संवाददाता राजेन्द्र कुमार
काशीपुर /वैशाली
मजदूर नेता कार्ल मार्क्स के तैल चित्र पर उपस्थित लोगों ने माल्यार्पण किया तथा उन्हें महान मजदूरों का हितैषी बताया. वक्ताओं ने कहा कि कार्ल मार्क्स ने मजदूरों के विकास एवं अधिकारों की बात करते हुए दुनिया के मजदूर एक हो, मजदूर एकता जिंदाबाद का नारा दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने किया एवं संचालन शिक्षाविद सुरेश प्रसाद सिंह ने किया. मौके पर उन्होंने कहा कि हर साल 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है.जो श्रमिकों के योगदान उनके संघर्ष और अधिकारों को समर्पित है. यह दिन कामगारों की मेहनत का सम्मान करने और 8 घंटे के कार्य दिवस के लिए उनके संघर्ष की याद दिलाता है. भारत में पहली बार 1 मई 1930 को चेन्नई में मजदूर दिवस मनाया गया था. ज्ञात हो कि 1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो में मजदूरों ने 8 घंटे से ज्यादा काम न करने के लिए आंदोलन शुरू किया था. जिसके बाद पुलिस ने गोलीबारी की और कई मजदूर शहीद हुए थे. इस दिन का मुख्य उद्देश्य मजदूरों को उनके अधिकार के प्रति जागरूक करना और उन्हें उचित वेतन और सुरक्षा सुनिश्चित करना है. वहीं उन्होंने मजदूरों के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि आज मजदूर पर सबसे बड़ा हमला यह है कि लेबर लॉ को बदलकर श्रम संहिता बना दिया गया है. जबकि श्रम कानून बाध्यकारी होता है परंतु श्रम संहिता बाध्यकारी नहीं होता है तो इससे स्पष्ट है कि मजदूर अधिकार की जरूरत है. इसके लिए अभियान चलाया जाना चाहिए. अन्य भक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किया तथा मजदूरों के विकास की बात कही . कार्यक्रम में उपस्थित अधिवक्ता सुरेश प्रसाद सिंह, कुमार राकेश, भानु कुमार सिंह, विजेंद्र कुमार यादव, राजीव रंजन, अनिल राय, अमूल्य निधि, मेदिनी कुमार, अमरेंद्र प्रसाद सिंह सहित अनेक लोग कार्यक्रम में शामिल हुए.