संवाददाता : विशाल बाबू
इटावा। शहर में कचरा प्रबंधन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। पचावली रोड स्थित जे.पी. उत्सव गार्डन के सामने कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे होने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण शहर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे की मात्रा में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन इसके अनुरूप सफाई व्यवस्था मजबूत नहीं हो पाई है। नतीजतन, सड़कों के किनारे, खाली प्लॉट और रिहायशी इलाकों में कचरा जमा होना आम बात हो गई है।

स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
कचरे के ढेर से उठने वाली दुर्गंध और गंदगी के कारण क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे डेंगू, मलेरिया और हैजा जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है।
प्रमुख कारण बने लापरवाही और जागरूकता की कमी
विशेषज्ञों के अनुसार, कचरे का पृथक्करण न होना, नगर निगम की अनियमित सफाई व्यवस्था, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग और नागरिकों में जागरूकता की कमी इस समस्या के मुख्य कारण हैं।
पशुओं और पर्यावरण पर भी असर
कचरे में मौजूद प्लास्टिक को खाने से आवारा पशुओं के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। वहीं, कचरे के कारण भूजल और वायु प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है।
समाधान की मांग तेज
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नियमित कचरा उठान, पर्याप्त डस्टबिन की व्यवस्था और कचरा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, कचरे के पृथक्करण और कम्पोस्टिंग को बढ़ावा देने की भी जरूरत बताई जा रही है।
जनभागीदारी है जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी बेहद जरूरी है।