संवाददाता : राजेन्द्र कुमार
स्थान : राजापाकर
राजापाकर । प्रखंड क्षेत्र की लगुराव बिलंदपुर पंचायत स्थित लगुराव चौर में फेंकी गई सरकारी दवाइयों एवं सर्जिकल सामग्री के मामले ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। गुरुवार को प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर भारी मात्रा में बरामद दवाइयों और सर्जिकल सामान को जब्त कर जांच के लिए अनुमंडल अस्पताल महुआ भेज दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार की सुबह ग्रामीणों ने लगुराव चौर स्थित गड्ढेनुमा पानी में बड़ी मात्रा में सरकारी अस्पतालों में वितरित की जाने वाली दवाइयां, इंजेक्शन और सर्जिकल सामग्री देखी। इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग को दी। सूचना मिलते ही राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम तथा जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।
गुरुवार को अनुमंडल पदाधिकारी महुआ, बीडीओ सौरव बरनवाल, सीओ मणि वर्मा, राजापाकर बीडीओ सूर्य प्रताप सिंह तथा सीओ गौरव कुमार की उपस्थिति में स्वास्थ्य विभाग की तीन गाड़ियों में दवाइयों और सर्जिकल सामान को प्लास्टिक के बोरों में पैक कर लोड किया गया। बाद में इन्हें जांच के लिए अनुमंडल अस्पताल महुआ भेजा गया।
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में अधिकांश दवाइयों पर जनवरी 2027 तक की एक्सपायरी तिथि अंकित पाई गई। बरामद दवाइयों में मेटफॉर्मिन, लैक्टोलोज, पीडियाड्रिप, सिल्वर सल्फाडायजिन, बी-कॉम्प्लेक्स सिरप, परमैथ्रिन क्रीम, माइकोनाजोल क्रीम तथा ओआरएस के पैकेट शामिल हैं। वहीं सर्जिकल सामग्री में बड़ी संख्या में नई सिरिंज, यूरिन बैग और सर्जिकल ग्लव्स मिले हैं।
दवाइयों एवं सर्जिकल सामान को गड्ढेनुमा पानी से निकालने का कार्य स्टोरकीपर दीपक कुमार, स्वास्थ्य कर्मियों एवं ग्रामीणों के सहयोग से किया गया। स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि पंकज कुमार की मौजूदगी में लोगों को समझाकर दवाइयों को स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियों में लोड कराया गया।
हालांकि, अब तक कोई भी स्वास्थ्य कर्मी या अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं है कि ये दवाइयां कहां से लाई गईं और किसके द्वारा यहां फेंकी गईं। प्रशासन का कहना है कि बैच नंबर और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे मामले के पीछे कौन जिम्मेदार है।
क्षेत्र में इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अक्सर सर्जिकल सामान बाहर से खरीदने के लिए कहा जाता है, जबकि यहां लाखों रुपये मूल्य की नई दवाइयां और सर्जिकल सामग्री खुले में गंदे पानी में फेंकी मिली हैं। लोग इसे गंभीर लापरवाही अथवा किसी बड़ी साजिश से जोड़कर देख रहे हैं।