संवाददाता: राजेन्द्र कुमार
राजापाकर, वैशाली।
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) राजापाकर परिसर में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों, एएनएम, आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, लैंगिक समानता तथा सतत विकास के प्रति लोगों को जागरूक करने पर विशेष बल दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एस.पी. उपाध्याय ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, शिक्षा तथा सतत विकास के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है।
उन्होंने कहा कि अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि का सीधा प्रभाव भोजन, पानी, आवास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा पर्यावरण पर पड़ता है। इसके कारण बेरोजगारी, गरीबी, प्राकृतिक संसाधनों की कमी, पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। इसलिए जनसंख्या वृद्धि को संतुलित रखना समय की आवश्यकता है।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन के साधनों का अधिक से अधिक उपयोग, महिलाओं की शिक्षा एवं सशक्तिकरण, विवाह की निर्धारित आयु का पालन तथा बाल विवाह पर रोक अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने “छोटा परिवार, सुखी परिवार” की अवधारणा को अपनाने और आमजन को गर्भनिरोधक साधनों की सही जानकारी देने पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर डॉ. रमेश चंद्रा ने कहा कि विश्व जनसंख्या दिवस का संदेश है कि संतुलित जनसंख्या ही स्वस्थ, समृद्ध और विकसित समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, परिवार नियोजन और जन-जागरूकता को बढ़ावा देकर बढ़ती जनसंख्या से उत्पन्न समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से जनसंख्या नियंत्रण एवं सतत विकास में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
कार्यक्रम में डॉ. एस.पी. उपाध्याय, डॉ. रमेश चंद्रा, डॉ. मनीषा, एएनएम शीला कुमारी, मधु कुमारी, गीता रानी, गुंजा कुमारी, गुंजन कुमारी सहित बड़ी संख्या में आशा एवं ममता कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।