Bihar News :2674 विद्यालयों में गूंजा प्रकृति संरक्षण का संदेश, बच्चों ने बनाए पक्षियों के लिए घोंसले
संवाददाता: मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिम चंपारण।
पर्यावरण संरक्षण और पक्षियों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आश्रय उपलब्ध कराने की दिशा में पश्चिम चंपारण जिले के विद्यालयों में अनूठी पहल की जा रही है। उप विकास आयुक्त, पश्चिम चंपारण, बेतिया काजले वैभव नितिन के मार्गदर्शन में जिले के प्रारंभिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में ‘इको क्लब मिशन फॉर लाइफ’ के अंतर्गत नारियल के खोल एवं अन्य अनुपयोगी सामग्रियों से पक्षियों के लिए घोंसले (Bird House) बनाने की गतिविधि आयोजित की जा रही है।

इस संबंध में कार्यालय पत्रांक एसएसए/क्वालिटी/1874, दिनांक 16 मई 2026 के माध्यम से सभी संबंधित विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। मई 2026 से अब तक जिले के कुल 2674 विद्यालयों में इस गतिविधि का आयोजन किया जा चुका है।

गतिविधि के दौरान विद्यार्थियों ने नारियल के खोल एवं अन्य अनुपयोगी सामग्रियों का रचनात्मक उपयोग करते हुए पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय तैयार किए। सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों ने अपनी प्रतिभा, लगन और सामूहिक प्रयास का परिचय दिया।

इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे रचनात्मक प्रयासों से भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इसके साथ ही अनुपयोगी सामग्रियों के पुनः उपयोग तथा स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली के प्रति भी बच्चों को जागरूक किया गया।
इस गतिविधि का उद्देश्य पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ-साथ विद्यार्थियों में जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता, प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
विद्यालयों में आयोजित इस गतिविधि में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से उत्साह और रचनात्मकता का वातावरण बना। बच्चों ने अपने प्रयासों के माध्यम से यह संदेश दिया कि प्रकृति की रक्षा के लिए इच्छाशक्ति, संवेदनशीलता और सामूहिक सहभागिता महत्वपूर्ण है।
बच्चों को प्रकृति से जोड़ना जरूरी: डीडीसी
उप विकास आयुक्त, पश्चिम चंपारण, बेतिया काजले वैभव नितिन ने कहा कि बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ‘इको क्लब मिशन फॉर लाइफ’ के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण को केवल पढ़ने के बजाय उसे अपने व्यवहार और दैनिक गतिविधियों में अपनाने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि पक्षियों के लिए घोंसला बनाना एक छोटी पहल दिखाई दे सकती है, लेकिन इसके माध्यम से बच्चों में जीव-जंतुओं के प्रति करुणा, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, संसाधनों के पुनः उपयोग तथा पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व जैसी भावनाओं का विकास होता है। उन्होंने विद्यालयों में इस प्रकार की रचनात्मक एवं पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस गतिविधि के सफल आयोजन में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा सहित संबंधित पदाधिकारियों, शिक्षकों एवं विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।