मां तुम तो ममता की मूरत हो

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मां
तुम तो ममता की मूरत हो मां
तेरे आंचल में सुख पाया
ईश्वर को ना देखा है हमने
हमने ईश्वर तुम ही में है पाया
गर्भ में तुम्हारे जब हम आते
सारे सुख तुम में है समाते
कल्पना करती तुम हमारी आने की करती तुम तैयारी
जनने की पीड़ा भूल जाती
जैसे अनमोल रतन है पाया
तुम।।।।
अपने बच्चे लगते सबसे प्यारे
सारे सुख तुमने उन पर है वारे
काला टीका तुम हमें लगाती बुरी नजरों से हमको बचाती
नींद जब हमको ना आई मां लोरी गाकर तूने सुलाया
तुम।।।
रूठने पर हमारे तुम मां हंसाती गुदगुदाती मनाती
थकी होने पर भी तुम मां बच्चों के मां का पकाती
एक-एक निवाला हमें मां अपने हाथों से तूने खिलाया
तुम।।।।
बेटी के बड़े होने पर उसके ब्याह की चिंता सताती
ब्याह तै होते ही बेटी का मां नींद तेरी आंखों से उड़ जाती
बेटी को विदा करते हुए मां
दिल पत्थर का अपना बनाया
तुम।।।
मन क्यों आज तुम सो गई हो हमसे दूर बहुत चली गई हो
कहां ढूंढे कहां पाए सबसे पूछ पूछ घबराए
सब ने धीरज हमको बनाया उसे देश का पता ना बताया
तुम।।।।।
तुम जहां भी रहो मेरी माता मोक्ष तुमको दे दे विधाता तेरी आशीष से फलेंगे मां तुझे कभी ना हम भूलेंगे
सदा र चलेंगे वहीं हम जो तूने ही हमको दिखाया
तुम।।।।।
स्वरचित
जया मोहन प्रयागराज

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