Bihar News: ऐतिहासिक किशुन बाग मंदिर परिसर का होगा कायाकल्प, चहारदीवारी के साथ लगेंगे पेवर ब्लॉक्स और टाइल्स, निविदा जारी : गरिमा

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बेतिया के किशुन बाग मंदिर का होगा कायाकल्प, 11.34 लाख की निविदा जारी

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संवाददाता : मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण।

महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने बताया कि बेतिया नगर निगम क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल किशुन बाग मंदिर परिसर के विकास और सौंदर्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। नगर निगम बोर्ड से स्वीकृत योजना के तहत मंदिर परिसर की चहारदीवारी के निर्माण के साथ पेवर ब्लॉक्स एवं टाइल्स लगाने के कार्य के लिए निविदा आमंत्रित की गई है।

महापौर ने बताया कि इस योजना के पूरा होने के बाद जिलेभर के श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र किशुन बाग मंदिर परिसर को व्यवस्थित, सुरक्षित और आकर्षक स्वरूप मिलने की उम्मीद है।

नगर निगम द्वारा जारी निविदा के अनुसार, योजना की अनुमानित लागत 11 लाख 34 हजार 565 रुपये निर्धारित की गई है। कार्य के तहत ऐतिहासिक किशुन बाग मंदिर परिसर की चहारदीवारी का निर्माण तथा परिसर में पेवर ब्लॉक्स एवं टाइल्स लगाने का कार्य किया जाएगा। योजना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए बेहतर एवं साफ-सुथरा मार्ग उपलब्ध होगा और परिसर की सुरक्षा भी मजबूत होगी।

नगर निगम की इस पहल को शहर के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे धार्मिक आयोजनों के दौरान मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

महापौर ने बताया कि निविदा के अनुसार कार्य पूरा करने की अवधि तीन माह निर्धारित की गई है। संवेदकों के लिए निविदा दस्तावेज अपलोड करने की अंतिम तिथि 10 सितंबर निर्धारित की गई है, जबकि निविदा 11 सितंबर को खोली जाएगी। योजना के लिए संवेदक के चयन और कार्य के शीघ्र क्रियान्वयन से किशुन बाग मंदिर परिसर के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने कहा कि बेतिया राज काल में स्थापित ऐतिहासिक धरोहरों को उपेक्षा की स्थिति से उबारना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। इसी कड़ी में मां काली धाम कॉरिडोर के निर्माण की योजना को भी स्वीकृति दी गई है। अब समीपवर्ती किशुन बाग मंदिर परिसर की चहारदीवारी के साथ इसके सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मूल मंदिर के ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए परिसर में आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा तथा फर्श पर टाइल्स आदि लगाए जाएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके।

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