संवाददाता : मोहन सिंह
स्थान : बेतिया, जिला पश्चिम चंपारण (बिहार)
दिनांक : 13 मार्च 2026
निगरानी विभाग की बड़ी कार्रवाई के तहत पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में निगरानी विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला गव्य विकास विभाग के फील्ड अफसर को ₹30,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
यह कार्रवाई पटना से आई निगरानी विभाग की टीम द्वारा की गई। आरोपी अधिकारी को बानुछापर स्थित कार्यालय में ही रिश्वत लेते समय धर दबोचा गया। इस घटना के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
किसान से अनुदान राशि दिलाने के नाम पर मांगी थी रिश्वत
जानकारी के अनुसार जिला गव्य विकास विभाग के फील्ड अफसर, अनुराग सिंह पर आरोप है कि उन्होंने एक पशुपालक किसान से अनुदान राशि दिलाने के बदले रिश्वत की मांग की थी।
पीड़ित किसान बबलू कुमार ने बताया कि अधिकारी उनसे अनुदान की राशि जारी कराने के लिए लगातार पैसे की मांग कर रहे थे।
किसान ने इस मामले की शिकायत निगरानी विभाग से की, जिसके बाद टीम ने पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की योजना बनाई।
पहले भी ले चुके थे रिश्वत
पीड़ित किसान बबलू कुमार ने बताया कि आरोपी अधिकारी पहले भी उनसे इंश्योरेंस के नाम पर 32 हजार रुपये रिश्वत ले चुके थे।
इसके बाद भी आरोपी अधिकारी द्वारा फिर से पैसे की मांग की जा रही थी। परेशान होकर किसान ने इसकी शिकायत निगरानी विभाग से की।
कार्यालय में ही रंगे हाथ गिरफ्तार
निगरानी विभाग की टीम ने योजना बनाकर 13 मार्च 2026 (शुक्रवार) को कार्रवाई की।
जैसे ही किसान ने बानुछापर स्थित कार्यालय में आरोपी अधिकारी को ₹30,000 रिश्वत के रूप में दिए, उसी समय निगरानी विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई के बाद कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कार्यालय में चल रही है जांच
गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की टीम आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
सूत्रों के अनुसार टीम अभी भी कार्यालय में मौजूद है और वहां दस्तावेजों की जांच कर रही है।
संभावना जताई जा रही है कि जांच के दौरान और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई
निगरानी विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है।