कार्यकारी संपादक सुनील पांडेय
मेरे मोहल्ले में एक सब्जी वाला सब्जी बेचने आता था। वह प्रतिदिन बिना किसी नागे के हमारे मोहल्ले में सब्जी बेचता था । वह उम्र के दूसरे पड़ाव पर पहुंच चुका था ,लेकिन आवाज में वही दम था ।बाबूजी जी, मैडम जी ,भैया जी ताजी हरी सब्जी ले लो । मेरी आंटी प्रतिदिन उसका इंतजार करती ,क्योंकि वह सब्जियां बहुत अच्छी लाता था और भाव भी औरों से सही देता था। कई बरस से सब्जी लेते- लेते हमारे आंटी की उसे जान- पहचान हो गई थी ।उसका नाम श्यामलाल था। देखने में वह करीब 60 साल की उम्र का लगता था । यदि उसके पहनावे की बात करें तो उसके शरीर के ऊपरी हिस्से में एक मैला- कुचला सफेद शर्ट व पैर में एक मैली -कुचली पैंट और सर पर एक सफेद पगड़ी बांधे पूरे दिन वह कई मोहल्लों में सब्जी बेचता था। एक दिन अचानक आंटी ने श्यामलाल से पूछ लिया कि तुम्हारे कितने बच्चे हैं,तो श्याम लाल ने बताया मैडम जी हमारे कोई बच्चा नहीं है। हमने अनाथ आश्रम से एक बच्चा गोद लिया था। बुरी संगत ने पड़ने के कारण वाह दारु, गांजा एवं जुए का आदी हो गया है। सब्जी बेचकर जो मैं कमाता हूं उसी से मेरा और मेरी पत्नी का खर्च चलता है। वह अक्सर बीमार रहती है दवा में भी काफी पैसे खर्च होते हैं ,फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी और रोज सुबह 4:00 बजे उठकर सब्जी मंडी जाता हूं हरी ताजी सब्जियां लाकर आप लोगों के बीच में बेचता हूं ।

उससे जो थोड़ी बहुत आमदनी हो जाती है उसी से हमारे घर का खर्चा चलता है। जबसे आंटी ने उसके परिवार की दशा सुनी तब से आंटी की नजरों में वह पहले से ज्यादा सम्मानीय बन गया। मेरी आंटी ज्यादातर सब्जियां उसी से लिया करती हैं। एक दिन मैंने उत्सुकता बस पूछा कि आंटी जी आप इसी सब्जी वाले से सब्जी क्यों लेती हैं? तो उन्होंने कहा कि बेटा इसी बहाने वह उस बुजुर्ग की मदद कर देती हैं। आंटी ने बताया वह सब्जी वाला इतना स्वाभिमानी है कि कभी भी सब्जी से ज्यादा पैसे नहीं लेता । उसके घर परिवार की स्थिति को ध्यान में रखकर जब मैं उसे कुछ पैसे अधिक देना चाहती हूँ तो वह कहता मैडम जी ऊपर जाना है वहां पर हिसाब किताब तो देना होगा ।आंटी उसकी बातों से बहुत प्रभावित थी कभी-कभी हम लोगों से भी उसका जिक्र कर लिया करती थी। आंटी अक्सर कहा करती हैं कि हम इसी तरह बुजुर्ग एवं मेहनतकश लोगों की मदद कर सकते हैं ।मॉल या बडे़ सब्जी वाले दुकानदारों से से सब्जी लेने पर पैसे भी अधिक लगते हैं और उसका फायदा बड़े -बड़े पूंजीपति उठाते हैं ,गरीबों की तो इससे कोई मदद ही नहीं हो पाती ।कम से कम इसी बहाने हम इस तरह के जरूरत मंद एवं मेहनतकश लोगों की मदद तो कर सकते हैं। आंटी की यह सीख मुझे भी याद है मैं भी जब भी सब्जी लेता हूं तो बाजार में प्रयास करता हूं कि किसी बुजुर्ग पुरुष या महिला से लूँ कम से कम इसी बहाने ऐसे लोगों की मदद तो हो जाएगी। प्यारे दोस्त आप भी ऐसा कर सकते हैं। ऐसा करने से सचमुच दिल को सुकून मिलता है कभी करके तो देखिए।