घाघरा नहर बदहाल, पानी के अभाव में किसानों को नहीं मिल रही सिंचाई सुविधा
संवाददाता: राजेन्द्र कुमार
राजापाकर, वैशाली।
प्रखंड क्षेत्र से होकर गुजरने वाली ऐतिहासिक घाघरा नहर इन दिनों बदहाल स्थिति में है। नहर में पानी नहीं रहने के कारण किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पा रही है। वहीं, साफ-सफाई के अभाव में नहर के दोनों किनारों पर झाड़ियां एवं पेड़-पौधे उग आए हैं। कई स्थानों पर कचरे का अंबार लगा हुआ है। इससे नहर का स्वरूप भी पूरी तरह बदल गया है।

जानकारी के अनुसार, किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 1958 में घाघरा नहर की खुदाई की गई थी। इसके बाद वर्ष 1960 में इसका विस्तृत सर्वेक्षण कर नक्शा तैयार किया गया। एक समय था जब जुलाई से फरवरी-मार्च तक नहर में पानी का प्रवाह रहता था। इससे आसपास के सैकड़ों एकड़ खेतों की सिंचाई होती थी और किसानों को काफी सुविधा मिलती थी।
बरसात के दिनों में भी यह नहर क्षेत्र के लोगों के लिए काफी उपयोगी होती थी। वहीं, छठ पर्व के दौरान नहर के किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ भी जुटती थी। नहर में पर्याप्त पानी रहने से स्थानीय किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी इसका लाभ मिलता था।
स्थानीय किसान गुड्डू सिंह, सीताराम सिंह, राम इकबाल सिंह एवं शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बताया कि पहले नहर में पानी रहने से खेतों की सिंचाई में काफी सुविधा होती थी। किसानों को सिंचाई के लिए अन्य साधनों पर कम निर्भर रहना पड़ता था। वर्तमान में स्थिति यह है कि एक ओर क्षेत्र के लोग बाढ़ की समस्या से परेशान होते हैं, वहीं दूसरी ओर नहर में पानी का नामोनिशान नहीं है।
युवा समाजसेवी अनिल कुमार ने कहा कि घाघरा नहर की बदहाली को दूर करने के लिए जनप्रतिनिधियों, स्थानीय लोगों एवं संबंधित विभाग को गंभीरता से पहल करनी चाहिए। उन्होंने जिला पदाधिकारी से नहर की उड़ाही (सफाई) कराकर उसमें नियमित जल प्रवाह की व्यवस्था कराने की मांग की, ताकि किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल सके और ऐतिहासिक नहर का अस्तित्व भी सुरक्षित रह सके।