Etawah News: Virus causing havoc in Mathura and Firozabad reached Etawah, know what is Scurvy typhus virus and methods of prevention
ब्यूरो संवाददाता
इटावा: आज भी देश कोरोना महामारी से पूरी तरह से उभर नहीं पाया है। ऐसे में यूपी के कुछ शहरों में कई बच्चे रहस्यमी बुखार से तप रहे हैं। अचानक बुखार इस कदर बढ़ जाता है कि सांस लेना भी दूभर हो जाता है। फिरोजाबाद, मथुरा के बाद ये रहस्यमयी बीमारी इटावा पहुंच चुकी हैं जिसकी पुष्टि इटावा मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने की हें, उन्होंने बताया की जो लक्षण मरीजो में दिखते हे उनसे ये कहा जा सकता हे की जनपद में मरीज अब डेंगू के अतरिक्त स्कर्ब टाइफस नामक वायरस से भी प्रभावित पाए जा रहे हैं।
इटावा सीएमओ ने बताया की बीते दिनों केजीएयू को 31 सेम्पल भेजे गये थे जिसकी जांच मे सामने आया है कि 31 भेजे गये सैंपिल मे से 7 मरीजो मे स्कर्व टाइफस वायरस के लक्षण थे। जिसके चलते इटावा सीएमओ ने राजधानी लखनऊ से विशेषज्ञ डाक्टरो की टीम को बुलाने के लिए अपर स्वास्थ्य निदेशक को पत्र भी लिखा हैं। साथ साथ इटावा में वायरस से बचाव के लिये जांरी की एडवाइजरी।
स्क्रब टायफस कैसे होता है?
यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) के अनुसार स्क्रब टाइफस एक बीमारी है जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी बैक्टीरिया के कारण होती है। लोगों में यह संक्रमित चिगर्स(लार्वा माइट्स) के काटने से फैलता है। इसे बुश टाइफस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक वेक्टर जनित बीमारी है। यह समय के साथ सेंट्रल नर्वस सिस्टम, कार्डियो वस्कुलर सिस्टम, गुर्दे, सांस से जुड़ी और गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल सिस्टम को प्रभावित करता है। कई मामलों में मल्टी ऑर्गन फेल्योर से रोगी की मौत भी हो सकती है।
क्या है स्क्रब टायफस के लक्षण?
इसके लक्षणों में बुखार और ठंड लगना शामिल है। इसके बाद सिरदर्द, शरीर में दर्द और मांसपेशियों में दर्द होता है जैसा कि कोविड-19 के मामले में होता है. हालांकि, एक स्क्रब टाइफस रोगी कोविड-19 के कई मामलों के विपरीत गंध और स्वाद बना रहता है। कुछ रोगियों में जोड़ों में दर्द भी होता है, जो चिकनगुनिया का लक्षण है।
स्क्रब टायफस का इलाज क्या है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता लगना बहुत जरूरी है। अगर कोई स्क्रब टाइफस से संक्रमित हो जाता है, तो व्यक्ति को एंटीबायोटिक डॉक्सीसाइक्लिन से इलाज करना चाहिए। एजेंसी के अनुसार, जिन लोगों का डॉक्सीसाइक्लिन के साथ जल्दी इलाज किया जाता है, वे आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। चिकित्सीय सलाह पर ही सेवन करें