संवाददाता : पंकज कुमार
स्थान : जलालपुर, अम्बेडकरनगर (उत्तर प्रदेश)
दिनांक : 20 मार्च 2026
अम्बेडकरनगर । जलालपुर तहसील क्षेत्र में हरे पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला एक बार फिर चर्चा में है। क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से सामने आए वीडियो और स्थानीय शिकायतों ने वन विभाग और संबंधित सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रात में कटान, दिन में जांच – सिस्टम पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार ग्राम सभा अरई, चौड़ी पुलिया से लाभापार पुल के बीच जीपीएस कैमरे में पेड़ों की कटाई के दृश्य रिकॉर्ड हुए हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
प्रभावित क्षेत्र:
- कर्बला बाजार से रफीगंज मार्ग
- पंथीपुर क्षेत्र
- सुधार नगर के आसपास सड़क किनारे इलाके
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के अंधेरे में पेड़ों की कटाई की जाती है और दिन में केवल जांच का दिखावा किया जाता है।
ठेकेदार और विभागीय मिलीभगत के आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कथित तौर पर ठेकेदारों और कुछ विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से यह अवैध कटान जारी है। आरोप है कि नशे के आदी लोगों को मामूली पैसे देकर रात में पेड़ों की कटाई करवाई जाती है और बाद में लकड़ी को बाजार में बेच दिया जाता है।
हालांकि, इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
वीडियो साक्ष्य के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जीपीएस कैमरे में कटाई के वीडियो मौजूद हैं, तो अब तक दोषियों की पहचान और कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई?
उठ रहे प्रमुख सवाल
- क्या यह महज लापरवाही है?
- या फिर किसी प्रभावशाली संरक्षण के चलते कार्रवाई नहीं हो रही?
- जांच के नाम पर केवल औपचारिकता क्यों?
पर्यावरण और प्रशासन दोनों पर संकट
यह मामला सिर्फ अवैध कटान तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में हरियाली का बड़ा नुकसान हो सकता है।
बढ़ सकती है कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो इस मामले को लेकर बड़े स्तर पर विरोध और जांच की मांग तेज हो सकती है।
निष्कर्ष – हरे पेड़ों का ‘मौन कत्ल’ रात के अंधेरे में हरे पेड़ों की कटाई और दिन में फाइलों में सिमटती जांच—यह स्थिति न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।