रिषी पाल सिंह : उत्तर प्रदेश सरकार ने वैश्विक महामारी को लेकर जनता को राहत देने को लेकर तमाम घोषणाएं की थी लेकिन उक्त घोषणाओ पर आज तक कोई अमल नहीं किया गया। सरकार ने हाथ की दस्तकारी करने वाले लोहार,नाई, सुनार, सहित अनेकों जातियों को ₹1000 देने की घोषणा की थी लेकिन लॉक डाउन के 40 दिन बाद भी इन्हें कोई राहत नहीं दी गई। कहा तो यहां तक गया था कि हर कार्ड धारक को 1 किलो दाल मुफ्त में दी जाएगी गरीब जनता दाल की उम्मीद लगाए बैठी हैं कि शायद अगले महीने दाल जरूर आएगी। इसी प्रकार जिन गरीब लोगो के पास राशन कार्ड ना होने से उन्हें भी राशन की दुकान से राशन उपलब्ध कराया जाएगा लेकिन तमाम ऐसे लोग है जिनके हाथ कुछ भी नहीं लगा ऐसे तमाम गरीब है जिन्होंने राशन कार्ड का ऑनलाइन आवेदन भी किया आवेदन स्वीकार होने के बाद भी राशन डीलर उन्हें राशन उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, क्योंकि जिला पूर्ति कार्यालय द्वारा स्वीकृत राशन कार्ड का राशन ही नहीं उपलब्ध कराया गया, बेबस गरीब और मजदूर राशन की दुकान का चक्कर काटकर घर बैठ गए आखिर निम्न वर्ग के लोग किस तरह जीवन यापन कर रहे हैं। इसकी चिंता शासन और प्रशासन ने आज तक नहीं ली जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव रामकुमार सविता ने शासन और प्रशासन की नीतियों को अमल में लाए जाने की मांग करते हुए कहा की पानी के बताशे लगाने वाले, चार्ट की दुकान लगाने वाले, बाल काटने वाले नाई, किसानों के छोटे पूरे औजार बनाने वाले लोहार, सोने चांदी के आभूषणों की मरम्मत करने वाले सुनार, पान बेचने वाले, गांव में फेरी लगाने वाले किसी अन्य तरीके से जीवन यापन करने वाले निम्न वर्ग के लोगों की चिंता किसी को नहीं है। सरकार शराब की दुकानें खुलवा सकती है सरकार मीट की दुकानें खुलवा सकती है बिल्डिंग मटेरियल की दुकानें खुलवा सकती है औद्योगिक इकाइयां खुलवा सकती है फोर व्हीलर वाहन पेट्रोल पंप सरकार से जुड़े राजस्व देने वाले लगभग सभी व्यवसाय चालू कराए जा सकते हैं। जबकि इससे सबसे बड़ा खतरा वैश्विक महामारी को है या फिर निम्न वर्ग के लोगों से खतरा अधिक है उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि महामारी के चलते दी गयी छूटे तत्काल वापस ले जिससे इस बीमारी से बचा जा सके, साथ ही निम्न वर्ग के लोगों को भी आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ उन्हें भी अपने व्यवसाय करने की अनुमति कानून के हिसाब से देनी चाहिए जिससे वह भी अपने बच्चों का पेट पाल सकें, क्योंकि जीवन जीने के लिए चावल और गेहूं से काम नहीं चल सकता उन्हें तमाम कच्ची सामग्रियों के साथ-साथ बूढ़े और बच्चों का ध्यान रखना पड़ता है।