम गोयल स्टारेक्स विश्वविद्यालय गुड़गांव, प्रोफेसर एoडीoएनo वाजपेयी, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़, प्रोफेसर संगीता शुक्ला, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के साथ प्रोफेसर वाई विमला, उपकुलपति, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, बीज वक्ता के रूप में प्रोफेसर पीके चौबे, आई आई पी ए नई दिल्ली एवम विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर एन सी लोहानी, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ प्रोफेसर अनीता राठी, प्राचार्य, आई एन पी जी कॉलेज मेरठ रहे। कार्यक्रम का संचालन संकाय विकास कार्यक्रम के समन्वयक प्रो दिनेश कुमार, अर्थशास्त्र विभाग ने किया। मान्यवर कांशीराम शोध पीठ द्वारा प्रकाशित अर्धवार्षिक प्रकाशित पीर रिवीव्ड जरनल का विमोचन हुआ। अध्यक्षीय उद्धबोधन में कुलपति प्रो संगीता शुक्ला ने एफडीपी के महत्व की चर्चा करते हुए। सामाजिक अध्ययन के विभिन्न आयामों पर विशेष महत्व दिया। प्रोफसर पीके चौबे ने अपने संबोधन में सामाजिक विज्ञान के दर्शन के विभिन्न आयामों को भारतीय संस्कृति के माध्यम से विस्तृत रूप से समझाया। उन्होंने बताया की नियति और चरती ही सामाजिक शोध का मूल है। उन्होंने वर्तमान परिदृश्य में आंकड़ों के महत्व पर भी चर्चा की। प्रोफेसर एoडीoएनo वाजपेयी ने सामाजिक अध्ययन की शोध विधियों के अंतर्गत दर्शन के महत्व व वर्तमान परिदृश्य में आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। प्रोफेसर एमएम गोयल ने कहा कि भ्रष्टाचार, उपभोक्तावाद तथा स्वार्थ ही सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए सतर्कता, जागृति और जागरूकता के साथ निडोनॉमिक्स को अपनाना होगा। उन्होंने अनुसंधान की गुणवत्ता तथा आधारभूत संरचना के महत्व को भी स्पष्ट किया। प्रो वाई विमला के अनुसार विज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान का आधार मानव ही है। हमे मानव के व्यवहार के विभिन्न आयामों पर चर्चा हेतु इस प्रकार के कार्यक्रम अधिक संख्या में करवाने चाहिए। प्रो अनिता राठी ने अपने संबोधन मे सामाजिक अध्ययन व मौलिकता के महत्व को स्पष्ट करते हुए। एपीआई तथा अन्य अकादमिक संकेतो की चर्चा की। कला संकाय अध्यक्ष प्रो एनसी लोहनी ने संकाय की ओर से सभी का आभार व्यक्त करते हुए। भाषा और संस्कृति के महत्व को समझाया। कार्यक्रम में विभिन प्रदेशों से ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनो प्रकार में 165 लोगो ने प्रतिभागिता की। इस कार्यक्रम का समापन 15 मार्च 2022 को ऑफलाइन मोड़ में किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रो जसबीर सिंह, डॉक्टर ममता सिंह, डॉक्टर सविता तोमर, डॉक्टर रंजू नारंग, प्रो विजय जयसवाल, प्रो बिरपाल, प्रो जमाल अहमद सिद्दकी, प्रो अजयविजय कौर, प्रो आलोक कुमार, प्रो संजय कुमार, डॉक्टर ललित कुमार, डॉक्टर सपना जैन, डॉक्टर रूपेश त्यागी, डॉक्टर कविता गर्ग, डॉक्टर भूपेंद्र सिंह, शाहीन आदि मौजूद रहे।