संवाददाता प्रताप सिंह आजाद
आगरा। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद स्थानीय पशुओं, विशेषकर देसी श्वानों के प्रति क्रूरता के मामलों में इजाफा देखने को मिल रहा है। इसी के विरोध और लोगों में पशु संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पशु प्रेमियों ने बोदला स्थित सेंट्रल पार्क में नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जिस देश में परंपरागत रूप से पहली रोटी गाय और अंतिम रोटी श्वान के लिए निकाली जाती है, वहां आज पशु-पक्षियों को भोजन कराना भी विवाद का विषय बनता जा रहा है।पशु प्रेमियों का कहना है कि खतरा देसी पशुओं से नहीं, बल्कि उन विदेशी नस्लों से है जो भारतीय जलवायु के अनुकूल नहीं हैं। यदि प्रकृति की खाद्य श्रृंखला बाधित होती है तो इसका सीधा प्रभाव मानव अस्तित्व पर भी पड़ेगा।

कैस्पर्स होम की निदेशक विनीता अरोरा ने बताया कि वर्तमान में देश के 49 शहरों में इस मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 7 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में यदि भारतीय नस्ल के श्वानों को विस्थापित करने से संबंधित नीति में बदलाव नहीं हुआ, तो देशभर के पशु प्रेमी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की पढ़ाई बाधित कर शिक्षकों को स्ट्रीट डॉग हटाने के कार्य में लगाना न तो व्यावहारिक है और न ही मानवीय। सभी श्वानों को शेल्टर होम में भेजना न्याय, धर्म और पशु कल्याण के सिद्धांतों के विपरीत है।
पशु प्रेमियों का आरोप है कि आदेश के बाद जानवरों पर गर्म पानी फेंकने, लोहे की सरियों से मारने और पशु प्रेमियों को धमकाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। हालांकि कुछ निजी स्कूलों, अस्पतालों और संस्थानों ने नगर निगम को एफिडेविट देकर पशुओं को हटाने के बजाय स्वयं उनकी देखभाल की जिम्मेदारी ली है।
इस अवसर पर एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) पॉलिसी को पुनः लागू करने की मांग की गई। नुक्कड़ नाटक की स्क्रिप्ट विनीता अरोरा द्वारा लिखी गई, जबकि प्रस्तुति आशीष कपूर, डिम्पी महेन्द्रू और गरिमा शर्मा ने दी।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अमन अग्रवाल, शांतनु बंसल, किरण सेतिया, विकास अग्रवाल सहित अन्य पशु प्रेमी मौजूद रहे।