आगरा।
22 दिसंबर से निरंतर चल रहे गुरमत समागमों की श्रृंखला के अंतर्गत आज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का पावन प्रकाश पर्व गुरुद्वारा दशमेश दरबार, शहीद नगर/विभव नगर, आगरा में अत्यंत श्रद्धा, सत्कार एवं गुरु-प्रेम भाव के साथ मनाया गया।

इस पावन अवसर पर गुरुद्वारा परिसर आलौकिक गुरुबाणी की मधुर ध्वनि, शब्द-कीर्तन और श्रद्धालु संगत की उपस्थिति से पूर्णतः गुरु-मय वातावरण में परिवर्तित हो गया। समागम में पंथ की महान शख्सियत बीबी कमलजीत कौर मस्कीन शाहामारकंडा वालो ने अमृतवाणी एवं गुरुबाणी कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किया।
उन्होंने “राजन के राजा महाराजन के महाराजा”, “डगमग छोड़ रे मन बौरा”, “मैं हौं परम पुरख कौ दासा” जैसे भावपूर्ण शब्दों का कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को गुरु चरणों से जोड़ दिया।
समागम के दौरान पंथ के प्रख्यात कथा वाचक भाई बलदेव सिंह जी ने कथा विचार के माध्यम से श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की महानता, त्याग, शौर्य एवं धर्म रक्षा हेतु दिए गए अद्वितीय योगदान का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब का संपूर्ण जीवन मानवता, सत्य और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित रहा।

इस अवसर पर हरजूरी रागी भाई हरजिंदर सिंह एवं जत्थे ने अपनी पावन हाजरी लगाते हुए गुरुबाणी कीर्तन द्वारा संगत को भावविभोर कर दिया।
समस्त दीवान के दौरान संगत ने गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व को श्रद्धा, प्रेम एवं उल्लास के साथ मनाते हुए गुरु चरणों में नमन किया। समागम ने संगत को गुरु साहिब के आदर्शों पर चलने एवं जीवन को गुरमत के अनुसार ढालने की प्रेरणा प्रदान की।
गुरु की अरदास ग्रंथी मनदीप सिंह एवं ज्ञानी मंशा सिंह द्वारा की गई, हुकमनामा उपरांत गुरु का अटूट लंगर सभी धर्म-प्रेमियों ने ग्रहण किया।
गुरमत समागम में पधारी गुरु-रूप संगत का प्रबंधक कमेटी एवं प्रधान हरपाल सिंह द्वारा आभार व्यक्त किया गया। मुख्य रूप से सेवा में हरपाल सिंह, राजू सलूजा, श्याम भोजवानी, मलकीत सिंह, गुरेंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह, सुरेंद्र सिंह, लाडी वीर, हरजीत सिंह, हरजेंदर सिंह, कमलजीत सिंह, कुलविंदर सिंह, रिंकू ओबेरॉय, माधव उपाध्याय, धर्मेंद्र सिंह, कृपाल सिंह, सनी सिंह सहित अनेक सेवादार उपस्थित रहे।