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यूपी पंचायत चुनाव को लेकर लखनऊ खंडपीठ का बड़ा फैसला

सुनील पांडेय( कार्यकारी संपादक)

लखनऊ।यूपी के त्रिस्तरीय पंचायत के संदर्भ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण प्रणाली को लागू कर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने आज दिए जाने निर्णय में साफ किया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए जारी की गई आरक्षण प्रणाली नहीं चलेगी, बल्कि वर्ष 2015 को आधार मानकर ही आरक्षण सूची जारी की जाए।

यूपी पंचायत चुनावों में सीटों पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए सीटों पर आरक्षण लागू किया जाए। इस पर राज्य सरकार ने स्वयं कहा कि वह वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए आरक्षण व्यवस्था लागू करने के लिए तैयार है। लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी व न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने 25 मई 2021तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराने के आदेश पारित किए हैं।
हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के निर्देश केपश्चात अब पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण की सूची में फेरबदल जाना आवश्यक हो गया है । कोर्ट ने पंचायती राज विभाग को 27 मार्च तक संशोधित सूची जारी करने का निर्देश देने के साथ ही पंचायत चुनाव को 25 मई तक सम्पन्न कराने को कहा है। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूपी के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 2015 को आधार वर्ष मानकर राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को आरक्षण पूरा करने का आदेश जारी किया है। इससे पूर्व राज्य सरकार ने अदालत में स्वयं कहा कि वह 2015 को आधार वर्ष मानकर त्रिस्तरीय चुनाव में आरक्षण की व्यवस्था लागू करने के लिए तैयार है। प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने माना कि सरकार से आरक्षण प्रक्रिया लागू करने में खामी रह गईं । यह तथ्य सामने आने के पश्चात कोर्ट ने प्रदेश में पंचायत चुनाव को 25 मई तक पूरा करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही 27 मार्च तक संशोधित आरक्षण सूची जारी करने का निर्देश भी दिया है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार इससे पूर्व 17 मार्च को ही आरक्षण की संशोधित सूचित जारी करने की तैयारी में थी।

आप को बतादे उपरोक्त निर्देश न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी व न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने अजय कुमार की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर पारित किया था। इस याचिका में 1995 को आधार वर्ष मानकर आरक्षण तय करने को चुनौती दी गई थी। अजय कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी व न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण की फाइनल सूची जारी करने पर रोक लगा दी थी और आरक्षण की प्रक्रिया पर यूपी सरकार और राज्य चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। आरक्षण को लेकर दायर की गई याचिका में 11 फरवरी 2021 के जारी यूपी शासनादेश को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू करने सम्बंधी नियमावली के नियम 4 के तहत जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत व ग्राम पंचायत की सीटों पर आरक्षण लागू किया जाता है।इसके साथ ही कहा गया था कि आरक्षण लागू के संबंध में 1995 को मूल वर्ष मानते हुए 1995, 2000, 2005 व 2010 के चुनाव सम्पन्न कराए गए थे, लेकिन 16 सितंबर 2015 को एक शासनादेश जारी करते हुए वर्ष 1995 के बजाय वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए आरक्षण लागू करने प्रक्रिया अपनाई गई थी। याचिका में कहा कि उक्त शासनादेश में ही कहा गया कि साल 2001 व 2011 के जनगणना के अनुसार अब बड़ी मात्रा में डेमोग्राफिक बदलाव हो चुका है लिहाजा 1995 को मूल वर्ष मानकर आरक्षण लागू किया जाना उचित नहीं होगा। इसमें कहा गया कि 16 सितंबर 2015 के उक्त शासनादेश को नजरंदाज करते हुए, राज्य सरकार ने 11 फरवरी 2021 का शासनादेश लागू कर दिया है। इसके लिए 1995 को ही मूल वर्ष माना गया है जबकि वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव भी 16 सितंबर 2015 के शासनादेश के ही अनुसार सम्पन्न कराए गए थे।