संवाददाता: मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण।
पश्चिम चंपारण में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक अभिनव जनअभियान की शुरुआत की गई है। जिला पदाधिकारी तरन जोत सिंह के मार्गदर्शन, उप विकास आयुक्त काजले वैभव नितिन के नेतृत्व तथा मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी अजय सहाय के सहयोग से सिकटा प्रखंड में ‘जल-जीवन हरियाली’ अभियान के तहत 30 हजार सीड बॉल तैयार किए जा रहे हैं।

इन सीड बॉल में 10 हजार नीम, 10 हजार पीपल और 10 हजार बरगद के बीज शामिल हैं। मानसून के दौरान इन्हें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बिखेरा जाएगा, ताकि प्राकृतिक रूप से अधिक से अधिक पौधों का विकास हो सके।
उप विकास आयुक्त ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति आधारित समाधान के माध्यम से बढ़ते तापमान, भूजल संकट, जैव विविधता संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में जनभागीदारी को मजबूत करना भी है।
उन्होंने कहा कि मानसून की पहली बारिश के बाद ये सीड बॉल नदियों, तालाबों, आर्द्रभूमियों, वन क्षेत्रों और सड़कों के किनारे अंकुरित होकर हजारों नए वृक्षों का रूप ले सकते हैं। यह कम लागत में अधिक क्षेत्र को हरित बनाने का प्रभावी और टिकाऊ मॉडल माना जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पीपल, बरगद और नीम जैसे देशी वृक्ष स्थानीय तापमान को नियंत्रित करने, स्वच्छ वायु उपलब्ध कराने, वर्षा जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण तथा मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही ये पक्षियों, तितलियों, मधुमक्खियों तथा अन्य परागण करने वाले जीवों के लिए आश्रय और भोजन का महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं।
उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि “पानी बोओ–पानी उगाओ” और “प्रकृति बचाओ–भविष्य बचाओ” की सोच को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास है। यदि पंचायतों, विद्यालयों, स्वयं सहायता समूहों, युवा मंडलों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो पश्चिम चंपारण आने वाले वर्षों में हरित, जल-समृद्ध और जलवायु-सहिष्णु जिले के रूप में नई पहचान स्थापित कर सकता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आज तैयार किए जा रहे 30 हजार सीड बॉल भविष्य में लाखों पेड़ों की आधारशिला बन सकते हैं और पश्चिम चंपारण की नदियों, तालाबों, जंगलों तथा गांवों को हरित सुरक्षा कवच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।