Bihar News : नेपाल में भीषण बाढ़ और मलबे की त्रासदी के बाद पश्चिम चंपारण के तीन मजदूर लापता, चार सुरक्षित लौटे
नेपाल में बढ़ई का काम करने गए थे मजदूर, आपदा के बाद परिजनों में चिंता का माहौल
संवाददाता मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण। नेपाल के रसुआ जिले में आई भीषण बाढ़ और मलबे की त्रासदी के बाद पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया थाना क्षेत्र के तुरहापट्टी वार्ड-1 निवासी तीन मजदूर लापता हैं। वहीं, उनके साथ नेपाल में रह रहे चार अन्य मजदूर शनिवार को सुरक्षित अपने घर लौट आए। घर लौटे मजदूरों ने नेपाल में आई आपदा के दौरान जान बचाकर निकलने की पूरी आपबीती सुनाई।
लापता मजदूरों की पहचान हसमुद्दीन मियां के पुत्र समीर अंसारी (23), इस्लाम अंसारी के पुत्र मोख्तार मियां (45) और आस मियां के पुत्र अरमान आलम (35) के रूप में हुई है। बताया गया कि तीनों मजदूर नेपाल के रसुआ जिले के धुन्चे क्षेत्र स्थित श्याफ्रुबेसी गांव में अन्य मजदूरों के साथ किराये के कमरे में रहकर बढ़ई का काम करते थे।
सुरक्षित लौटे 34 वर्षीय मजदूर नेयाज आलम ने बताया कि अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आने लगा। स्थिति बिगड़ती देख वे लोग जान बचाने के लिए ऊंची पहाड़ी की ओर चले गए। पानी का बहाव कम होने के बाद जब उन्होंने अपने तीन अन्य साथियों की तलाश शुरू की तो उनका कोई सुराग नहीं मिला। उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन सभी नंबर बंद मिले।
नेयाज आलम के अनुसार, इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया और बाद में एक स्कूल में ठहराया गया। वहां सेना के जवानों ने उन्हें भोजन और पानी उपलब्ध कराया। अगले दिन शाम करीब चार बजे उन्हें हेलीकॉप्टर से धुन्चे ले जाया गया। वहां करीब दो घंटे रुकने के बाद उन्हें त्रिशूली (बटार) और फिर काठमांडू पहुंचाया गया।
काठमांडू में रिश्तेदारों के यहां रात बिताने के बाद वे सुबह करीब सात बजे वहां से निकले। दोपहर करीब दो बजे बीरगंज पहुंचे और फिर रक्सौल होते हुए ट्रेन से अपने घर बेतिया लौट आए।
वहीं, 17 वर्षीय सलमान आलम ने बताया कि घटना के समय कमरे में कुल सात लोग सो रहे थे। सुबह करीब छह बजे चार लोग काम पर चले गए थे, जिनमें टाइल्स और बढ़ई का काम करने वाले मजदूर शामिल थे। सलमान ने बताया कि उसके गले में दर्द था, इसलिए उसने एक साथी को दवा लाने भेजा था, लेकिन दुकानदार द्वारा दवा नहीं दिए जाने के कारण वह बिना दवा लिए सो गया।
सलमान के मुताबिक, सुबह करीब 9:30 बजे अचानक लोगों की चीख-पुकार सुनकर उसकी नींद खुली। कमरे के बाहर चारों तरफ धुआं और पानी का तेज बहाव दिखाई दे रहा था। जान बचाने के लिए वह अन्य लोगों के साथ ऊंचाई की ओर भागा। इसी दौरान चार लोगों के साथ गए एक अन्य साथी भी रास्ते में मिल गए।
पानी का बहाव कम होने के बाद सलमान और अन्य लोगों ने अपने लापता तीन साथियों की तलाश शुरू की। इनमें उसके पिता भी शामिल बताए जा रहे हैं। उन्होंने पहाड़ी और आसपास के इलाकों में काफी खोजबीन की, लेकिन तीनों का कोई पता नहीं चला। उनके मोबाइल फोन भी बंद मिल रहे हैं, जिससे परिवार के लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
इस संबंध में चनपटिया के अंचलाधिकारी राहुल कुमार ने बताया कि परिजनों की ओर से नेपाल में आई भीषण आपदा के दौरान तुरहापट्टी गांव के तीन लोगों के लापता होने की सूचना दी गई है।
अंचलाधिकारी ने बताया कि मामले की लिखित सूचना आपदा प्रबंधन विभाग एवं वरीय पदाधिकारियों को दे दी गई है। इस संबंध में अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है।
इधर, तीनों लापता मजदूरों के परिवार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं। परिजन प्रशासन और नेपाल में चल रहे राहत एवं बचाव अभियान से मिलने वाली जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।