अम्बेडकर नगर न्यूज हवन यज्ञ व भंडारे के साथ हुआ श्रीराम कथा का समापन

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संवाददाता अम्बेडकर नगर

अम्बेडकर नगर जिले के आलापुर तहसील स्थित भुजहिया माता मन्दिर परिसर में चल रही श्री शतचण्डी महायज्ञ रविवार को संपन्न हो गई। कथा के समापन के हवन यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया। भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में आहुति डाली और फिर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया।श्री शतचण्डी महायज्ञ का आयोजन पं.कामता प्रसाद शुक्ला ने करवाया।

 

 

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कथा व्यास देवेश जी महाराज ने 9 दिन तक चली कथा में भक्तों को श्रीराम कथा की महिमा बताई। उन्होंने लोगों से भक्ति मार्ग से जुड़ने और सत्कर्म करने को कहा।श्री देवेश जी महाराज ने कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि श्रीराम कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीराम कथा से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथावाचक देवेश जी महाराज ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। कथा समापन के दिन रविवार को विधिविधान से पूजा करवाई। हवन और भंडारा कराया गया।

 

 

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इसमें यज्ञाचार्य व क्षेत्र के जनमानस के साथ आहुति डाली। गाँव से आए श्रद्धालुओं ने भी हवन में आहुति डाली। पूजन के बाद सायं को भंडारा लगाकर प्रसाद वितरण किया गया जिसमें बड़ी संख्या में देवी भक्त प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे। भक्तों ने देवी के जयकारे लगाकर माता रानी की स्तुति की।

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